अज़-ज़ारियात · 38/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
وَفِي مُوسَىٰ إِذْ أَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ ۝٣٨
Wa fee Moosaaa iz arsalnaahu ilaa Fir`wna bisultaa nim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
जब हमने उनको फिरऔन के पास खुला हुआ मौजिज़ा देकर भेजा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • सुल्तानिन मुबीन: स्पष्ट प्रमाण, खुला हुआ तर्क, चमत्कारिक निशानियाँ।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के ज़िक्र को एक और निशानी के रूप में पेश किया है। जिस तरह पिछली आयतों में नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के अज़ाब का ज़िक्र हुआ, उसी तरह अब मूसा (अलैहिस्सलाम) के क़िस्से की तरफ़ इशारा किया जा रहा है। अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को फ़िरऔन के पास भेजा, जो मिस्र का सबसे ज़ालिम और सरकश बादशाह था। उसे साफ़ और खुले प्रमाणों के साथ भेजा गया — यानी वे मोजिज़े (चमत्कार) जो साफ़ दिखाई देते थे, जैसे लाठी का अजदहा बनना, हाथ का चमकना, और दूसरी खुली निशानियाँ। ये सब इसलिए थीं कि फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर हुज्जत क़ायम हो जाए और सच्चाई सामने आ जाए।

मगर फ़िरऔन ने अपनी ताक़त और अपने लश्कर के घमंड में आकर इन निशानियों को झुठला दिया और कहा कि मूसा जादूगर है या पागल। उसने हक़ को क़बूल नहीं किया, और अल्लाह ने उसे और उसके साथियों को समुंदर में ग़रक़ कर दिया। यह घटना उन लोगों के लिए बड़ी इबरत (नसीहत) है जो अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं। जो लोग दिल से अल्लाह से डरते हैं, वे इन निशानियों से सबक़ लेते हैं और अपनी ज़िंदगी को सीधा कर लेते हैं।

प्यारे भाइयो! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की ताक़त के आगे कोई भी ताक़तवर नहीं टिक सकता। फ़िरऔन जैसा बादशाह, जो खुद को ख़ुदा कहता था, एक पल में तबाह हो गया। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के भेजे हुए रसूलों और उनकी लाई हुई हिदायत को क़बूल करें, और अपनी ज़िंदगी को उसी के हिसाब से ढालें। यही कामयाबी की राह है। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 36-40 — अज़-ज़ारियात

36فَمَا وَجَدْنَا فِيهَا غَيْرَ بَيْتٍ مِّنَ الْمُسْلِمِينَ
और वहाँ तो हमने एक के सिवा मुसलमानों का कोई घर पाया भी नहीं
37وَتَرَكْنَا فِيهَا آيَةً لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ الْعَذَابَ الْأَلِيمَ
और जो लोग दर्दनाक अज़ाब से डरते हैं उनके लिए वहाँ (इबरत की) निशानी छोड़ दी और मूसा (के हाल) में भी (निशानी है)
38وَفِي مُوسَىٰ إِذْ أَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
जब हमने उनको फिरऔन के पास खुला हुआ मौजिज़ा देकर भेजा
39فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِ وَقَالَ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ
तो उसने अपने लशकर के बिरते पर मुँह मोड़ लिया और कहने लगा ये तो (अच्छा ख़ासा) जादूगर या सौदाई है
40فَأَخَذْنَاهُ وَجُنُودَهُ فَنَبَذْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌ
तो हमने उसको और उसके लशकर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में पटक दिया
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अनुवाद — अज़-ज़ारियात 38

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Tuesday, August 18, 2026

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