Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- इस्माईल (إِسْمَاعِيلَ): हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के बड़े बेटे, जिनकी कुर्बानी की सुन्नत क़ुर्बानी के रूप में मुसलमानों में प्रचलित है।
- अल-यसा (الْيَسَعَ): हज़रत इलियास अलैहिस्सलाम के उत्तराधिकारी और बनी इस्राईल के नबी।
- यूनुस (يُونُسَ): हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम, जिन्हें "ज़ुन्नून" (मछली वाले) भी कहा जाता है।
- लूत (لُوطًا): हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के भतीजे और सदूम (Sodom) की क़ौम की ओर भेजे गए नबी।
- फ़ज़्ज़लना (فَضَّلْنَا): हमने विशेष सम्मान और श्रेष्ठता प्रदान की।
- आलमीन (الْعَالَمِينَ): अपने-अपने समय के सभी लोगों और जगतों पर।
विस्तृत तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने चुनिंदा नबियों का ज़िक्र किया है, जिन्हें उन्होंने हिदायत का ख़ज़ाना सौंपा और उन्हें अपने समय के सभी लोगों पर श्रेष्ठता प्रदान की।
हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम वह महान नबी हैं जिन्होंने अपने पिता हज़रत इब्राहीम के साथ मिलकर खाना-ए-काबा की नींव रखी। उनकी कुर्बानी की याद हर साल ईद-उल-अज़हा पर मुसलमानों को सब्र और अल्लाह की रज़ा पर राज़ी रहने का पाठ सिखाती है।
हज़रत अल-यसा अलैहिस्सलाम बनी इस्राईल के नबी थे, जिन्होंने हज़रत इलियास के बाद उम्मत को तौहीद की राह पर चलाया। उनकी दावत का नतीजा यह था कि उनकी क़ौम के कई लोगों ने शिर्क छोड़कर अल्लाह की इबादत अपनाई।
हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम की कहानी हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उसके ग़ुस्से पर हावी होती है। जब उन्होंने अपनी क़ौम से नाराज़ होकर शहर छोड़ा, तो मछली के पेट में उनकी दुआ "ला इलाहा इल्ला अंत सुब्हानका इन्नी कुंतु मिनज़्ज़ालिमीन" ने उन्हें निजात दिलाई। यह दुआ मुसीबत के वक़्त हर मुसलमान के लिए बचाव का ज़रिया है।
हज़रत लूत अलैहिस्सलाम उस क़ौम की ओर भेजे गए जो अप्राकृतिक कर्मों में लिप्त थी। उन्होंने बड़ी हिम्मत से उन्हें अल्लाह की इबादत की दावत दी और उनके अंजाम ने हमें बताया कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम कितना भयानक होता है।
अल्लाह तआला का फ़रमान है कि हमने इन सभी को "आलमीन" पर फ़ज़ीलत दी। इसका मतलब यह है कि इन नबियों को अपने-अपने दौर की सारी उम्मतों पर श्रेष्ठता दी गई। यह श्रेष्ठता उनकी अपनी क़ाबिलियत से नहीं थी, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से विशेष रहमत और चुनाव था।
इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों, अल्लाह की मदद उनके साथ होती है। यही वजह है कि इन नबियों की सीरत हमारे लिए रोशनी का ज़रिया है।
आज हमें भी इन नबियों की तरह सब्र, इस्तिक़ामत और अल्लाह पर भरोसा रखने की ज़रूरत है। जब हम अपनी ज़िंदगी में इनके नक़्शे-क़दम पर चलेंगे, तो अल्लाह की रहमत और मदद हमारे साथ होगी। याद रखें, अल्लाह की मुहब्बत और उसके नबियों की पैरवी ही हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 84-88 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 86
सूरा अल-अनआम आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसमाइल व इलियास व युनूस व लूत (की भी…सूरा आयत 86/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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