अत-तूर · 43/49
अनुवाद उच्चारण — अत-तूर
أَمْ لَهُمْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ ۝٤٣
Am lahum ilaahun ghairul laa; subhaanal laahi `ammaa yushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
या ख़ुदा के सिवा इनका कोई (दूसरा) माबूद है जिन चीज़ों को ये लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हैं वह उससे पाक और पाक़ीज़ा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَمْ: यहाँ पर इसका अर्थ है "क्या" (प्रश्नवाचक), यानी क्या उनके पास...
  • إِلَٰهٌ: पूजा के योग्य, जिसकी बंदगी की जाए।
  • غَيْرُ اللَّهِ: अल्लाह के अलावा कोई और।
  • سُبْحَانَ اللَّهِ: अल्लाह पाक है, वह हर कमी और दोष से मुक्त है।
  • عَمَّا يُشْرِكُونَ: उन चीज़ों से जिन्हें वे (मुशरिकीन) अल्लाह का साझीदार बनाते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बहुदेववादियों) से एक स्पष्ट और कड़ा प्रश्न पूछ रहे हैं: "क्या उनके पास अल्लाह के अलावा कोई और पूजा के योग्य इबादत करने वाला माबूद है?" यानी क्या सचमुच कोई ऐसा है जो उनकी पूजा का हक़दार हो, जो उन्हें फायदा या नुकसान पहुँचा सके, और जो उनकी दुआओं को सुन सके?

यह प्रश्न उन्हें उनके दिलों को झिंझोड़ने के लिए है। क्योंकि सच्चाई यह है कि इस पूरी कायनात में कोई भी ऐसा नहीं है जो अल्लाह के सिवा इबादत के लायक हो। न कोई शरीक है उसकी हुकूमत में, न उसकी वहदानियत (एकता) में, न उसकी इबादत में।

फिर अल्लाह तआला अपनी पाकी बयान करते हुए फरमाते हैं: "अल्लाह पाक है उन चीज़ों से जो ये लोग उसका साझीदार बनाते हैं।" यानी अल्लाह हर उस चीज़ से पाक और बरी है जो ये मुशरिकीन उसके साथ शरीक ठहराते हैं — चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, पेड़ हों, सितारे हों, या फरिश्ते हों। ये सब उसकी मख़लूक़ (रचना) हैं, और वह इन सबसे बेनियाज़ और बुलंद है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि तौहीद (एकेश्वरवाद) ही असली सच्चाई है। जब हम सिर्फ अल्लाह की इबादत करते हैं, तो हमारा दिल उससे जुड़ जाता है, और हमें वह ताकत और सुकून मिलता है जो किसी और से नहीं मिल सकता। अल्लाह ने हमें बताया है कि वह अकेला ही सुनने वाला, देखने वाला, और मदद करने वाला है।

इसलिए, प्यारे भाइयों और बहनों! हमें अपनी ज़िंदगी के हर मामले में सिर्फ अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। जब हम मुश्किल में हों, तो उसी से दुआ करें। जब हम खुश हों, तो उसी का शुक्र अदा करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह हमें सच्ची तौहीद पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 41-45 — अत-तूर

41أَمْ عِندَهُمُ الْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ
या इन लोगों के पास ग़ैब (का इल्म) है कि वह लिख लेते हैं
42أَمْ يُرِيدُونَ كَيْدًا ۖ فَالَّذِينَ كَفَرُوا هُمُ الْمَكِيدُونَ
या ये लोग कुछ दाँव चलाना चाहते हैं तो जो लोग काफ़िर हैं वह ख़ुद अपने दांव में फँसे हैं
43أَمْ لَهُمْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ
या ख़ुदा के सिवा इनका कोई (दूसरा) माबूद है जिन चीज़ों को ये लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हैं वह उससे पाक और पाक़ीज़ा है
44وَإِن يَرَوْا كِسْفًا مِّنَ السَّمَاءِ سَاقِطًا يَقُولُوا سَحَابٌ مَّرْكُومٌ
और अगर ये लोग आसमान से कोई अज़ाब (अज़ाब का) टुकड़ा गिरते हुए देखें तो बोल उठेंगे ये तो दलदार बादल है
45فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي فِيهِ يُصْعَقُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम इनको इनकी हालत पर छोड़ दो यहाँ तक कि वह जिसमें ये बेहोश हो जाएँगे
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अनुवाद — अत-तूर 43

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Tuesday, August 18, 2026

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