Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ
शब्दों के अर्थ:
- السَّاعَةُ: क़ियामत, वह घड़ी जिसमें सभी प्राणियों को पुनर्जीवित किया जाएगा।
- مَوْعِدُهُمْ: उनका वादा किया गया समय, यानी उनके लिए नियत स्थान और समय।
- أَدْهَىٰ: अत्यधिक भयानक, सबसे बड़ी विपत्ति और आपदा।
- أَمَرُّ: अत्यधिक कड़वा और कष्टदायक, सबसे दर्दनाक।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन काफ़िरों की निंदा कर रहे हैं जो आख़िरत को झुठलाते हैं और केवल दुनिया की चीज़ों को ही महत्व देते हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि जो अज़ाब उन्होंने दुनिया में देखा (जैसे बद्र के दिन मुसलमानों के हाथों हार और क़त्ल), वह तो केवल एक छोटा सा नमूना है। असली वादा तो क़ियामत का है, जो उनके लिए नियत किया गया है। क़ियामत का अज़ाब उस दुनिया के अज़ाब से कहीं अधिक भयानक, कड़वा और दर्दनाक होगा। बद्र की लड़ाई में जो तकलीफ़ उन्होंने झेली, वह आख़िरत के अज़ाब के मुक़ाबले में कुछ भी नहीं। क़ियामत का दिन इतना सख्त होगा कि उसकी हिचकियाँ और उसकी मुसीबतें किसी भी दुनियावी मुसीबत से हज़ार गुना बढ़कर हैं।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की ज़िंदगी एक परीक्षा है और असली इनाम या सज़ा आख़िरत में मिलेगी। जो लोग आज अल्लाह के रसूल (ﷺ) और उनकी शिक्षाओं का मज़ाक उड़ाते हैं या उन्हें झुठलाते हैं, उन्हें उस दिन का इंतज़ार करना चाहिए जब हर आँख खुल जाएगी और हर राज़ खुल जाएगा। लेकिन अल्लाह रहम करने वाला है — उसने दुनिया में मौका दिया है, तौबा का दरवाज़ा खुला है। जो कोई भी आज अपने किए पर पछताए और अल्लाह की ओर लौट आए, उसके लिए जन्नत की खुशखबरी है। क़ियामत का डर हमें नेक कामों की तरफ ले जाना चाहिए, न कि ग़फलत में डुबोना चाहिए। यह आयत मोमिनों के लिए सबसे बड़ी तसल्ली है कि ज़ालिमों को उनकी सज़ा मिलकर रहेगी, और नेक लोगों को उनका अज्र। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें क़ियामत के डर को दिल में रखते हुए नेक अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 44-48 — सूरा अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 46
सूरा अल-क़मर आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है…सूरा आयत 46/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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