Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَلَقَكُم مِّن طِينٍ: तुम्हें मिट्टी से पैदा किया।
- قَضَىٰ أَجَلًا: एक निश्चित अवधि निर्धारित की (मृत्यु तक की अवधि)।
- أَجَلٌ مُسَمًّى: एक और निश्चित समय जो केवल अल्लाह के पास है (क़ियामत का दिन)।
- تَمْتَرُونَ: संदेह करते हो, शक करते हो।
विस्तृत व्याख्या:
यह आयत अल्लाह तआला की उस महान शक्ति और रचना-कौशल की ओर संकेत करती है जिसने मनुष्य को अस्तित्व प्रदान किया। अल्लाह ही वह है जिसने तुम्हें मिट्टी से बनाया—अर्थात तुम्हारे पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को मिट्टी से रचा, और तुम सभी उन्हीं की संतान हो। चूँकि संतान अपने मूल से जुड़ी होती है, इसलिए अल्लाह ने सभी मनुष्यों को सम्बोधित करते हुए कहा कि तुम्हें मिट्टी से पैदा किया गया है।
इसके बाद अल्लाह ने एक अवधि निर्धारित की—वह समय जो हर व्यक्ति के लिए इस दुनिया में जीवन का है, जो उसकी मृत्यु पर समाप्त हो जाता है। फिर एक और समय है जो केवल अल्लाह के पास निर्धारित है—वह क़ियामत का दिन, जब सभी प्राणियों को दोबारा जीवित करके उनके कर्मों का हिसाब लिया जाएगा। यह दूसरा समय मृत्यु के बाद से लेकर पुनरुत्थान तक का है, जिसे बरज़ख़ कहा जाता है।
इतने स्पष्ट प्रमाणों के बावजूद—कि अल्लाह ने तुम्हें मिट्टी से बनाया, फिर तुम्हें जीवन दिया, फिर मृत्यु का समय निर्धारित किया—तुम लोग उसकी शक्ति पर संदेह करते हो और मृत्यु के बाद दोबारा जीवित होने को असंभव समझते हो। यह संदेह अज्ञानता और अहंकार का परिणाम है, क्योंकि जिसने पहली बार पैदा किया, वह दूसरी बार पैदा करने पर भी पूर्ण रूप से सक्षम है।
आयत से मिलने वाली शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह की रचना-शक्ति पर चिंतन: यह आयत हमें सिखाती है कि मनुष्य की उत्पत्ति साधारण मिट्टी से हुई है, फिर भी अल्लाह ने उसे सर्वश्रेष्ठ रूप और बुद्धि प्रदान की। यह उसकी असीम शक्ति का प्रमाण है।
- जीवन की अस्थायिता: हर व्यक्ति के लिए एक निश्चित अवधि है जो मृत्यु पर समाप्त होती है। यह हमें याद दिलाता है कि दुनिया का जीवन क्षणभंगुर है और हमें अपने अंतिम गंतव्य की तैयारी करनी चाहिए।
- पुनरुत्थान में विश्वास: यह आयत क़ियामत के दिन पर ईमान लाने की शिक्षा देती है। जो अल्लाह मिट्टी से मनुष्य बना सकता है, वह निश्चित रूप से मृत्यु के बाद उसे दोबारा जीवित कर सकता है।
- संदेह से बचाव: यह आयत हमें शिक्षा देती है कि अल्लाह की आयतों और उसके वादों पर संदेह न करें, क्योंकि संदेह व्यक्ति को सत्य से दूर कर देता है और उसे पथभ्रष्ट कर देता है।
- विनम्रता का पाठ: जब हमें पता चलता है कि हमारी उत्पत्ति मिट्टी से हुई है, तो हमें अहंकार नहीं करना चाहिए। यह हमें विनम्र बनाता है और अल्लाह के प्रति कृतज्ञता का भाव पैदा करता है।
- अल्लाह की ओर लौटने की तैयारी: यह आयत मनुष्य को सचेत करती है कि उसका अंतिम पड़ाव अल्लाह के पास है, इसलिए उसे अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालना चाहिए।
📜 आयत 1-4 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 2
सूरा अल-अनआम आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह तो वही ख़ुदा है जिसने तुमको मिट्टी से पैदा…सूरा आयत 2/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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