Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مُلْكُ: राज्य, स्वामित्व, अधिकार।
- السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ: आकाशों (आसमानों) और धरती का।
- وَمَا فِيهِنَّ: और जो कुछ उन (आकाशों और धरती) में है।
- قَدِيرٌ: हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला, जिसके लिए कोई भी चीज़ कठिन नहीं।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत सूरह अल-माइदा की अंतिम आयत है, जो पूरी सृष्टि पर अल्लाह की संपूर्ण प्रभुता और सर्वोच्च सत्ता को स्पष्ट करती है। अल्लाह ही अकेला है जिसके पास आकाशों और धरती का राज्य है, और जो कुछ भी उनमें है—चाहे वह दृश्य हो या अदृश्य, जीवित हो या निर्जीव—सब कुछ उसी की मिल्कियत (स्वामित्व) में है। वही इन सबका सृष्टिकर्ता, पालनहार और प्रबंधक है। उसकी सत्ता में किसी का कोई हिस्सा नहीं, न कोई साझीदार है और न ही कोई उसके राज्य में हस्तक्षेप कर सकता है।
यह आयत उन ईसाइयों के झूठे दावे का खंडन करती है जो हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को ईश्वर का पुत्र या स्वयं ईश्वर मानते हैं। अल्लाह तआला स्पष्ट करता है कि राज्य केवल उसी का है, न कि ईसा (अलैहिस्सलाम) का और न ही किसी अन्य मख़लूक़ (प्राणी) का। ईसा (अलैहिस्सलाम) स्वयं अल्लाह के एक नबी और बंदे थे, जो उसी की आज्ञा के अधीन थे।
आगे अल्लाह कहता है कि वह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है। उसके लिए कोई भी कार्य कठिन नहीं है—चाहे वह पैदा करना हो, मारना हो, जिलाना हो, या किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना हो। उसकी कुदरत (शक्ति) की कोई सीमा नहीं, और वह जो चाहता है, बस "कुन" (हो जा) कहने से वह हो जाता है। यह घोषणा मोमिनों के दिलों को इस बात का यक़ीन दिलाती है कि उनका रब सब कुछ कर सकता है, और वही उनकी सहायता के लिए काफी है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- तौहीद (एकेश्वरवाद) की पूर्णता: यह आयत हमें सिखाती है कि सारा राज्य और अधिकार केवल अल्लाह का है। किसी भी प्राणी को—चाहे वह नबी हो, फरिश्ता हो या कोई और—ईश्वरत्व का दर्जा देना शिर्क है। यह हमें अपने ईमान को शिर्क से पाक रखने की ताकीद करती है।
- अल्लाह पर भरोसा: जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर (सामर्थ्यवान) है, तो हमारे दिलों में उस पर पूरा भरोसा पैदा होता है। मुश्किल से मुश्किल हालात में भी हम जानते हैं कि अल्लाह के लिए कुछ भी असंभव नहीं, इसलिए हम उसी से मदद माँगते हैं।
- विनम्रता और अकीदे की सफाई: यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने नबियों और बुज़ुर्गों की इज़्ज़त करें, लेकिन उन्हें अल्लाह का दर्जा न दें। सच्चा मुसलमान वही है जो अल्लाह की बंदगी में किसी को शरीक न करे।
- आख़िरी पैग़ाम: यह आयत सूरह अल-माइदा की आख़िरी आयत है, जो एक तरह से पूरे दीन (इस्लाम) का ख़ुलासा है—कि सब कुछ अल्लाह का है और वही सब पर ग़ालिब है। यह हमें याद दिलाती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पहलू अल्लाह की रज़ा के अनुसार होना चाहिए।
📜 आयत 118-120 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 120
सूरा अल-माइदा आयत 120 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ उनमें है सब…सूरा आयत 120/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 118–120. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


