अल-अनआम · 117/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ مَن يَضِلُّ عَن سَبِيلِهِ ۖ وَهُوَ أَعْلَمُ بِالْمُهْتَدِينَ ۝١١٧
Inna rabbaka Huwa a`lamu mai yadillu `an sabeelihee wa Huwa a`lamu bilmuhtadeen
📖 हिंदी अर्थ
(तो तुम क्या जानों) जो लोग उसकी राह से बहके हुए हैं उनको (कुछ) ख़ुदा ही ख़ूब जानता है और वह तो हिदायत याफ्ता लोगों से भी ख़ूब वाक़िफ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَعْلَمُ: सबसे अधिक जानने वाला।
  • يَضِلُّ: भटकता है, पथभ्रष्ट होता है।
  • سَبِيلِهِ: उसके (अल्लाह के) मार्ग से।
  • بِالْمُهْتَدِينَ: हिदायत पाने वालों (सीधे मार्ग पर चलने वालों) से।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपका रब ही सबसे अधिक जानने वाला है कि कौन उसके सीधे मार्ग से भटककर गुमराही में पड़ गया है, और कौन उसके मार्ग पर चलकर हिदायत पा गया है। यह ज्ञान केवल अल्लाह को है, किसी इंसान को नहीं। वह हर उस व्यक्ति को भली-भाँति जानता है जो उसकी आज्ञा का उल्लंघन करके कुफ्र, शिर्क या पाप के रास्ते पर चलता है, और वह उन लोगों को भी पूरी तरह जानता है जिन्होंने उसके दीन (इस्लाम) को अपनाया और उसके आदेशों का पालन करते हुए सीधे रास्ते पर स्थिर रहे। अल्लाह के ज्ञान से उनमें से कोई भी छिपा नहीं है, न भटकने वाला और न ही हिदायत पाने वाला। यह ज्ञान उसी के पास है, और वही दोनों समूहों को उनके कर्मों के अनुसार प्रतिफल देगा — भटकने वालों को उनकी गुमराही की सज़ा और हिदायत पाने वालों को उनके ईमान और अच्छे कर्मों का बदला।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि लोगों के दिलों का हाल और उनकी नीयतें केवल अल्लाह ही जानता है। इसलिए हमें किसी के बारे में अंतिम फैसला नहीं करना चाहिए कि वह जन्नती है या जहन्नमी — यह मामला अल्लाह के सुपुर्द है।
  2. हमें अपने आपको दूसरों से बेहतर समझने का घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि हम नहीं जानते कि हमारा अंत कैसा होगा। अल्लाह ही जानता है कि सच्चा मुहतदी (हिदायत पाने वाला) कौन है।
  3. यह आयत हमें अल्लाह के ज्ञान की असीमता का एहसास कराती है — वह हर छोटी-बड़ी बात, हर छिपी और खुली चीज़ से वाकिफ है। यह विश्वास हमारे दिल में अल्लाह का खौफ और उसकी निगरानी का एहसास पैदा करता है, जो हमें गुनाहों से बचाता है।
  4. इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने कर्मों की परवाह करनी चाहिए, न कि दूसरों के बारे में बेवजह की चिंता या आलोचना में पड़ना चाहिए। हर इंसान अपनी मेहनत और अमल के अनुसार अल्लाह के यहाँ फल पाएगा।
  5. यह आयत हमें इस्लाम की सुंदर शिक्षा देती है कि अल्लाह का दीन (इस्लाम) ही सीधा मार्ग है, और इस मार्ग पर चलने वालों को अल्लाह की ओर से पूरा इनाम मिलेगा। यह हमें इस्लाम पर स्थिर रहने और उसकी शिक्षाओं का पालन करने की प्रेरणा देती है।


📜 आयत 115-119 — सूरा अल-अनआम

115وَتَمَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ صِدْقًا وَعَدْلًا ۚ لَّا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِهِ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
तो तुम (कहीं) शक़ करने वालों से न हो जाना और सच्चाई और इन्साफ में तो तुम्हारे परवरदिगार की बात पूरी हो गई कोई उसकी बातों का बदलने वाला नहीं और वही बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
116وَإِن تُطِعْ أَكْثَرَ مَن فِي الْأَرْضِ يُضِلُّوكَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ
और (ऐ रसूल) दुनिया में तो बहुतेरे लोग ऐसे हैं कि तुम उनके कहने पर चलो तो तुमको ख़ुदा की राह से बहका दें ये लोग तो सिर्फ अपने ख्यालात की पैरवी करते हैं और ये लोग तो बस अटकल पच्चू बातें किया करते हैं
117إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ مَن يَضِلُّ عَن سَبِيلِهِ ۖ وَهُوَ أَعْلَمُ بِالْمُهْتَدِينَ
(तो तुम क्या जानों) जो लोग उसकी राह से बहके हुए हैं उनको (कुछ) ख़ुदा ही ख़ूब जानता है और वह तो हिदायत याफ्ता लोगों से भी ख़ूब वाक़िफ है
118فَكُلُوا مِمَّا ذُكِرَ اسْمُ اللَّهِ عَلَيْهِ إِن كُنتُم بِآيَاتِهِ مُؤْمِنِينَ
तो अगर तुम उसकी आयतों पर ईमान रखते हो तो जिस ज़ीबह पर (वक्ते ़ज़िबाह) ख़ुदा का नाम लिया गया हो उसी को खाओ
119وَمَا لَكُمْ أَلَّا تَأْكُلُوا مِمَّا ذُكِرَ اسْمُ اللَّهِ عَلَيْهِ وَقَدْ فَصَّلَ لَكُم مَّا حَرَّمَ عَلَيْكُمْ إِلَّا مَا اضْطُرِرْتُمْ إِلَيْهِ ۗ وَإِنَّ كَثِيرًا لَّيُضِلُّونَ بِأَهْوَائِهِم بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِالْمُعْتَدِينَ
और तुम्हें क्या हो गया है कि जिस पर ख़ुदा का नाम लिया गया हो उसमें नहीं खाते हो हालॉकि जो चीज़ें उसने तुम पर हराम कर दीं हैं वह तुमसे तफसीलन बयान कर दीं हैं मगर (हाँ) जब तुम मजबूर हो तो अलबत्ता (हराम भी खा सकते हो) और बहुतेरे तो (ख्वाहमख्वाह) अपनी नफसानी ख्वाहिशों से बे समझे बूझे (लोगों को) बहका देते हैं और तुम्हारा परवरदिगार तो हक़ से तजाविज़ करने वालों से ख़ूब वाक़िफ है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
117आयत

अनुवाद — अल-अनआम 117

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Saturday, October 3, 2026

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