अल-अनआम · 86/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَإِسْمَاعِيلَ وَالْيَسَعَ وَيُونُسَ وَلُوطًا ۚ وَكُلًّا فَضَّلْنَا عَلَى الْعَالَمِينَ ۝٨٦
Wa Ismaa`eela wal Yasa`a wa Yoonusa wa Lootaa; wa kullan faddalnaa `alal `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
और इसमाइल व इलियास व युनूस व लूत (की भी हिदायत की) और सब को सारे जहाँन पर फज़ीलत अता की

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • इस्माईल (إِسْمَاعِيلَ): हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के बड़े बेटे, जिनकी कुर्बानी की सुन्नत क़ुर्बानी के रूप में मुसलमानों में प्रचलित है।
  • अल-यसा (الْيَسَعَ): हज़रत इलियास अलैहिस्सलाम के उत्तराधिकारी और बनी इस्राईल के नबी।
  • यूनुस (يُونُسَ): हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम, जिन्हें "ज़ुन्नून" (मछली वाले) भी कहा जाता है।
  • लूत (لُوطًا): हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के भतीजे और सदूम (Sodom) की क़ौम की ओर भेजे गए नबी।
  • फ़ज़्ज़लना (فَضَّلْنَا): हमने विशेष सम्मान और श्रेष्ठता प्रदान की।
  • आलमीन (الْعَالَمِينَ): अपने-अपने समय के सभी लोगों और जगतों पर।

विस्तृत तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने चुनिंदा नबियों का ज़िक्र किया है, जिन्हें उन्होंने हिदायत का ख़ज़ाना सौंपा और उन्हें अपने समय के सभी लोगों पर श्रेष्ठता प्रदान की।

हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम वह महान नबी हैं जिन्होंने अपने पिता हज़रत इब्राहीम के साथ मिलकर खाना-ए-काबा की नींव रखी। उनकी कुर्बानी की याद हर साल ईद-उल-अज़हा पर मुसलमानों को सब्र और अल्लाह की रज़ा पर राज़ी रहने का पाठ सिखाती है।

हज़रत अल-यसा अलैहिस्सलाम बनी इस्राईल के नबी थे, जिन्होंने हज़रत इलियास के बाद उम्मत को तौहीद की राह पर चलाया। उनकी दावत का नतीजा यह था कि उनकी क़ौम के कई लोगों ने शिर्क छोड़कर अल्लाह की इबादत अपनाई।

हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम की कहानी हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उसके ग़ुस्से पर हावी होती है। जब उन्होंने अपनी क़ौम से नाराज़ होकर शहर छोड़ा, तो मछली के पेट में उनकी दुआ "ला इलाहा इल्ला अंत सुब्हानका इन्नी कुंतु मिनज़्ज़ालिमीन" ने उन्हें निजात दिलाई। यह दुआ मुसीबत के वक़्त हर मुसलमान के लिए बचाव का ज़रिया है।

हज़रत लूत अलैहिस्सलाम उस क़ौम की ओर भेजे गए जो अप्राकृतिक कर्मों में लिप्त थी। उन्होंने बड़ी हिम्मत से उन्हें अल्लाह की इबादत की दावत दी और उनके अंजाम ने हमें बताया कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम कितना भयानक होता है।

अल्लाह तआला का फ़रमान है कि हमने इन सभी को "आलमीन" पर फ़ज़ीलत दी। इसका मतलब यह है कि इन नबियों को अपने-अपने दौर की सारी उम्मतों पर श्रेष्ठता दी गई। यह श्रेष्ठता उनकी अपनी क़ाबिलियत से नहीं थी, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से विशेष रहमत और चुनाव था।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों, अल्लाह की मदद उनके साथ होती है। यही वजह है कि इन नबियों की सीरत हमारे लिए रोशनी का ज़रिया है।

आज हमें भी इन नबियों की तरह सब्र, इस्तिक़ामत और अल्लाह पर भरोसा रखने की ज़रूरत है। जब हम अपनी ज़िंदगी में इनके नक़्शे-क़दम पर चलेंगे, तो अल्लाह की रहमत और मदद हमारे साथ होगी। याद रखें, अल्लाह की मुहब्बत और उसके नबियों की पैरवी ही हमारी कामयाबी की कुंजी है।



📜 आयत 84-88 — अल-अनआम

84وَوَهَبْنَا لَهُ إِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ ۚ كُلًّا هَدَيْنَا ۚ وَنُوحًا هَدَيْنَا مِن قَبْلُ ۖ وَمِن ذُرِّيَّتِهِ دَاوُودَ وَسُلَيْمَانَ وَأَيُّوبَ وَيُوسُفَ وَمُوسَىٰ وَهَارُونَ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
और हमने इबराहीम को इसहाक़ वा याक़ूब (सा बेटा पोता) अता किया हमने सबकी हिदायत की और उनसे पहले नूह को (भी) हम ही ने हिदायत की और उन्हीं (इबराहीम) को औलाद से दाऊद व सुलेमान व अय्यूब व यूसुफ व मूसा व हारुन (सब की हमने हिदायत की) और नेकों कारों को हम ऐसा ही इल्म अता फरमाते हैं
85وَزَكَرِيَّا وَيَحْيَىٰ وَعِيسَىٰ وَإِلْيَاسَ ۖ كُلٌّ مِّنَ الصَّالِحِينَ
और ज़करिया व यहया व ईसा व इलियास (सब की हिदायत की (और ये) सब (ख़ुदा के) नेक बन्दों से हैं
86وَإِسْمَاعِيلَ وَالْيَسَعَ وَيُونُسَ وَلُوطًا ۚ وَكُلًّا فَضَّلْنَا عَلَى الْعَالَمِينَ
और इसमाइल व इलियास व युनूस व लूत (की भी हिदायत की) और सब को सारे जहाँन पर फज़ीलत अता की
87وَمِنْ آبَائِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ وَإِخْوَانِهِمْ ۖ وَاجْتَبَيْنَاهُمْ وَهَدَيْنَاهُمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और (सिर्फ उन्हीं को नहीं बल्कि) उनके बाप दादाओं और उनकी औलाद और उनके भाई बन्दों में से (बहुतेरों को) और उनके मुन्तख़िब किया और उन्हें सीधी राह की हिदायत की
88ذَٰلِكَ هُدَى اللَّهِ يَهْدِي بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ ۚ وَلَوْ أَشْرَكُوا لَحَبِطَ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
(देखो) ये ख़ुदा की हिदायत है अपने बन्दों से जिसको चाहे उसीकी वजह से राह पर लाए और अगर उन लोगों ने शिर्क किया होता तो उनका किया (धरा) सब अकारत हो जाता
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अनुवाद — अल-अनआम 86

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Tuesday, August 18, 2026

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