अत-तूर · 29/49
अनुवाद उच्चारण — अत-तूर
فَذَكِّرْ فَمَا أَنتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍ ۝٢٩
Fazakkir famaaa anta bini`mati rabbika bikaahininw wa laa majnoon
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) तुम नसीहत किए जाओ तो तुम अपने परवरदिगार के फज़ल से न काहिन हो और न मजनून किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَذَكِّرْ: नसीहत करते रहो, याद दिलाते रहो।
  • بِنِعْمَتِ رَبِّكَ: तुम्हारे रब की उस नेमत (कृपा) के कारण, यानी नबुव्वत और अक्ल-समझ की नेमत।
  • بِكَاهِنٍ: काहिन (ज्योतिषी/غيب की खबर देने वाला), जो जिन्नात के ज़रिये ग़ैब की ख़बरें देने का दावा करता है।
  • مَجْنُونٍ: पागल, दीवाना।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप अपने रब का पैग़ाम लोगों तक पहुँचाते रहिए, उन्हें क़ुरआन की आयतों के ज़रिये नसीहत करते रहिए, और उनके झूठे इल्ज़ामात की परवाह न कीजिए। आपका रब आप पर जो नेमतें बरसा रहा है—नबुव्वत, वही (प्रकाशना), और वह अक्ल व समझ जो आपको अता की गई है—उन्हीं की बदौलत आप हर उस इल्ज़ाम से पाक हैं जो ये मुशरिकीन आप पर लगाते हैं।

ये लोग आपको "काहिन" (ज्योतिषी) कहते हैं, जो जिन्नों के ज़रिये ग़ैब की ख़बरें देता है, और कभी "मजनून" (पागल) कहते हैं, जो बेसुध होकर बोलता है। लेकिन ये दोनों इल्ज़ाम बिल्कुल बातिल हैं। आप न तो काहिन हैं और न ही मजनून। आप तो सच्चे नबी हैं, जिन पर रब की वही उतरती है, और आपकी हर बात हिकमत और सच्चाई पर आधारित है।

ये इल्ज़ाम दरअसल उनकी मायूसी और सच्चाई से भागने की कोशिश है। जब उनके पास कोई जवाब नहीं होता, तो वे ऐसे झूठे आरोप लगाकर लोगों को सच्चाई से भटकाना चाहते हैं। लेकिन अल्लाह ने आपको अपनी नेमत से ऐसा मुक़ाम दिया है कि ये सारी कोशिशें नाकाम रहेंगी।

इस आयत में हमारे लिए भी बड़ी सीख है—सच्चाई पर क़ायम रहने वालों पर लोग तरह-तरह के इल्ज़ाम लगाते हैं, लेकिन जो अल्लाह पर भरोसा रखता है, अल्लाह उसे हर बुराई से महफूज़ रखता है। आप भी अपने जीवन में सच्चाई और नेकी की राह पर चलते रहिए, चाहे लोग कुछ भी कहें। अल्लाह की नेमत और उसकी मदद उन्हीं के साथ होती है जो उसकी राह पर साबित-क़दम रहते हैं।



📜 आयत 27-31 — अत-तूर

27فَمَنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَانَا عَذَابَ السَّمُومِ
तो ख़ुदा ने हम पर बड़ा एहसान किया और हमको (जहन्नुम की) लौ के अज़ाब से बचा लिया
28إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْبَرُّ الرَّحِيمُ
इससे क़ब्ल हम उनसे दुआएँ किया करते थे बेशक वह एहसान करने वाला मेहरबान है
29فَذَكِّرْ فَمَا أَنتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍ
तो (ऐ रसूल) तुम नसीहत किए जाओ तो तुम अपने परवरदिगार के फज़ल से न काहिन हो और न मजनून किया
30أَمْ يَقُولُونَ شَاعِرٌ نَّتَرَبَّصُ بِهِ رَيْبَ الْمَنُونِ
क्या (तुमको) ये लोग कहते हैं कि (ये) शायर हैं (और) हम तो उसके बारे में ज़माने के हवादिस का इन्तेज़ार कर रहे हैं
31قُلْ تَرَبَّصُوا فَإِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُتَرَبِّصِينَ
तुम कह दो कि (अच्छा) तुम भी इन्तेज़ार करो मैं भी इन्तेज़ार करता हूँ
अत-तूरकुरान सूची
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अनुवाद — अत-तूर 29

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Tuesday, August 18, 2026

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