अल-आराफ · 103/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
ثُمَّ بَعَثْنَا مِن بَعْدِهِم مُّوسَىٰ بِآيَاتِنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَظَلَمُوا بِهَا ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُفْسِدِينَ ۝١٠٣
Summa ba`asnaa mim ba`dihim Moosaa bi Aayaatinaaa ilaa Fir`awana wa mala`ihee fazalamoo bihaa fanzur kaifa kaana `aaqibatul mufsideen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने (उन पैग़म्बरान मज़कूरीन के बाद) मूसा को फिरऔन और उसके सरदारों के पास मौजिज़े अता करके (रसूल बनाकर) भेजा तो उन लोगों ने उन मौजिज़ात के साथ (बड़ी बड़ी) शरारतें की पस ज़रा ग़ौर तो करो कि आख़िर फसादियों का अन्जाम क्या हुआ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بَعَثْنَا: हमने भेजा।
  • مَلَئِهِ: उसके (फ़िरऔन के) सरदारों और प्रमुख लोगों को।
  • فَظَلَمُوا بِهَا: उन्होंने उन (निशानियों) के साथ ज़ुल्म किया, यानी उन्हें झुठलाया और कुफ़्र किया।
  • عَاقِبَةُ الْمُفْسِدِينَ: बिगाड़ पैदा करने वालों का अंजाम।

तफ़सीर:

इन पिछले नबियों (नूह, हूद, सालेह, लूत, शुऐब — अलैहिमुस्सलाम) और उनकी क़ौमों के बाद, अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को अपनी स्पष्ट निशानियों और चमत्कारों (जैसे लाठी का अज़दहा बनना, हाथ का चमकना, और दूसरे मो'जिज़ात) के साथ फ़िरऔन और उसके सरदारों की तरफ़ भेजा। लेकिन उन लोगों ने अपनी सरकशी, हठधर्मिता और ज़ुल्म की वजह से उन निशानियों को नकार दिया और उन पर ईमान नहीं लाए। उन्होंने सच्चाई को जानते हुए भी जानबूझकर कुफ़्र का रास्ता अपनाया।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐ नबी! तुम ग़ौर से देखो कि उन मुफ़्सिदों (बिगाड़ पैदा करने वालों) का अंजाम क्या हुआ। अल्लाह ने उन्हें समुद्र में डुबो कर हलाक कर दिया, और उन पर दुनिया और आख़िरत में लानत भेजी। यही उन लोगों का अंजाम है जो अल्लाह की निशानियों से मुँह मोड़ते हैं और ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह का क़ानून (सुन्नत) यही है कि वह अपने नबियों को भेजने के बाद उन्हें झुठलाने वालों को ज़रूर पकड़ता है, चाहे वे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों। इससे हमें सबक़ मिलता है कि हमें अल्लाह के हुक्मों के आगे सर झुकाना चाहिए।
  2. ज़ुल्म और सरकशी इंसान को हलाकत की तरफ़ ले जाती है, जबकि नम्रता और ईमान इंसान को नजात दिलाता है।
  3. अल्लाह के नबियों की निशानियाँ सच्ची होती हैं, और उन्हें झुठलाने वालों का अंजाम बुरा होता है। इसलिए हमें नबियों की सीख पर अमल करना चाहिए।
  4. यह आयत हमें तसल्ली देती है कि बुराई और फ़साद फैलाने वाले चाहे कितने भी दिखावा करें, अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकते। अच्छाई और सच्चाई का रास्ता ही कामयाबी का रास्ता है।


📜 आयत 101-105 — सूरा अल-आराफ

101تِلْكَ الْقُرَىٰ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنبَائِهَا ۚ وَلَقَدْ جَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا كَانُوا لِيُؤْمِنُوا بِمَا كَذَّبُوا مِن قَبْلُ ۚ كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ الْكَافِرِينَ
(ऐ रसूल) ये चन्द बस्तियाँ हैं जिन के हालात हम तुमसे बयान करते हैं और इसमें तो शक़ ही नहीं कि उनके पैग़म्बर उनके पास वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर आए मगर ये लोग जिसके पहले झुठला चुके थे उस पर भला काहे को ईमान लाने वाले थे ख़ुदा यूं काफिरों के दिलों पर अलामत मुकर्रर कर देता है (कि ये ईमान न लाएँगें)
102وَمَا وَجَدْنَا لِأَكْثَرِهِم مِّنْ عَهْدٍ ۖ وَإِن وَجَدْنَا أَكْثَرَهُمْ لَفَاسِقِينَ
और हमने तो उसमें से अक्सरों का एहद (ठीक) न पाया और हमने उनमें से अक्सरों को बदकार ही पाया
103ثُمَّ بَعَثْنَا مِن بَعْدِهِم مُّوسَىٰ بِآيَاتِنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَظَلَمُوا بِهَا ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُفْسِدِينَ
फिर हमने (उन पैग़म्बरान मज़कूरीन के बाद) मूसा को फिरऔन और उसके सरदारों के पास मौजिज़े अता करके (रसूल बनाकर) भेजा तो उन लोगों ने उन मौजिज़ात के साथ (बड़ी बड़ी) शरारतें की पस ज़रा ग़ौर तो करो कि आख़िर फसादियों का अन्जाम क्या हुआ
104وَقَالَ مُوسَىٰ يَا فِرْعَوْنُ إِنِّي رَسُولٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
और मूसा ने (फिरऔन से) कहा ऐ फिरऔनमें यक़ीनन परवरदिगारे आलम का रसूल हूँ
105حَقِيقٌ عَلَىٰ أَن لَّا أَقُولَ عَلَى اللَّهِ إِلَّا الْحَقَّ ۚ قَدْ جِئْتُكُم بِبَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَأَرْسِلْ مَعِيَ بَنِي إِسْرَائِيلَ
मुझ पर वाजिब है कि ख़ुदा पर सच के सिवा (एक हुरमत भी झूठ) न कहूँ मै यक़ीनन तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वाजेए व रोशन मौजिज़े लेकर आया हूँ
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
103आयत

अनुवाद — अल-आराफ 103

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Wednesday, September 30, 2026

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