अल-आराफ · 138/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَجَاوَزْنَا بِبَنِي إِسْرَائِيلَ الْبَحْرَ فَأَتَوْا عَلَىٰ قَوْمٍ يَعْكُفُونَ عَلَىٰ أَصْنَامٍ لَّهُمْ ۚ قَالُوا يَا مُوسَى اجْعَل لَّنَا إِلَٰهًا كَمَا لَهُمْ آلِهَةٌ ۚ قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ ۝١٣٨
Wa jaawaznaa bi Banneee Israaa`eelal bahra fa ataw `alaa qawminy ya`kufoona `alaaa asnaamil lahum; qaaloo yaa Moosaj`al lanaa ilaahan kamaa lahum aalihah; qaala innakum qawmun tajhaloon
📖 हिंदी अर्थ
और हमने बनी ईसराइल को दरिया के उस पार उतार दिया तो एक ऐसे लोगों पर से गुज़रे जो अपने (हाथों से बनाए हुए) बुतों की परसतिश पर जमा बैठे थे (तो उनको देख कर बनी ईसराइल से) कहने लगे ऐ मूसा जैसे उन लोगों के माबूद (बुत) हैं वैसे ही हमारे लिए भी एक माबूद बनाओ मूसा ने जवाब दिया कि तुम लोग जाहिल लोग हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَعْكُفُونَ: किसी चीज़ पर निरंतर टिके रहना, लगातार उसकी पूजा-आराधना में मशगूल रहना।
  • أَصْنَام: मूर्तियाँ, जिन्हें लोग पूजते थे।
  • إِلَٰهًا: पूज्य, जिसे पूजा जाए।
  • تَجْهَلُونَ: अज्ञानता दिखाना, यहाँ अर्थ है कि तुम अल्लाह की महानता और उसके योग्य सम्मान से अनजान हो।

तफ़सीर:

जब हमने (अल्लाह ने) बनी इसराईल को समुद्र पार कराया, और यह उस समय हुआ जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी लाठी से समुद्र को मारा और वह फटकर रास्ता बन गया। इसके बाद वे एक ऐसी क़ौम के पास से गुज़रे जो अपनी मूर्तियों की पूजा में लगे हुए थे, और वे मूर्तियाँ बैल की शक्ल पर बनी हुई थीं। यह दृश्य देखकर बनी इसराईल के लोगों ने मूसा (अलैहिस्सलाम) से कहा: "हमारे लिए भी एक पूज्य (मूर्ति) बना दीजिए, जैसे इन लोगों के पास पूज्य (मूर्तियाँ) हैं।" यह उनकी नादानी और अज्ञानता की सबसे बड़ी निशानी थी कि उन्होंने अभी-अभी अल्लाह के वे करिश्मे देखे थे, जैसे समुद्र का फटना, फिर भी वे मूर्तियों की तरफ़ मुड़ गए। इस पर मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें जवाब दिया: "तुम लोग बड़े ही अज्ञानी हो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि अल्लाह की इबादत के योग्य केवल वही है, जो अकेला और सब पर शक्तिशाली है। उसके अलावा किसी और की पूजा करना, चाहे वह मूर्ति हो या कोई और चीज़, पूर्ण अज्ञानता और गुमराही है।"

फ़ायदे:

  • यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की महानता और उसके अधिकारों को समझना सबसे बड़ी बुद्धिमानी है, और उसके साथ किसी को साझी ठहराना सबसे बड़ी अज्ञानता है।
  • इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के दिखाए गए निशानों और करिश्मों से सबक़ ले, न कि दुनिया के दिखावे से बहक जाए।
  • यह आयत मुसलमानों को तौहीद (एकेश्वरवाद) पर दृढ़ रहने की तरग़ीब देती है, और यह बताती है कि जो लोग अल्लाह के साथ किसी को शरीक करते हैं, वे अज्ञानता के अंधेरे में भटक रहे हैं।
  • इससे यह भी पता चलता है कि अच्छे इंसान और नबी का फ़र्ज़ है कि वह लोगों को सीधे रास्ते पर लाए, चाहे लोग कितनी ही ग़लत बातें क्यों न करें, और उन्हें नर्मी और हिकमत से समझाए।


📜 आयत 136-140 — अल-आराफ

136فَانتَقَمْنَا مِنْهُمْ فَأَغْرَقْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ بِأَنَّهُمْ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَكَانُوا عَنْهَا غَافِلِينَ
तब आख़िर हमने उनसे (उनकी शरारत का) बदला लिया तो चूंकि वह लोग हमारी आयतों को झुटलाते थे और उनसे ग़ाफिल रहते थे हमने उन्हें दरिया में डुबो दिया
137وَأَوْرَثْنَا الْقَوْمَ الَّذِينَ كَانُوا يُسْتَضْعَفُونَ مَشَارِقَ الْأَرْضِ وَمَغَارِبَهَا الَّتِي بَارَكْنَا فِيهَا ۖ وَتَمَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ الْحُسْنَىٰ عَلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ بِمَا صَبَرُوا ۖ وَدَمَّرْنَا مَا كَانَ يَصْنَعُ فِرْعَوْنُ وَقَوْمُهُ وَمَا كَانُوا يَعْرِشُونَ
और जिन बेचारों को ये लोग कमज़ोर समझते थे उन्हीं को (मुल्क शाम की) ज़मीन का जिसमें हमने (ज़रखेज़ होने की) बरकत दी थी उसके पूरब पश्चिम (सब) का वारिस (मालिक) बना दिया और चूंकि बनी इसराईल नें (फिरऔन के ज़ालिमों) पर सब्र किया था इसलिए तुम्हारे परवरदिगार का नेक वायदा (जो उसने बनी इसराइल से किया था) पूरा हो गया और जो कुछ फिरऔन और उसकी क़ौम के लोग करते थे और जो ऊँची ऊँची इमारते बनाते थे सब हमने बरबाद कर दी
138وَجَاوَزْنَا بِبَنِي إِسْرَائِيلَ الْبَحْرَ فَأَتَوْا عَلَىٰ قَوْمٍ يَعْكُفُونَ عَلَىٰ أَصْنَامٍ لَّهُمْ ۚ قَالُوا يَا مُوسَى اجْعَل لَّنَا إِلَٰهًا كَمَا لَهُمْ آلِهَةٌ ۚ قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ
और हमने बनी ईसराइल को दरिया के उस पार उतार दिया तो एक ऐसे लोगों पर से गुज़रे जो अपने (हाथों से बनाए हुए) बुतों की परसतिश पर जमा बैठे थे (तो उनको देख कर बनी ईसराइल से) कहने लगे ऐ मूसा जैसे उन लोगों के माबूद (बुत) हैं वैसे ही हमारे लिए भी एक माबूद बनाओ मूसा ने जवाब दिया कि तुम लोग जाहिल लोग हो
139إِنَّ هَٰؤُلَاءِ مُتَبَّرٌ مَّا هُمْ فِيهِ وَبَاطِلٌ مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
(अरे कमबख्तो) ये लोग जिस मज़हब पर हैं (वह यक़ीनी बरबाद होकर रहेगा) और जो अमल ये लोग कर रहे हैं (वह सब मिटिया मेट हो जाएगा)
140قَالَ أَغَيْرَ اللَّهِ أَبْغِيكُمْ إِلَٰهًا وَهُوَ فَضَّلَكُمْ عَلَى الْعَالَمِينَ
(मूसा ने ये भी) कहा क्या तुम्हारा ये मतलब है कि ख़ुदा को छोड़कर मै दूसरे को तुम्हारा माबूद तलाश करू
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अनुवाद — अल-आराफ 138

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Tuesday, August 18, 2026

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