अल-माइदा · 37/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
يُرِيدُونَ أَن يَخْرُجُوا مِنَ النَّارِ وَمَا هُم بِخَارِجِينَ مِنْهَا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ مُّقِيمٌ ۝٣٧
Yureedoona ai yakhrujoo minan Naari wa maa hum bikhaari jeena minhaa wa lahum `azaabum muqeem
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग तो चाहेंगे कि किसी तरह जहन्नुम की आग से निकल भागे मगर वहॉ से तो वह निकल ही नहीं सकते और उनके लिए तो दाएमी अज़ाब है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُرِيدُونَ – वे चाहते हैं
  • أَن يَخْرُجُوا – कि वे निकल जाएँ
  • مِنَ النَّارِ – आग से
  • وَمَا هُم بِخَارِجِينَ – और वे निकलने वाले नहीं हैं
  • عَذَابٌ مُّقِيمٌ – स्थायी/हमेशा रहने वाला अज़ाब

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों की हालत बयान कर रही है जो जहन्नम (नरक) में डाल दिए जाएँगे। जब वे आग की भयावहता, उसकी लपटों और उसमें मिलने वाली यातनाओं का सामना करेंगे, तो उनके दिलों में यह इच्छा पैदा होगी कि काश वे इस आग से निकल जाएँ। वे बार-बार यह चाहेंगे और कोशिश करेंगे, लेकिन उनके लिए यह नामुमकिन होगा। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वे आग से निकलना चाहेंगे, लेकिन वे कभी उससे निकल नहीं पाएँगे। उनकी यह इच्छा कभी पूरी नहीं होगी, और उनके लिए एक ऐसा अज़ाब है जो हमेशा रहने वाला है, जो कभी ख़त्म नहीं होगा और न ही उसमें कोई कमी आएगी। यह उनके कुफ़्र और अल्लाह की आयतों को झुठलाने का नतीजा होगा।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें यह समझाती है कि आख़िरत का अज़ाब स्थायी है और वहाँ से छुटकारा पाने का कोई रास्ता नहीं होगा। इसलिए हमें दुनिया में रहते हुए अल्लाह की नाफ़रमानी से बचना चाहिए।
  2. यह हमें अल्लाह के दीन (इस्लाम) की पकड़ को मज़बूत करने की तरग़ीब देती है, क्योंकि दुनिया में मौजूद मौका ही आख़िरत की सफलता का ज़रिया है।
  3. इस आयत से हमें अल्लाह की रहमत का एहसास होता है कि उसने हमें दुनिया में भेजकर सच्चा रास्ता दिखाया है और तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है, ताकि हम जहन्नम से बच सकें।
  4. यह हमें यह सिखाती है कि अल्लाह का फैसला अटल है, और जो लोग उसके हुक्मों की परवाह नहीं करते, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनानी चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 35-39 — अल-माइदा

35يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَابْتَغُوا إِلَيْهِ الْوَسِيلَةَ وَجَاهِدُوا فِي سَبِيلِهِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरते रहो और उसके (तक़र्रब (क़रीब होने) के) ज़रिये की जुस्तजू में रहो और उसकी राह में जेहाद करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ
36إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْ أَنَّ لَهُم مَّا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا وَمِثْلَهُ مَعَهُ لِيَفْتَدُوا بِهِ مِنْ عَذَابِ يَوْمِ الْقِيَامَةِ مَا تُقُبِّلَ مِنْهُمْ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया अगर उनके पास ज़मीन में जो कुछ (माल ख़ज़ाना) है (वह) सब बल्कि उतना और भी उसके साथ हो कि रोज़े क़यामत के अज़ाब का मुआवेज़ा दे दे (और ख़ुद बच जाए) तब भी (उसका ये मुआवेज़ा) कुबूल न किया जाएगा और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
37يُرِيدُونَ أَن يَخْرُجُوا مِنَ النَّارِ وَمَا هُم بِخَارِجِينَ مِنْهَا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ مُّقِيمٌ
वह लोग तो चाहेंगे कि किसी तरह जहन्नुम की आग से निकल भागे मगर वहॉ से तो वह निकल ही नहीं सकते और उनके लिए तो दाएमी अज़ाब है
38وَالسَّارِقُ وَالسَّارِقَةُ فَاقْطَعُوا أَيْدِيَهُمَا جَزَاءً بِمَا كَسَبَا نَكَالًا مِّنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और चोर ख्वाह मर्द हो या औरत तुम उनके करतूत की सज़ा में उनका (दाहिना) हाथ काट डालो ये (उनकी सज़ा) ख़ुदा की तरफ़ से है और ख़ुदा (तो) बड़ा ज़बरदस्त हिकमत वाला है
39فَمَن تَابَ مِن بَعْدِ ظُلْمِهِ وَأَصْلَحَ فَإِنَّ اللَّهَ يَتُوبُ عَلَيْهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
हॉ जो अपने गुनाह के बाद तौबा कर ले और अपने चाल चलन दुरूस्त कर लें तो बेशक ख़ुदा भी तौबा कुबूल कर लेता है क्योंकि ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अल-माइदा 37

सूरा अल-माइदा आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग तो चाहेंगे कि किसी तरह जहन्नुम की आग…

सूरा आयत 37/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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