अज़-ज़ारियात · 39/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِ وَقَالَ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ ۝٣٩
Fatawalla biruknihee wa qaala saahirun aw majnoon
📖 हिंदी अर्थ
तो उसने अपने लशकर के बिरते पर मुँह मोड़ लिया और कहने लगा ये तो (अच्छा ख़ासा) जादूगर या सौदाई है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَتَوَلَّى – उसने मुँह मोड़ा, अर्थात ईमान लाने से इनकार कर दिया।
  • بِرُكْنِهِ – अपनी ताकत और सैन्य शक्ति के सहारे, यानी अपने पक्ष और गुट के बल पर घमंड करते हुए।
  • سَاحِرٌ – जादूगर।
  • مَجْنُونٌ – पागल, दीवाना।

तफसीर (व्याख्या):

जब अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को फ़िरऔन और उसकी क़ौम की ओर स्पष्ट निशानियों और चमत्कारों के साथ भेजा, तो फ़िरऔन ने अपनी ताकत, अपने लश्कर और अपने साथियों के बल पर घमंड करते हुए ईमान लाने से सिर्फ़ इनकार ही नहीं किया, बल्कि उसने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में कहा कि "यह या तो जादूगर है जो लोगों को अपने जादू से बहकाता है, या पागल है जो बेसिर-पैर की बातें करता है।"

फ़िरऔन का यह क़ौल उसकी सरकशी और हक़ से मुँह मोड़ने की सबसे बड़ी निशानी थी। उसने अपनी ताकत को अपना सहारा बनाया और सच्चाई को झुठलाने के लिए हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर झूठे इल्ज़ाम लगाए। वह यह समझ नहीं पाया कि अल्लाह की ताकत किसी भी बादशाह की ताकत से कहीं बढ़कर है, और जो लोग अपनी ताकत पर इतराते हैं, अल्लाह उन्हें ज़लील करके रखता है।

दावत और नसीहत:

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि सच्चाई को कभी भी ताकत और ज़ोर से नहीं दबाया जा सकता। फ़िरऔन के पास अपनी सल्तनत, सेना और तमाम साज़ो-सामान था, लेकिन जब उसने अल्लाह के नबी का मुक़ाबला किया, तो उसकी सारी ताकत बेकार साबित हुई और वह अल्लाह के अज़ाब में गिरफ्तार हो गया। यह उन लोगों के लिए बड़ी सीख है जो अपनी दौलत, ओहदे या ताकत पर घमंड करते हैं और हक़ को क़बूल करने से इनकार करते हैं। अल्लाह उन्हें मौका देता है, लेकिन जब वे हद से बढ़ जाते हैं, तो उनकी पकड़ बहुत सख्त होती है। हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह के आगे झुकें, उसके नबियों की बात मानें और कभी भी अपनी ताकत या जान-माल पर इतराएं नहीं, क्योंकि असली ताकत तो सिर्फ़ अल्लाह की है।



📜 आयत 37-41 — अज़-ज़ारियात

37وَتَرَكْنَا فِيهَا آيَةً لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ الْعَذَابَ الْأَلِيمَ
और जो लोग दर्दनाक अज़ाब से डरते हैं उनके लिए वहाँ (इबरत की) निशानी छोड़ दी और मूसा (के हाल) में भी (निशानी है)
38وَفِي مُوسَىٰ إِذْ أَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
जब हमने उनको फिरऔन के पास खुला हुआ मौजिज़ा देकर भेजा
39فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِ وَقَالَ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ
तो उसने अपने लशकर के बिरते पर मुँह मोड़ लिया और कहने लगा ये तो (अच्छा ख़ासा) जादूगर या सौदाई है
40فَأَخَذْنَاهُ وَجُنُودَهُ فَنَبَذْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌ
तो हमने उसको और उसके लशकर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में पटक दिया
41وَفِي عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الرِّيحَ الْعَقِيمَ
और वह तो क़ाबिले मलामत काम करता ही था और आद की क़ौम (के हाल) में भी निशानी है हमने उन पर एक बे बरकत ऑंधी चलायी
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अनुवाद — अज़-ज़ारियात 39

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Tuesday, August 18, 2026

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