अत-तूर · 44/49
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तूर
وَإِن يَرَوْا كِسْفًا مِّنَ السَّمَاءِ سَاقِطًا يَقُولُوا سَحَابٌ مَّرْكُومٌ ۝٤٤
Wa iny yaraw kisfam minas samaaa`i saaqitany yaqooloo sahaabum markoom
📖 हिंदी अर्थ
और अगर ये लोग आसमान से कोई अज़ाब (अज़ाब का) टुकड़ा गिरते हुए देखें तो बोल उठेंगे ये तो दलदार बादल है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • किस्फ़न (किस्फ़ा): टुकड़ा, हिस्सा।
  • मरकूम: एक के ऊपर एक जमा हुआ, तह बा तह।

तफ़सीर:

यह आयत उन जिद्दी और हठीले लोगों की हालत बयान करती है जिनके दिलों पर मुहर लग चुकी है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर ये मुशरिकीन आसमान से गिरता हुआ कोई टुकड़ा भी देख लें — जो उन पर अज़ाब के तौर पर नाज़िल हो रहा हो — तो भी ये अपनी सरकशी और इनकार से बाज़ नहीं आएंगे। बल्कि अपनी आदत के मुताबिक़ इसे भी एक आम चीज़ क़रार देंगे और कहेंगे: "यह तो बस बादल है जो एक दूसरे पर जमा हुआ है और हमें पानी देगा।"

यानी जब सच्चाई उनके सामने खुली आँखों से आ जाए, तब भी वे उसे नहीं पहचानेंगे और हर निशानी को अपनी ओर से टालने की कोशिश करेंगे। यह उन लोगों की मिसाल है जो हक़ को देखकर भी अंधे बने रहते हैं और हर मौजिज़े (चमत्कार) को महज़ एक इत्तफ़ाक़ या कुदरती बादल कहकर टाल देते हैं।

इस आयत में अल्लाह तआला ने उनके इस रवैये को बयान करके हमें सबक़ दिया है कि हिदायत का दारोमदार सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। अगर दिल में ग़ुरूर और हठ हो, तो कोई भी मोजिज़ा इंसान को ईमान नहीं ला सकता। इसलिए हमें चाहिए कि अपने दिलों को नम्र रखें, हर निशानी में अल्लाह की क़ुदरत देखें और सच्चाई को क़बूल करने में देर न करें। अल्लाह तआला की रहमत उन लोगों के लिए है जो दलील और निशानियों के सामने झुक जाते हैं, और उसकी पकड़ उन लोगों के लिए है जो हर हाल में सरकशी पर अड़े रहते हैं।

याद रखिए, जब अल्लाह का अज़ाब आ जाता है, तो कोई बहाना काम नहीं आता। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ़ पलटिए, उसकी निशानियों से सबक़ लीजिए और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की लाई हुई हिदायत को दिल से क़बूल कीजिए — क्योंकि यही कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 42-46 — सूरा अत-तूर

42أَمْ يُرِيدُونَ كَيْدًا ۖ فَالَّذِينَ كَفَرُوا هُمُ الْمَكِيدُونَ
या ये लोग कुछ दाँव चलाना चाहते हैं तो जो लोग काफ़िर हैं वह ख़ुद अपने दांव में फँसे हैं
43أَمْ لَهُمْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ
या ख़ुदा के सिवा इनका कोई (दूसरा) माबूद है जिन चीज़ों को ये लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हैं वह उससे पाक और पाक़ीज़ा है
44وَإِن يَرَوْا كِسْفًا مِّنَ السَّمَاءِ سَاقِطًا يَقُولُوا سَحَابٌ مَّرْكُومٌ
और अगर ये लोग आसमान से कोई अज़ाब (अज़ाब का) टुकड़ा गिरते हुए देखें तो बोल उठेंगे ये तो दलदार बादल है
45فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي فِيهِ يُصْعَقُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम इनको इनकी हालत पर छोड़ दो यहाँ तक कि वह जिसमें ये बेहोश हो जाएँगे
46يَوْمَ لَا يُغْنِي عَنْهُمْ كَيْدُهُمْ شَيْئًا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
इनके सामने आ जाए जिस दिन न इनकी मक्कारी ही कुछ काम आएगी और न इनकी मदद ही की जाएगी
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीअवतरण स्थान
44आयत

अनुवाद — अत-तूर 44

सूरा अत-तूर आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर ये लोग आसमान से कोई अज़ाब (अज़ाब का)…

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Thursday, October 1, 2026

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