Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- زَكَرِيَّا (ज़करिय्या): अल्लाह के नबी, हज़रत ज़करिय्या अलैहिस्सलाम।
- يَحْيَى (यहया): हज़रत ज़करिय्या के बेटे, नबी यहया अलैहिस्सलाम।
- عِيسَى (ईसा): हज़रत मरियम के बेटे, अल्लाह के रसूल ईसा अलैहिस्सलाम।
- إِلْيَاسَ (इल्यास): हज़रत इल्यास अलैहिस्सलाम, जो हारून अलैहिस्सलाम की संतान में से थे।
- الصَّالِحِينَ (सालिहीन): नेक, अच्छे और अल्लाह के फरमाबरदार लोग।
तफसीर:
इस आयत में अल्लाह तआला अपने उन नबियों का ज़िक्र कर रहा है जिन्हें उसने हिदायत दी और अपने दीन पर क़ायम रखा। इनमें हज़रत ज़करिय्या अलैहिस्सलाम शामिल हैं, जो अल्लाह के नेक बंदे और नबी थे, और उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी अल्लाह की इबादत और अपनी क़ौम की हिदायत में बिताई। उनके बेटे हज़रत यहया अलैहिस्सलाम भी अल्लाह के नबी थे, जो अपनी पाकीज़गी, परहेज़गारी और अल्लाह के हुक्मों की पैरवी में मिसाली थे। हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम, जो हज़रत मरियम के बेटे थे और बगैर बाप के पैदा हुए, अल्लाह के रसूल और उसके बंदे थे, उन्होंने भी अपनी क़ौम को तौहीद की दावत दी। और हज़रत इल्यास अलैहिस्सलाम, जो हारून अलैहिस्सलाम की नस्ल से थे, उन्हें बअलबक्क (शाम का एक इलाक़ा) की क़ौम की तरफ भेजा गया, उन्होंने भी अपनी क़ौम को अल्लाह की इबादत की तरफ बुलाया। ये सब नबी अल्लाह के नेक और सालिह बंदे थे, अल्लाह ने उन्हें हिदायत दी और उन्हें अपने दीन के लिए चुना। ये सब उसी सिलसिले की कड़ियाँ हैं जिसका ज़िक्र इससे पहले की आयतों में हुआ, यानी अल्लाह अपने चुने हुए बंदों को हिदायत देता है और उन्हें दुनिया और आख़िरत की भलाई अता करता है।
फ़ायदे:
- अल्लाह तआला अपने नबियों का ज़िक्र करके हमें सिखाता है कि नेकी और सलाह (अच्छाई) ही असली कामयाबी है, और अल्लाह अपने नेक बंदों को दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी।
- इन नबियों की ज़िंदगी हमारे लिए मशाल-ए-राह है — चाहे मुश्किलें कितनी भी हों, अल्लाह पर भरोसा रखने वाले कभी नाकाम नहीं होते।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के दीन की दावत हर ज़माने में जारी रही, और हर नबी ने अपनी क़ौम को तौहीद की तरफ बुलाया — इसलिए हमें भी अपने आस-पास के लोगों को अच्छाई की तरफ बुलाना चाहिए।
- अल्लाह की रहमत और हिदायत उसके नेक बंदों के साथ होती है, और जो लोग अल्लाह की राह में साबित-क़दम रहते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी अता करता है।
- इस आयत से मुसलमानों को यह प्यारा सबक मिलता है कि हमें अपने नबियों से मुहब्बत करनी चाहिए और उनके नेक रास्ते पर चलने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि हम भी अल्लाह के नेक बंदों में शामिल हो सकें।
📜 आयत 83-87 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 85
सूरा अल-अनआम आयत 85 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ज़करिया व यहया व ईसा व इलियास (सब की…सूरा आयत 85/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 83–87. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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