वह लोग तो चाहेंगे कि किसी तरह जहन्नुम की आग से निकल भागे मगर वहॉ से तो वह निकल ही नहीं सकते और उनके लिए तो दाएमी अज़ाब है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
يُرِيدُونَ – वे चाहते हैं
أَن يَخْرُجُوا – कि वे निकल जाएँ
مِنَ النَّارِ – आग से
وَمَا هُم بِخَارِجِينَ – और वे निकलने वाले नहीं हैं
عَذَابٌ مُّقِيمٌ – स्थायी/हमेशा रहने वाला अज़ाब
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन काफ़िरों की हालत बयान कर रही है जो जहन्नम (नरक) में डाल दिए जाएँगे। जब वे आग की भयावहता, उसकी लपटों और उसमें मिलने वाली यातनाओं का सामना करेंगे, तो उनके दिलों में यह इच्छा पैदा होगी कि काश वे इस आग से निकल जाएँ। वे बार-बार यह चाहेंगे और कोशिश करेंगे, लेकिन उनके लिए यह नामुमकिन होगा। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वे आग से निकलना चाहेंगे, लेकिन वे कभी उससे निकल नहीं पाएँगे। उनकी यह इच्छा कभी पूरी नहीं होगी, और उनके लिए एक ऐसा अज़ाब है जो हमेशा रहने वाला है, जो कभी ख़त्म नहीं होगा और न ही उसमें कोई कमी आएगी। यह उनके कुफ़्र और अल्लाह की आयतों को झुठलाने का नतीजा होगा।
फ़ायदे (सबक):
यह आयत हमें यह समझाती है कि आख़िरत का अज़ाब स्थायी है और वहाँ से छुटकारा पाने का कोई रास्ता नहीं होगा। इसलिए हमें दुनिया में रहते हुए अल्लाह की नाफ़रमानी से बचना चाहिए।
यह हमें अल्लाह के दीन (इस्लाम) की पकड़ को मज़बूत करने की तरग़ीब देती है, क्योंकि दुनिया में मौजूद मौका ही आख़िरत की सफलता का ज़रिया है।
इस आयत से हमें अल्लाह की रहमत का एहसास होता है कि उसने हमें दुनिया में भेजकर सच्चा रास्ता दिखाया है और तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है, ताकि हम जहन्नम से बच सकें।
यह हमें यह सिखाती है कि अल्लाह का फैसला अटल है, और जो लोग उसके हुक्मों की परवाह नहीं करते, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनानी चाहिए।
इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया अगर उनके पास ज़मीन में जो कुछ (माल ख़ज़ाना) है (वह) सब बल्कि उतना और भी उसके साथ हो कि रोज़े क़यामत के अज़ाब का मुआवेज़ा दे दे (और ख़ुद बच जाए) तब भी (उसका ये मुआवेज़ा) कुबूल न किया जाएगा और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
और चोर ख्वाह मर्द हो या औरत तुम उनके करतूत की सज़ा में उनका (दाहिना) हाथ काट डालो ये (उनकी सज़ा) ख़ुदा की तरफ़ से है और ख़ुदा (तो) बड़ा ज़बरदस्त हिकमत वाला है
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