अर-रहमान · 35/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌ مِّن نَّارٍ وَنُحَاسٌ فَلَا تَنتَصِرَانِ ۝٣٥
Yursalu `alaikumaa shuwaazum min naarifiw-wa nuhaasun falaa tantasiraan
📖 हिंदी अर्थ
(गुनाहगार जिनों और आदमियों जहन्नुम में) तुम दोनो पर आग का सब्ज़ शोला और सियाह धुऑं छोड़ दिया जाएगा तो तुम दोनों (किस तरह) रोक नहीं सकोगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • शुवाज़ (شُوَاظ): आग की लौ जो बिना धुएँ के हो।
  • नुहास (نُحَاس): पिघला हुआ ताँबा या धुआँ जो आग की लौ के साथ हो।
  • फ़ला तंतसिरान (فَلَا تَنتَصِرَان): तो तुम दोनों (जिन्न और इंसान) अपनी रक्षा नहीं कर सकोगे, न ही किसी से मदद पा सकोगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ जिन्न और इंसान की जमात! जिस दिन अल्लाह का फ़ैसला आएगा, उस दिन तुम पर आग की ऐसी लौ छोड़ी जाएगी जिसमें धुआँ नहीं होगा, और साथ ही पिघला हुआ ताँबा (या धुआँ) भी भेजा जाएगा जो तुम्हारे सिरों पर उँडेला जाएगा। उस वक़्त तुममें से कोई भी—चाहे वह इंसान हो या जिन्न—अपनी रक्षा के लिए भागने की ताक़त नहीं रखेगा, न ही कोई तुम्हारी मदद कर सकेगा। तुम्हारी सारी ताक़तें, तुम्हारे हथियार, तुम्हारी तकनीक—सब कुछ बेकार हो जाएगा। अल्लाह के अज़ाब के सामने तुम बिल्कुल बेबस और लाचार हो जाओगे।

यह आयत उस दिन की दहशत को बयान करती है जब हर शख्स सिर्फ़ अपनी फ़िक्र में होगा। लेकिन साथ ही यह रहमत का पैग़ाम भी है—क्योंकि अल्लाह ने अपने रसूलों और किताबों के ज़रिए हमें आगाह कर दिया है कि इस अज़ाब से बचने का रास्ता क्या है। वह रास्ता है तौबा, ईमान और नेक अमल। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं, उन्हें उस दिन अम्न (सुरक्षा) मिलेगी। यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी किस तरह गुज़ार रहे हैं—क्या हम उस दिन की तैयारी कर रहे हैं, या सिर्फ़ दुनिया के झूठे सुखों में मग्न हैं?

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "तो ऐ जिन्न और इंसान! तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?" यह सवाल हमें याद दिलाता है कि अल्लाह की नेमतें अनगिनत हैं—साँस लेना, खाना, पीना, सेहत, ईमान—ये सब उसी की देन हैं। अगर हम इन नेमतों का शुक्र अदा करें और उसकी नाफ़रमानी से बचें, तो उसकी रहमत हमारे लिए काफ़ी है। यह आयत हमें डराने के साथ-साथ उम्मीद भी देती है कि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा वसीअ है। बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ पलटने की।

🎧 सुनें

📜 आयत 33-37 — अर-रहमान

33يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ إِنِ اسْتَطَعْتُمْ أَن تَنفُذُوا مِنْ أَقْطَارِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ فَانفُذُوا ۚ لَا تَنفُذُونَ إِلَّا بِسُلْطَانٍ
ऐ गिरोह जिन व इन्स अगर तुममें क़ुदरत है कि आसमानों और ज़मीन के किनारों से (होकर कहीं) निकल (कर मौत या अज़ाब से भाग) सको तो निकल जाओ (मगर) तुम तो बग़ैर क़ूवत और ग़लबे के निकल ही नहीं सकते (हालॉ कि तुममें न क़ूवत है और न ही ग़लबा)
34فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को झुठलाओगे
35يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌ مِّن نَّارٍ وَنُحَاسٌ فَلَا تَنتَصِرَانِ
(गुनाहगार जिनों और आदमियों जहन्नुम में) तुम दोनो पर आग का सब्ज़ शोला और सियाह धुऑं छोड़ दिया जाएगा तो तुम दोनों (किस तरह) रोक नहीं सकोगे
36فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे
37فَإِذَا انشَقَّتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ وَرْدَةً كَالدِّهَانِ
फिर जब आसमान फट कर (क़यामत में) तेल की तरह लाल हो जाऐगा
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अनुवाद — अर-रहमान 35

सूरा अर-रहमान आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (गुनाहगार जिनों और आदमियों जहन्नुम में) तुम दोनो पर आग…

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Tuesday, August 18, 2026

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