अल-क़मर · 45/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ ۝٤٥
Sa yuhzamul jam`u wa yuwalloonad dubur
📖 हिंदी अर्थ
अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ फेर कर भाग जाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ – यह गिरोह (समूह) जल्द ही पराजित होगा।
  • وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ – और वे पीठ दिखाकर भाग जाएँगे (अर्थात् पराजित होकर मैदान छोड़ देंगे)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भविष्यवाणी को व्यक्त करती है जो अल्लाह तआला ने मक्का के काफ़िरों के उस गिरोह के बारे में की थी, जो इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ़ इकट्ठा हुआ था। अल्लाह तआला ने स्पष्ट रूप से बता दिया कि यह गिरोह, चाहे वह कितना भी बड़ा और ताकतवर क्यों न हो, अंततः पराजित होगा और मुसलमानों के सामने पीठ दिखाकर भाग जाएगा। यह कोई साधारण बात नहीं थी, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक ग़ैबी (अदृश्य) खबर थी, जो उस समय दी गई जब मुसलमानों की संख्या बहुत कम थी और उनके पास साधन भी सीमित थे।

यह भविष्यवाणी उस समय पूरी हुई जब बद्र के मैदान में मुसलमानों को वह अद्भुत विजय प्राप्त हुई। उस दिन अबू जहल जैसे काफ़िरों के सरदार, जो घमंड से कहते थे कि "हम एक विजयी गिरोह हैं", उन्हें अपनी आँखों से देखना पड़ा कि कैसे अल्लाह की मदद से वह ताकतवर गिरोह बुरी तरह पराजित हुआ और उनके नेता मारे गए। यह अल्लाह की क़ुदरत का प्रत्यक्ष प्रमाण था कि जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के विरुद्ध होते हैं, वे चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः उनका अंजाम बुरा ही होता है।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हर उस मुसलमान के लिए एक बड़ी खुशखबरी और हौसले की बात है जो किसी भी मुश्किल या मुसीबत में हो। अल्लाह तआला अपने बंदों को यह यकीन दिलाता है कि सच्चाई और ईमान की ताकत हमेशा आख़िरकार बाज़ी जीतती है। चाहे बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न दिखे, अल्लाह की मदद उसके नेक बंदों के साथ होती है। यह हमें सिखाती है कि हमें कभी भी मुश्किलों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी मदद का इंतज़ार करना चाहिए। जिस तरह अल्लाह ने उस कमज़ोर और कम संख्या वाले मुस्लिम गिरोह को उस बड़े और ताकतवर काफ़िर गिरोह पर फ़तह दी, उसी तरह वह आज भी अपने सच्चे बंदों की मदद करता है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि घमंड और ताकत का ग़रूर कभी काम नहीं आता, और अल्लाह की तरफ़ से आने वाली मदद ही असली फ़तह है।



📜 आयत 43-47 — सूरा अल-क़मर

43أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِّنْ أُولَٰئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَاءَةٌ فِي الزُّبُرِ
(ऐ अहले मक्का) क्या उन लोगों से भी तुम्हारे कुफ्फार बढ़ कर हैं या तुम्हारे वास्ते (पहली) किताबों में माफी (लिखी हुई) है
44أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌ مُّنتَصِرٌ
क्या ये लोग कहते हैं कि हम बहुत क़वी जमाअत हैं
45سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ
अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ फेर कर भाग जाएँगे
46بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ
बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है और क़यामत बड़ी सख्त और बड़ी तल्ख़ (चीज़) है
47إِنَّ الْمُجْرِمِينَ فِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ
बेशक गुनाहगार लोग गुमराही और दीवानगी में (मुब्तिला) हैं
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
45आयत

अनुवाद — अल-क़मर 45

सूरा अल-क़मर आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ…

सूरा आयत 45/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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