Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِيَفْتَدُوا بِهِ: इससे अपने आपको छुड़ाना चाहें, फिदया देना चाहें।
- مَا تُقُبِّلَ مِنْهُمْ: उनसे यह फिदया (मुआवज़ा) क़बूल नहीं किया जाएगा।
- عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक और बहुत तकलीफ़ देने वाला अज़ाब।
तफ़सीर:
जिन लोगों ने अल्लाह की वहदानियत (एकता) और उसके दीन को नकार दिया और कुफ़्र पर ही मर गए, अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर उनके पास धरती की तमाम चीज़ें हों और उतनी ही और भी हों — यानी दुनिया का सारा खज़ाना और उसके बराबर और भी माल — और वे उसे क़ियामत के दिन के अज़ाब से छुटकारा पाने के लिए फिदया (मुआवज़ा) के तौर पर दे दें, तो भी उनसे यह हरगिज़ क़बूल नहीं किया जाएगा। क्योंकि कुफ़्र पर मौत पाने वालों के लिए कोई मुआवज़ा या छुटकारा नहीं है। अल्लाह का फ़ैसला पहले ही सुना दिया गया है कि ऐसे लोगों के लिए दर्दनाक अज़ाब है, जो उन्हें हर तरफ़ से घेर लेगा और जिससे वे कभी निकल नहीं पाएँगे।
फ़ायदे:
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा इसी दुनिया में खुला है। जो कोई भी जीते-जी तौबा कर ले और ईमान ले आए, उसके लिए माफ़ी है, लेकिन मौत के बाद या क़ियामत के दिन कोई फिदया या मुआवज़ा क़बूल नहीं होगा।
- यह आयत हमें दुनिया की चीज़ों पर भरोसा न करने की तालीम देती है। चाहे इंसान के पास दुनिया भर का माल हो, वह उसे अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकता। नजात (मुक्ति) का रास्ता सिर्फ़ ईमान और नेक अमल है।
- यह आयत हमें अल्लाह के दीन की अहमियत समझाती है कि कुफ़्र और नाफ़रमानी की ज़िंदगी गुज़ारने के बाद पछताने का कोई फ़ायदा नहीं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारें और उसके दीन को अपनी सबसे बड़ी दौलत समझें।
- यह आयत हमें क़ियामत के दिन के अज़ाब की हक़ीक़त से आगाह करती है ताकि हम उससे डरें और अपने आपको उससे बचाने की कोशिश करें। डर और उम्मीद के बीच ज़िंदगी गुज़ारना ही मोमिन की पहचान है।
📜 आयत 34-38 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 36
सूरा अल-माइदा आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया…सूरा आयत 36/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


