अज़-ज़ारियात · 46/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ ۝٤٦
Wa qawma Noohim min qablu innahum kaano qawman faasiqeen
📖 हिंदी अर्थ
और (उनसे) पहले (हम) नूह की क़ौम को (हलाक कर चुके थे) बेशक वह बदकार लोग थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • क़ौमे नूह: हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम।
  • मिन क़ब्लु: इनसे पहले (यानी आद और समूद की क़ौमों से पहले)।
  • फ़ासिक़ीन: आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, अल्लाह की अवज्ञा करने वाले, पापी।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी पिछली उम्मतों के हालात बयान कर रहे हैं, ताकि लोगों को सबक़ मिले। अल्लाह फ़रमाता है कि हमने इनसे पहले हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम को भी हलाक कर दिया था। वे लोग अपने नबी की दावत को ठुकराने वाले और अल्लाह की इताअत से निकल जाने वाले थे। उन्होंने अपने नबी को झुठलाया, उनका मज़ाक उड़ाया और सच्चाई को कबूल करने से इनकार कर दिया। जब उनकी सरकशी हद से बढ़ गई, तो अल्लाह ने उन्हें तूफ़ान (सैलाब) में डुबो कर हलाक कर दिया।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का अज़ाब किसी पर ज़ुल्म नहीं है, बल्कि उनके अपने कर्मों का नतीजा है। जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी में डूबे रहते हैं और अपनी ज़िद पर अड़े रहते हैं, वे अल्लाह के अज़ाब से नहीं बच सकते। यह क़ौमें इतिहास के पन्नों में सिर्फ़ एक सबक़ बनकर रह गईं।

इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर चलना चाहिए और अल्लाह के हुक्मों का पालन करना चाहिए। अल्लाह की रहमत उन्हीं के लिए है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, तौबा करते हैं और अपनी ज़िंदगी को उसके दीन के मुताबिक ढालते हैं। याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत उससे भी बढ़कर है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं, उन्हें आख़िरत में भी अपने किए की सज़ा भुगतनी पड़ेगी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएं और उसके रसूल ﷺ की पैरवी करें, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल कर सकें।

🎧 सुनें

📜 आयत 44-48 — अज़-ज़ारियात

44فَعَتَوْا عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ الصَّاعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَ
तो उन्होने अपने परवरदिगार के हुक्म से सरकशी की तो उन्हें एक रोज़ कड़क और बिजली ने ले डाला और देखते ही रह गए
45فَمَا اسْتَطَاعُوا مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا مُنتَصِرِينَ
फिर न वह उठने की ताक़त रखते थे और न बदला ही ले सकते थे
46وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
और (उनसे) पहले (हम) नूह की क़ौम को (हलाक कर चुके थे) बेशक वह बदकार लोग थे
47وَالسَّمَاءَ بَنَيْنَاهَا بِأَيْدٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ
और हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है
48وَالْأَرْضَ فَرَشْنَاهَا فَنِعْمَ الْمَاهِدُونَ
और ज़मीन को भी हम ही ने बिछाया तो हम कैसे अच्छे बिछाने वाले हैं
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीRevelation
46आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 46

सूरा अज़-ज़ारियात आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (उनसे) पहले (हम) नूह की क़ौम को (हलाक कर…

सूरा आयत 46/60 — अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ारियात सुनें, अज़-ज़ारियात अनुवाद, अज़-ज़ारियात mp3, अज़-ज़ारियात pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए