अल-मआरिज · 5/44
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मआरिज
فَاصْبِرْ صَبْرًا جَمِيلًا ۝٥
Fasbir ssabran jameelaa
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम अच्छी तरह इन तक़लीफों को बरदाश्त करते रहो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاصْبِرْ: धैर्य रखें, सब्र करें।
  • صَبْرًا جَمِيلًا: वह सुंदर धैर्य जिसमें कोई शिकायत न हो, न बेचैनी हो और न ही अधीरता।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जब ये मुशरिकीन आपका मज़ाक उड़ाते हैं, अज़ाब को जल्दी लाने की मांग करते हैं, और आपकी बातों को झुठलाते हैं, तो आप उनके इस व्यवहार पर सब्र करें — लेकिन वह सब्र जो सुंदर हो, खूबसूरत हो। यानी ऐसा धैर्य जिसमें न बेचैनी हो, न घबराहट हो, न किसी इंसान से शिकायत हो, और न ही अल्लाह के फैसले पर कोई ऐतराज़ हो। यह वह सब्र है जो पूर्ण विश्वास और भरोसे के साथ किया जाता है — दिल को अल्लाह के हवाले कर देना, यह जानते हुए कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी, और उसका वादा सच्चा है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब हमारे सामने मुश्किलें आएं, लोग हमारा मज़ाक उड़ाएं, या हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करें, तो हमें जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, बल्कि उस सुंदर सब्र को अपनाना चाहिए जो अल्लाह को पसंद है। यह सब्र कमज़ोरी नहीं, बल्कि ताकत है — यह दिल की मज़बूती और ईमान की गहराई की निशानी है। जो व्यक्ति इस तरह सब्र करता है, अल्लाह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि उसे ऐसी जगह से मदद देता है जिसका उसे अंदाज़ा भी नहीं होता।

याद रखें, सुंदर सब्र वही है जो सिर्फ अल्लाह के लिए हो, और उसका इनाम भी अल्लाह ही देगा — ऐसा इनाम जो हर दुख और तकलीफ को भुला देगा।



📜 आयत 3-7 — सूरा अल-मआरिज

3مِّنَ اللَّهِ ذِي الْمَعَارِجِ
जो दर्जे वाले ख़ुदा की तरफ से (होने वाला) था
4تَعْرُجُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ إِلَيْهِ فِي يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُ خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍ
जिसकी तरफ फ़रिश्ते और रूहुल अमीन चढ़ते हैं (और ये) एक दिन में इतनी मुसाफ़त तय करते हैं जिसका अन्दाज़ा पचास हज़ार बरस का होगा
5فَاصْبِرْ صَبْرًا جَمِيلًا
तो तुम अच्छी तरह इन तक़लीफों को बरदाश्त करते रहो
6إِنَّهُمْ يَرَوْنَهُ بَعِيدًا
वह (क़यामत) उनकी निगाह में बहुत दूर है
7وَنَرَاهُ قَرِيبًا
और हमारी नज़र में नज़दीक है
अल-मआरिजकुरान सूची
44आयत
मक्कीअवतरण स्थान
5आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 5

सूरा अल-मआरिज आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम अच्छी तरह इन तक़लीफों को बरदाश्त करते रहो

सूरा आयत 5/44 — सूरा अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मआरिज सुनें, सूरा अल-मआरिज अनुवाद, सूरा अल-मआरिज mp3, सूरा अल-मआरिज pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.





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Wednesday, September 30, 2026

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