अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَسَطتَ – तूने बढ़ाई (हाथ)
- لِتَقْتُلَنِي – मुझे मार डालने के लिए
- بَاسِطٍ – बढ़ाने वाला
- أَخَافُ – मैं डरता हूँ
- رَبِّ الْعَالَمِينَ – सारे जहानों का पालनहार
तफसीर (व्याख्या):
हाबिल (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाई क़ाबिल को नसीहत करते हुए कहा: “अगर तू मुझे क़त्ल करने के लिए अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाएगा, तो मैं तेरी तरफ अपना हाथ नहीं बढ़ाऊँगा कि तुझे क़त्ल करूँ।” यह बात उन्होंने कमज़ोरी या बुज़दिली की वजह से नहीं कही, बल्कि इसलिए कही कि उनके दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ था। वे जानते थे कि अल्लाह तआला ने क़त्ल को हराम किया है, और एक मोमिन का काम यह नहीं कि वह ज़ुल्म का जवाब ज़ुल्म से दे। हाबिल ने यह भी समझाना चाहा कि मेरा इम्तिना (इनकार) तेरे खिलाफ़ जंग का एलान नहीं, बल्कि अल्लाह के डर से है — मैं उस रब से डरता हूँ जो तमाम कायनात का पालनहार है, और मैं उसकी नाराज़गी को कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता।
यहाँ हाबिल ने एक बहुत बड़ी तालीम दी — कि इंसान चाहे कितना ही मज़लूम हो, उसे चाहिए कि वह अल्लाह की मरज़ी को अपनी ज़ात पर मुक़द्दम रखे। उन्होंने यह भी दिखाया कि सब्र और अल्लाह का ख़ौफ़ ही असली ताक़त है, और जो शख्स अल्लाह से डरता है, वह कभी ज़ुल्म के रास्ते पर नहीं चलता। यह वाक़िया हमें सिखाता है कि मुसीबत और ज़ुल्म के वक़्त भी हमें इंसाफ़, हलीमी और अल्लाह की रज़ा को मद्देनज़र रखना चाहिए। हाबिल का यह अंदाज़ हमारे लिए एक रोशन नमूना है कि दुश्मन के साथ भी हमें अल्लाह की सीखी हुई अख़लाक़ का मुज़ाहिरा करना चाहिए, और यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में सरबुलंदी देता है।
📜 आयत 26-30 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 28
सूरा अल-माइदा आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर तुम मेरे क़त्ल के इरादे से मेरी तरफ़ अपना…सूरा आयत 28/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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