अज़-ज़ारियात · 22/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
وَفِي السَّمَاءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ ۝٢٢
Wa fissamaaa`i rizqukum wa maa too`adoon
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हारी रोज़ी और जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है आसमान में है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रिज़्क़ (رزق): आजीविका, वह सब कुछ जो अल्लाह तआला अपने बंदों को देता है—चाहे वह खाना-पानी हो, बारिश हो, या दीन और हिदायत की नेमतें हों।
  • मा तू'अदून (ما توعدون): वह सब कुछ जिसका वादा अल्लाह ने किया है—अच्छा हो या बुरा, यानी क़यामत, जन्नत, जहन्नम, हिसाब-किताब, और हर वह चीज़ जो लिखी और मुक़द्दर की जा चुकी है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों को बता रहे हैं कि तुम्हारी रोज़ी और आजीविका का इंतज़ाम उसने अपने हाथ में ले रखा है। यह रिज़्क़ सिर्फ़ दुनिया का खाना-पीना नहीं है, बल्कि इसमें दीन की हिदायत, ईमान की तौफ़ीक़, और वह सब कुछ शामिल है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत में फ़ायदा पहुँचाता है। आसमान से बारिश का नाज़िल होना, जो ज़मीन से अनाज और फल उगाती है, यह भी उसी रिज़्क़ का ज़रिया है।

और जो चीज़ें तुम्हें बताई गई हैं—जैसे क़यामत का आना, मौत के बाद ज़िंदा होना, अच्छे और बुरे का बदला, जन्नत और जहन्नम—यह सब भी आसमान में लिखा और मुक़द्दर किया जा चुका है। यानी जिस तरह तुम्हारी रोज़ी आसमान से मुक़र्रर होकर आती है, उसी तरह तुम्हारा अंजाम भी अल्लाह के यहाँ तय हो चुका है।

यह आयत इंसान को यक़ीन दिलाती है कि उसकी रोज़ी अल्लाह के ज़िम्मे है, इसलिए उसे चिंता और परेशानी में नहीं रहना चाहिए। अल्लाह ने हर मख़लूक़ की रोज़ी का इंतज़ाम किया है, और वह अपने बंदों को कभी भूखा नहीं छोड़ता। साथ ही यह भी याद दिलाती है कि जिस दिन का वादा किया गया है—हिसाब का दिन—वह ज़रूर आने वाला है, और उस दिन हर इंसान को उसके अमल का बदला मिलेगा।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी रोज़ी की तलाश में अल्लाह पर भरोसा रखें, हलाल कमाई करें, और उस दिन की तैयारी करें जब हम अपने रब के सामने खड़े होंगे। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत और उसका इंतज़ाम इतना वसीअ है कि उसने हमारी दुनिया और आख़िरत दोनों का बंदोबस्त किया है। हमें सिर्फ़ उसकी इबादत करनी है और उसके बताए रास्ते पर चलना है, ताकि हम उसके वादे किए हुए इनाम—जन्नत—को पा सकें।



📜 आयत 20-24 — सूरा अज़-ज़ारियात

20وَفِي الْأَرْضِ آيَاتٌ لِّلْمُوقِنِينَ
और यक़ीन करने वालों के लिए ज़मीन में (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
21وَفِي أَنفُسِكُمْ ۚ أَفَلَا تُبْصِرُونَ
और ख़ुदा तुम में भी हैं तो क्या तुम देखते नहीं
22وَفِي السَّمَاءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ
और तुम्हारी रोज़ी और जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है आसमान में है
23فَوَرَبِّ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ إِنَّهُ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَا أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ
तो आसमान व ज़मीन के मालिक की क़सम ये (क़ुरान) बिल्कुल ठीक है जिस तरह तुम बातें करते हो
24هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَاهِيمَ الْمُكْرَمِينَ
क्या तुम्हारे पास इबराहीम के मुअज़िज़ मेहमानो (फ़रिश्तों) की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह लोग उनके पास आए
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
22आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 22

सूरा अज़-ज़ारियात आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारी रोज़ी और जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया…

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Friday, October 2, 2026

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