अल-आराफ · 139/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
إِنَّ هَٰؤُلَاءِ مُتَبَّرٌ مَّا هُمْ فِيهِ وَبَاطِلٌ مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝١٣٩
Innaa haaa`ulaaa`i mutabbarum maa hum feehi wa baatilum maa kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
(अरे कमबख्तो) ये लोग जिस मज़हब पर हैं (वह यक़ीनी बरबाद होकर रहेगा) और जो अमल ये लोग कर रहे हैं (वह सब मिटिया मेट हो जाएगा)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مُتَبَّرٌ: नष्ट होने वाला, विनष्ट, तबाह।
  • مَّا هُمْ فِيهِ: जिस (स्थिति या कार्य) में वे लगे हुए हैं।
  • بَاطِلٌ: व्यर्थ, असत्य, झूठा।

व्याख्या:

यह आयत उस समय की बात बयान कर रही है जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा था कि ये लोग जिन मूर्तियों की पूजा कर रहे हैं, उनका यह कार्य पूर्णतः विनष्ट होने वाला है। जिस शिर्क (बहुदेववाद) और मूर्तिपूजा में ये लोग डूबे हुए हैं, वह तबाह और बर्बाद होकर रहेगा। उनका यह पूजा-पाठ, ये सारे कर्म और यह धार्मिक आचरण सब कुछ व्यर्थ और झूठा है। क्योंकि ये मूर्तियाँ न तो कोई लाभ पहुँचा सकती हैं और न ही कोई हानि दूर कर सकती हैं। जब अल्लाह का आदेश आएगा, तो यह सब कुछ मिट्टी में मिल जाएगा। यदि ये लोग अपनी इस हालत पर अड़े रहे और ईमान नहीं लाए, तो वे भी उसी विनाश का हिस्सा बनेंगे। उनके सारे अच्छे कर्म भी इसलिए बेकार हो जाएँगे क्योंकि उन्होंने अल्लाह के साथ दूसरों को साझी ठहराया है। शिर्क ऐसा पाप है जो सारे अच्छे कर्मों को नष्ट कर देता है।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि शिर्क और मूर्तिपूजा जैसी चीज़ें कितनी भी पुरानी और व्यापक क्यों न हों, अल्लाह की नज़र में वे तबाह और विनष्ट होने वाली हैं। सत्य की कसौटी पर केवल वही कर्म टिकते हैं जो अल्लाह की इबादत के लिए शुद्ध हों।
  2. मुसलमान को चाहिए कि वह अपने अमल को हमेशा शिर्क से पाक रखे। छोटे-बड़े हर प्रकार के शिर्क (जैसे रिया या दिखावा) से बचे, क्योंकि यह सारे अच्छे कर्मों को बर्बाद कर सकता है।
  3. यह आयत हमें यह भी बताती है कि बातिल (असत्य) चाहे कितना भी शक्तिशाली और फैला हुआ क्यों न दिखे, उसका अंजाम विनाश ही है। अल्लाह का दीन ही सच्चा और बाकी रहने वाला है।
  4. एक ईमानवाले को चाहिए कि वह सत्य की पहचान करे और उस पर दृढ़ रहे, भले ही उसके आस-पास के लोग कितनी ही गलत चीज़ों पर जमे हुए क्यों न हों।


📜 आयत 137-141 — अल-आराफ

137وَأَوْرَثْنَا الْقَوْمَ الَّذِينَ كَانُوا يُسْتَضْعَفُونَ مَشَارِقَ الْأَرْضِ وَمَغَارِبَهَا الَّتِي بَارَكْنَا فِيهَا ۖ وَتَمَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ الْحُسْنَىٰ عَلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ بِمَا صَبَرُوا ۖ وَدَمَّرْنَا مَا كَانَ يَصْنَعُ فِرْعَوْنُ وَقَوْمُهُ وَمَا كَانُوا يَعْرِشُونَ
और जिन बेचारों को ये लोग कमज़ोर समझते थे उन्हीं को (मुल्क शाम की) ज़मीन का जिसमें हमने (ज़रखेज़ होने की) बरकत दी थी उसके पूरब पश्चिम (सब) का वारिस (मालिक) बना दिया और चूंकि बनी इसराईल नें (फिरऔन के ज़ालिमों) पर सब्र किया था इसलिए तुम्हारे परवरदिगार का नेक वायदा (जो उसने बनी इसराइल से किया था) पूरा हो गया और जो कुछ फिरऔन और उसकी क़ौम के लोग करते थे और जो ऊँची ऊँची इमारते बनाते थे सब हमने बरबाद कर दी
138وَجَاوَزْنَا بِبَنِي إِسْرَائِيلَ الْبَحْرَ فَأَتَوْا عَلَىٰ قَوْمٍ يَعْكُفُونَ عَلَىٰ أَصْنَامٍ لَّهُمْ ۚ قَالُوا يَا مُوسَى اجْعَل لَّنَا إِلَٰهًا كَمَا لَهُمْ آلِهَةٌ ۚ قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ
और हमने बनी ईसराइल को दरिया के उस पार उतार दिया तो एक ऐसे लोगों पर से गुज़रे जो अपने (हाथों से बनाए हुए) बुतों की परसतिश पर जमा बैठे थे (तो उनको देख कर बनी ईसराइल से) कहने लगे ऐ मूसा जैसे उन लोगों के माबूद (बुत) हैं वैसे ही हमारे लिए भी एक माबूद बनाओ मूसा ने जवाब दिया कि तुम लोग जाहिल लोग हो
139إِنَّ هَٰؤُلَاءِ مُتَبَّرٌ مَّا هُمْ فِيهِ وَبَاطِلٌ مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
(अरे कमबख्तो) ये लोग जिस मज़हब पर हैं (वह यक़ीनी बरबाद होकर रहेगा) और जो अमल ये लोग कर रहे हैं (वह सब मिटिया मेट हो जाएगा)
140قَالَ أَغَيْرَ اللَّهِ أَبْغِيكُمْ إِلَٰهًا وَهُوَ فَضَّلَكُمْ عَلَى الْعَالَمِينَ
(मूसा ने ये भी) कहा क्या तुम्हारा ये मतलब है कि ख़ुदा को छोड़कर मै दूसरे को तुम्हारा माबूद तलाश करू
141وَإِذْ أَنجَيْنَاكُم مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ ۖ يُقَتِّلُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَاءٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌ
हालॉकि उसने तुमको सारी खुदाई पर फज़ीलत दी है (ऐ बनी इसराइल वह वक्त याद करो) जब हमने तुमको फिरऔन के लोगों से नजात दी जब वह लोग तुम्हें बड़ी बड़ी तकलीफें पहुंचाते थे तुम्हारे बेटों को तो (चुन चुन कर) क़त्ल कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को (लौन्डियॉ बनाने के वास्ते ज़िन्दा रख छोड़ते) और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे (सब्र की) सख्त आज़माइश थी
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अनुवाद — अल-आराफ 139

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Tuesday, August 18, 2026

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