अल-क़मर · 46/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ ۝٤٦
Balis Saa`atu maw`iduhum was Saa`atu adhaa wa amarr
📖 हिंदी अर्थ
बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है और क़यामत बड़ी सख्त और बड़ी तल्ख़ (चीज़) है

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अनुवाद — Tafsir

بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ

शब्दों के अर्थ:

  • السَّاعَةُ: क़ियामत, वह घड़ी जिसमें सभी प्राणियों को पुनर्जीवित किया जाएगा।
  • مَوْعِدُهُمْ: उनका वादा किया गया समय, यानी उनके लिए नियत स्थान और समय।
  • أَدْهَىٰ: अत्यधिक भयानक, सबसे बड़ी विपत्ति और आपदा।
  • أَمَرُّ: अत्यधिक कड़वा और कष्टदायक, सबसे दर्दनाक।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन काफ़िरों की निंदा कर रहे हैं जो आख़िरत को झुठलाते हैं और केवल दुनिया की चीज़ों को ही महत्व देते हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि जो अज़ाब उन्होंने दुनिया में देखा (जैसे बद्र के दिन मुसलमानों के हाथों हार और क़त्ल), वह तो केवल एक छोटा सा नमूना है। असली वादा तो क़ियामत का है, जो उनके लिए नियत किया गया है। क़ियामत का अज़ाब उस दुनिया के अज़ाब से कहीं अधिक भयानक, कड़वा और दर्दनाक होगा। बद्र की लड़ाई में जो तकलीफ़ उन्होंने झेली, वह आख़िरत के अज़ाब के मुक़ाबले में कुछ भी नहीं। क़ियामत का दिन इतना सख्त होगा कि उसकी हिचकियाँ और उसकी मुसीबतें किसी भी दुनियावी मुसीबत से हज़ार गुना बढ़कर हैं।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की ज़िंदगी एक परीक्षा है और असली इनाम या सज़ा आख़िरत में मिलेगी। जो लोग आज अल्लाह के रसूल (ﷺ) और उनकी शिक्षाओं का मज़ाक उड़ाते हैं या उन्हें झुठलाते हैं, उन्हें उस दिन का इंतज़ार करना चाहिए जब हर आँख खुल जाएगी और हर राज़ खुल जाएगा। लेकिन अल्लाह रहम करने वाला है — उसने दुनिया में मौका दिया है, तौबा का दरवाज़ा खुला है। जो कोई भी आज अपने किए पर पछताए और अल्लाह की ओर लौट आए, उसके लिए जन्नत की खुशखबरी है। क़ियामत का डर हमें नेक कामों की तरफ ले जाना चाहिए, न कि ग़फलत में डुबोना चाहिए। यह आयत मोमिनों के लिए सबसे बड़ी तसल्ली है कि ज़ालिमों को उनकी सज़ा मिलकर रहेगी, और नेक लोगों को उनका अज्र। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें क़ियामत के डर को दिल में रखते हुए नेक अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 44-48 — सूरा अल-क़मर

44أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌ مُّنتَصِرٌ
क्या ये लोग कहते हैं कि हम बहुत क़वी जमाअत हैं
45سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ
अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ फेर कर भाग जाएँगे
46بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ
बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है और क़यामत बड़ी सख्त और बड़ी तल्ख़ (चीज़) है
47إِنَّ الْمُجْرِمِينَ فِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ
बेशक गुनाहगार लोग गुमराही और दीवानगी में (मुब्तिला) हैं
48يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِي النَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا مَسَّ سَقَرَ
उस रोज़ ये लोग अपने अपने मुँह के बल (जहन्नुम की) आग में घसीटे जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा) अब जहन्नुम की आग का मज़ा चखो
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
46आयत

अनुवाद — अल-क़मर 46

सूरा अल-क़मर आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है…

सूरा आयत 46/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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