अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ذُكِرَ اسْمُ اللَّهِ عَلَيْهِ: जिस (जानवर) पर अल्लाह का नाम लिया गया हो, अर्थात ज़िबह (वध) के समय बिस्मिल्लाह कहा गया हो।
- آيَاتِهِ: अल्लाह की निशानियाँ, प्रमाण और आदेश।
- مُؤْمِنِينَ: ईमान लाने वाले, सच्चे विश्वासी।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों को निर्देश देता है कि वे उन जानवरों का गोश्त खाएँ जिन्हें ज़िबह करते समय अल्लाह का नाम लिया गया हो। यह आदेश उन लोगों के लिए है जो अल्लाह की आयतों (निशानियों) पर सच्चा ईमान रखते हैं — यानी जो यह मानते हैं कि अल्लाह ने ही हलाल और हराम का नियम बनाया है, और उसके आदेशों को बिना किसी संदेह के स्वीकार करते हैं।
इस आयत का पृष्ठभूमि यह है कि अरब के कुछ लोग अपनी मनमानी से कुछ जानवरों को हराम ठहरा लेते थे और कुछ को हलाल, जबकि अल्लाह ने जो हलाल किया है उसे वे हराम कर देते थे और जो हराम है (जैसे मुरदार) उसे हलाल मान लेते थे। अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि ईमान का तक़ाज़ा यह है कि केवल उसी चीज़ को खाया जाए जिस पर अल्लाह का नाम लिया गया हो, क्योंकि यही अल्लाह की आज्ञाकारिता और उसकी निशानियों पर ईमान का प्रमाण है।
यह आदेश उन लोगों के लिए एक परीक्षा भी है कि वे अपनी मनमानी को छोड़कर अल्लाह के फैसले के आगे सिर झुकाएँ। जो व्यक्ति अल्लाह की आयतों पर ईमान रखता है, वह उसके हुक्म को बिना किसी आपत्ति के मानता है और जानता है कि अल्लाह ने जो हलाल किया है वही पाक और लाभदायक है, और जो हराम किया है वही नापाक और हानिकारक है।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हर कार्य में अल्लाह का नाम लेना चाहिए, विशेषकर जानवरों को ज़िबह करते समय, क्योंकि यह अल्लाह के प्रति आभार और उसकी नेमतों की क़द्र का ज़रिया है।
- ईमान का असली मतलब यह है कि इंसान अपनी इच्छाओं और रीति-रिवाजों को नहीं, बल्कि अल्लाह के आदेशों को प्राथमिकता दे। जो व्यक्ति अल्लाह की आयतों पर सच्चा ईमान रखता है, वह हलाल-हराम के मामले में अल्लाह के फैसले को ही अंतिम मानता है।
- इस्लाम में खाने-पीने की स्वतंत्रता का सिद्धांत स्पष्ट है — जो चीज़ अल्लाह ने हलाल की है वह पाक है, और जो हराम की है वह नापाक है। यही नियम मानव जीवन के लिए सबसे उत्तम और संतुलित है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की निशानियों पर ईमान का अर्थ केवल ज़बान से दावा करना नहीं, बल्कि उसके आदेशों पर अमल करना भी है। जो व्यक्ति अल्लाह के हुक्मों पर अमल करता है, वही सच्चा मोमिन है।
- इस आयत में उन लोगों के लिए चेतावनी है जो अपनी मनमानी से हलाल-हराम के नियम बनाते हैं — यह अल्लाह पर ईमान के खिलाफ है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के फैसलों को ही मानना चाहिए।
📜 आयत 116-120 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 118
सूरा अल-अनआम आयत 118 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो अगर तुम उसकी आयतों पर ईमान रखते हो तो…सूरा आयत 118/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 116–120. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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