अल-आराफ · 104/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَقَالَ مُوسَىٰ يَا فِرْعَوْنُ إِنِّي رَسُولٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ ۝١٠٤
Wa qaala Moosaa yaa Fir`awnu inee Rasoolum mir Rabbil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
और मूसा ने (फिरऔन से) कहा ऐ फिरऔनमें यक़ीनन परवरदिगारे आलम का रसूल हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَسُولٌ: भेजा हुआ, संदेशवाहक, पैग़म्बर।
  • رَبِّ الْعَالَمِينَ: सारे संसारों का पालनहार, सृष्टि के सभी प्राणियों का स्वामी और प्रबंधक।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को फ़िरऔन के पास भेजा, तो उन्होंने उसके दरबार में पहुँचकर उसे सम्बोधित करते हुए कहा: "ऐ फ़िरऔन! मैं अल्लाह का भेजा हुआ हूँ, जो सारे संसारों का पालनहार, स्वामी और प्रबंधक है।" यह कहकर उन्होंने अपनी पहचान स्पष्ट कर दी कि मैं किसी इंसान या ताकतवर बादशाह की ओर से नहीं आया, बल्कि मुझे उस परम शक्ति ने भेजा है जो पूरी कायनात का ख़ालिक़ और मालिक है। उन्होंने फ़िरऔन को सीधे उसके नाम से पुकारा और अपने रिसालत (पैग़म्बरी) का ऐलान किया, ताकि उसे यक़ीन हो जाए कि यह कोई राजनीतिक या दुनियावी मामला नहीं, बल्कि ईश्वरीय पैग़ाम है। फ़िरऔन ने उनकी इस बात को झूठ कहा, लेकिन मूसा (अलैहिस्सलाम) ने बिना किसी डर के सच्चाई पेश की, क्योंकि उन्हें अपने रब पर पूरा भरोसा था।

फ़ायदे (सबक़):

  1. सच्चाई को बिना किसी भय के पेश करना चाहिए, चाहे सामने कितना ही बड़ा ज़ालिम और ताकतवर क्यों न हो। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन जैसे सरकश बादशाह के सामने बेबाकी से अपना पैग़ाम सुनाया।
  2. दावत-ए-दीन (इस्लाम की पेशकश) में नम्रता और स्पष्टता दोनों होनी चाहिए। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने "ऐ फ़िरऔन" कहकर उसे सम्बोधित किया, जो अदब के साथ सच्चाई बयान करने का तरीक़ा है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के दीन की तरफ़ बुलाने वालों को अपनी पहचान और मक़सद साफ़-साफ़ बयान करना चाहिए, ताकि लोगों पर कोई शुबहा न रहे।
  4. अल्लाह पर भरोसा करने वाले को किसी ज़ालिम की ताक़त से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि असली ताक़त सिर्फ़ अल्लाह के पास है, जो सारे संसारों का रब है।
  5. इस आयत से मुसलमानों को हिम्मत मिलती है कि हक़ (सच्चाई) के लिए खड़े हों और बड़ी से बड़ी शख़्सियत के सामने भी अल्लाह का पैग़ाम बिना झिझक पहुँचाएँ।


📜 आयत 102-106 — अल-आराफ

102وَمَا وَجَدْنَا لِأَكْثَرِهِم مِّنْ عَهْدٍ ۖ وَإِن وَجَدْنَا أَكْثَرَهُمْ لَفَاسِقِينَ
और हमने तो उसमें से अक्सरों का एहद (ठीक) न पाया और हमने उनमें से अक्सरों को बदकार ही पाया
103ثُمَّ بَعَثْنَا مِن بَعْدِهِم مُّوسَىٰ بِآيَاتِنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَظَلَمُوا بِهَا ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُفْسِدِينَ
फिर हमने (उन पैग़म्बरान मज़कूरीन के बाद) मूसा को फिरऔन और उसके सरदारों के पास मौजिज़े अता करके (रसूल बनाकर) भेजा तो उन लोगों ने उन मौजिज़ात के साथ (बड़ी बड़ी) शरारतें की पस ज़रा ग़ौर तो करो कि आख़िर फसादियों का अन्जाम क्या हुआ
104وَقَالَ مُوسَىٰ يَا فِرْعَوْنُ إِنِّي رَسُولٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
और मूसा ने (फिरऔन से) कहा ऐ फिरऔनमें यक़ीनन परवरदिगारे आलम का रसूल हूँ
105حَقِيقٌ عَلَىٰ أَن لَّا أَقُولَ عَلَى اللَّهِ إِلَّا الْحَقَّ ۚ قَدْ جِئْتُكُم بِبَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَأَرْسِلْ مَعِيَ بَنِي إِسْرَائِيلَ
मुझ पर वाजिब है कि ख़ुदा पर सच के सिवा (एक हुरमत भी झूठ) न कहूँ मै यक़ीनन तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वाजेए व रोशन मौजिज़े लेकर आया हूँ
106قَالَ إِن كُنتَ جِئْتَ بِآيَةٍ فَأْتِ بِهَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तो तू बनी ईसराइल को मेरे हमराह करे दे फिरऔन कहने लगा अगर तुम सच्चे हो और वाक़ई कोई मौजिज़ा लेकर आए हो तो उसे दिखाओ
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अनुवाद — अल-आराफ 104

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Tuesday, August 18, 2026

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