अल-हाक़्का · 46/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ الْوَتِينَ ۝٤٦
Summa laqata`naa minhul wateen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हम ज़रूर उनकी गर्दन उड़ा देते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْوَتِينَ (वतीन): यह दिल से जुड़ी हुई वह नस (शिरा) है जो रीढ़ की हड्डी के अंदर से होकर गुजरती है। जब यह कट जाती है तो इंसान की मौत हो जाती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि अगर नबी (ﷺ) हमारी तरफ कोई ऐसी बात मनघड़ंत कर लेते जो हमने नहीं कही, तो हम उनसे बड़ी सख्ती से बदला लेते। हम उनका दाहिना हाथ पकड़ लेते, फिर उनकी दिल से जुड़ी हुई नस (वतीन) काट देते, यानी उनकी जान ही ले लेते। और कोई भी उन्हें हमारे अज़ाब से बचा नहीं सकता था।

यह बात दरअसल नबी (ﷺ) की सच्चाई की सबसे बड़ी गवाही है। क्योंकि अगर नबी (ﷺ) झूठे होते और अल्लाह पर कोई झूठी बात गढ़ते, तो अल्लाह उन्हें ऐसी सज़ा देता जिससे कोई नहीं बचा सकता। लेकिन अल्लाह ने उन्हें हमेशा सच्चाई पर क़ायम रखा, उनकी हिफ़ाज़त की और उनके ज़रिए पूरी दुनिया को रहनुमाई अता की। यह खुद इस बात का सबूत है कि क़ुरआन अल्लाह का कलाम है और नबी (ﷺ) उसके सच्चे रसूल हैं।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह तआला अपने दीन की हिफ़ाज़त खुद करता है। कोई भी उसके दीन में कुछ मिलावट नहीं कर सकता। और अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त है, जिससे बचाने वाला कोई नहीं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के दीन को वैसे ही अपनाएं जैसे वह नाज़िल हुआ है, और नबी (ﷺ) की सुन्नत पर चलें। यही हमारी कामयाबी और नजात की राह है।

अल्लाह तआला ने आगे फ़रमाया कि यह क़ुरआन तो परहेज़गारों के लिए नसीहत है, यानी उन लोगों के लिए जो अल्लाह के हुक्मों को मानते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं। यह क़ुरआन उनके लिए रहनुमाई, रहमत और नजात का ज़रिया है।



📜 आयत 44-48 — अल-हाक़्का

44وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ الْأَقَاوِيلِ
अगर रसूल हमारी निस्बत कोई झूठ बात बना लाते
45لَأَخَذْنَا مِنْهُ بِالْيَمِينِ
तो हम उनका दाहिना हाथ पकड़ लेते
46ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ الْوَتِينَ
फिर हम ज़रूर उनकी गर्दन उड़ा देते
47فَمَا مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَاجِزِينَ
तो तुममें से कोई उनसे (मुझे रोक न सकता)
48وَإِنَّهُ لَتَذْكِرَةٌ لِّلْمُتَّقِينَ
ये तो परहेज़गारों के लिए नसीहत है
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अनुवाद — अल-हाक़्का 46

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Tuesday, August 18, 2026

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