Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَدْيَنَ (मदयन): यह हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की संतान में से एक व्यक्ति का नाम था, और उन्हीं के नाम पर उस क़ौम के शहर का नाम रखा गया।
- أَخَاهُمْ (उनका भाई): यहाँ भाई से मतलब नसब (ख़ानदान) में भाई होना है, न कि दीन में।
- بَيِّنَةٌ (स्पष्ट प्रमाण): वह स्पष्ट चमत्कार और दलील जो नबी की सच्चाई पर गवाही दे।
- تَبْخَسُوا (कम न करो): किसी का हक़ कम करना या उसे नुक़सान पहुँचाना।
- إِصْلَاحِهَا (उसके सुधार के बाद): अल्लाह ने पैग़म्बरों के ज़रिए ज़मीन को ईमान और अदल से सुधारा था।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने हज़रत शुएब अलैहिस्सलाम को उनकी क़ौम "मदयन" की ओर भेजा। यह वही क़ौम थी जो कुफ़्र में डूबी हुई थी और लोगों को नाप-तौल में धोखा देती थी। हज़रत शुएब ने अपनी क़ौम को पुकारा: "ऐ मेरी क़ौम! अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है। मैं तुम्हें सिर्फ़ उसी की तरफ़ बुलाता हूँ, और मेरे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से स्पष्ट प्रमाण आ चुका है जो मेरी सच्चाई की गवाही देता है।"
फिर उन्होंने अपनी क़ौम को सबसे अहम नसीहत दी: "नाप और तौल में पूरा-पूरा दो, लोगों को उनका हक़ कम करके मत दो, और ज़मीन में फ़साद मत फैलाओ।" यानी अल्लाह ने पैग़म्बरों के ज़रिए ज़मीन को ईमान, अदल और अच्छाई से सुधारा है, तुम उसे कुफ़्र, ज़ुल्म और बेईमानी से बिगाड़ो मत।
हज़रत शुएब ने यह भी फ़रमाया: "यह चीज़ें जो मैं तुम्हें बता रहा हूँ — यानी अल्लाह की इबादत, ईमानदारी, नाप-तौल में पूरा हक़ देना और ज़मीन पर फ़साद न फैलाना — यह तुम्हारे लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतर है, बशर्ते कि तुम सच्चे दिल से मेरी बात को मानो और अल्लाह पर ईमान रखो।"
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ नमाज़ और रोज़े का नाम नहीं, बल्कि यह पूरे जीवन का निज़ाम है। अल्लाह की इबादत के साथ-साथ लोगों के हक़ अदा करना, ईमानदारी से काम करना और समाज में अदल क़ायम करना भी हमारा फ़र्ज़ है। आज के दौर में जब दुनिया भर में बेईमानी, धोखाधड़ी और ज़ुल्म फैला हुआ है, यह आयत हमें बुलाती है कि हम अपने कामों में सच्चाई और ईमानदारी अपनाएँ। याद रखिए, अल्लाह उन्हीं लोगों से मुहब्बत करता है जो अदल और इंसाफ़ करते हैं। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की भलाई और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 83-87 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 85
सूरा अल-आराफ आयत 85 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (हमने) मदयन (वालों के) पास उनके भाई शुएब को…सूरा आयत 85/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 83–87. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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