अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- शुवाज़ (شُوَاظ): आग की लौ जो बिना धुएँ के हो।
- नुहास (نُحَاس): पिघला हुआ ताँबा या धुआँ जो आग की लौ के साथ हो।
- फ़ला तंतसिरान (فَلَا تَنتَصِرَان): तो तुम दोनों (जिन्न और इंसान) अपनी रक्षा नहीं कर सकोगे, न ही किसी से मदद पा सकोगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ जिन्न और इंसान की जमात! जिस दिन अल्लाह का फ़ैसला आएगा, उस दिन तुम पर आग की ऐसी लौ छोड़ी जाएगी जिसमें धुआँ नहीं होगा, और साथ ही पिघला हुआ ताँबा (या धुआँ) भी भेजा जाएगा जो तुम्हारे सिरों पर उँडेला जाएगा। उस वक़्त तुममें से कोई भी—चाहे वह इंसान हो या जिन्न—अपनी रक्षा के लिए भागने की ताक़त नहीं रखेगा, न ही कोई तुम्हारी मदद कर सकेगा। तुम्हारी सारी ताक़तें, तुम्हारे हथियार, तुम्हारी तकनीक—सब कुछ बेकार हो जाएगा। अल्लाह के अज़ाब के सामने तुम बिल्कुल बेबस और लाचार हो जाओगे।
यह आयत उस दिन की दहशत को बयान करती है जब हर शख्स सिर्फ़ अपनी फ़िक्र में होगा। लेकिन साथ ही यह रहमत का पैग़ाम भी है—क्योंकि अल्लाह ने अपने रसूलों और किताबों के ज़रिए हमें आगाह कर दिया है कि इस अज़ाब से बचने का रास्ता क्या है। वह रास्ता है तौबा, ईमान और नेक अमल। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं, उन्हें उस दिन अम्न (सुरक्षा) मिलेगी। यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी किस तरह गुज़ार रहे हैं—क्या हम उस दिन की तैयारी कर रहे हैं, या सिर्फ़ दुनिया के झूठे सुखों में मग्न हैं?
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "तो ऐ जिन्न और इंसान! तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?" यह सवाल हमें याद दिलाता है कि अल्लाह की नेमतें अनगिनत हैं—साँस लेना, खाना, पीना, सेहत, ईमान—ये सब उसी की देन हैं। अगर हम इन नेमतों का शुक्र अदा करें और उसकी नाफ़रमानी से बचें, तो उसकी रहमत हमारे लिए काफ़ी है। यह आयत हमें डराने के साथ-साथ उम्मीद भी देती है कि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा वसीअ है। बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ पलटने की।
📜 आयत 33-37 — अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 35
सूरा अर-रहमान आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (गुनाहगार जिनों और आदमियों जहन्नुम में) तुम दोनो पर आग…सूरा आयत 35/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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