अत-तूर · 42/49
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तूर
أَمْ يُرِيدُونَ كَيْدًا ۖ فَالَّذِينَ كَفَرُوا هُمُ الْمَكِيدُونَ ۝٤٢
Am yureedoona kaidan fallazeena kafaroo humul makeedoon
📖 हिंदी अर्थ
या ये लोग कुछ दाँव चलाना चाहते हैं तो जो लोग काफ़िर हैं वह ख़ुद अपने दांव में फँसे हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कैदन (كَيْدًا): चाल, धोखा, साज़िश या बुरी योजना।
  • मकीदून (الْمَكِيدُونَ): जिनके साथ चाल चली गई हो, जो स्वयं धोखे का शिकार हों।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों की उस बुरी नीयत को उजागर करती है जो रसूलुल्लाह ﷺ और मोमिनीन के खिलाफ़ लगातार साज़िशें रचते रहे। वे सोचते थे कि वे अपनी चालाकी से इस्लाम के प्रकाश को बुझा देंगे और नबी ﷺ को नुक़सान पहुँचाएँगे। लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उनकी यह चाल उल्टी उन्हीं पर पड़ेगी। जो लोग कुफ़्र पर अड़े हुए हैं, वास्तव में वही मक्कार और धोखेबाज़ हैं, और उनकी साज़िश का अंजाम उन्हीं की हार और बर्बादी होगा।

यह आयत मोमिनीन के लिए एक बड़ी तसल्ली और हिम्मत का पैग़ाम है। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ और उनके साथियों को यक़ीन दिला रहा है कि दुश्मनों की चालें कभी कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि अल्लाह की हिफ़ाज़त उनके ऊपर है। जो लोग अल्लाह के दीन के खिलाफ़ बुरी योजनाएँ बनाते हैं, वे अक्सर यह भूल जाते हैं कि अल्लाह सब कुछ देख रहा है और उसकी पकड़ बहुत सख्त है। उनका किया हुआ उन्हीं के पास लौटकर आता है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी दुश्मनों की साज़िशों से डरना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है और उनके दुश्मनों को उनकी चालों में ही फँसा देता है। यही अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता। जो लोग ईमान पर साबित क़दम रहते हैं, उनके लिए हर मुश्किल में राहत और कामयाबी है।



📜 आयत 40-44 — सूरा अत-तूर

40أَمْ تَسْأَلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ
या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत की) उजरत माँगते हो कि ये लोग कर्ज़ के बोझ से दबे जाते हैं
41أَمْ عِندَهُمُ الْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ
या इन लोगों के पास ग़ैब (का इल्म) है कि वह लिख लेते हैं
42أَمْ يُرِيدُونَ كَيْدًا ۖ فَالَّذِينَ كَفَرُوا هُمُ الْمَكِيدُونَ
या ये लोग कुछ दाँव चलाना चाहते हैं तो जो लोग काफ़िर हैं वह ख़ुद अपने दांव में फँसे हैं
43أَمْ لَهُمْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ
या ख़ुदा के सिवा इनका कोई (दूसरा) माबूद है जिन चीज़ों को ये लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हैं वह उससे पाक और पाक़ीज़ा है
44وَإِن يَرَوْا كِسْفًا مِّنَ السَّمَاءِ سَاقِطًا يَقُولُوا سَحَابٌ مَّرْكُومٌ
और अगर ये लोग आसमान से कोई अज़ाब (अज़ाब का) टुकड़ा गिरते हुए देखें तो बोल उठेंगे ये तो दलदार बादल है
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीअवतरण स्थान
42आयत

अनुवाद — अत-तूर 42

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Friday, October 2, 2026

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