अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَعْرُجُ: चढ़ना, ऊपर जाना
- الْمَلَائِكَةُ: फ़रिश्ते
- الرُّوحُ: जिब्रील अलैहिस्सलाम
- إِلَيْهِ: उसकी ओर (अल्लाह की ओर)
- مِقْدَارُهُ: उसकी माप/अवधि
- خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍ: पचास हज़ार साल
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस महान दिन की भयावहता और अज़मत को बयान करती है जब अल्लाह तआला अपने बंदों का हिसाब लेने के लिए अपने अर्श पर आएगा। इस आयत में बताया गया है कि फ़रिश्ते और जिब्रील अलैहिस्सलाम उस दिन अल्लाह की ओर चढ़ते हैं, और वह दिन इतना लंबा होगा कि उसकी अवधि पचास हज़ार साल के बराबर होगी।
यह दिन उन काफ़िरों और मुनकिरों के लिए बेहद कठिन और भयावह होगा जिन्होंने आख़िरत को झुठलाया। लेकिन यही दिन मोमिनों के लिए एक नमाज़ (फ़र्ज़ नमाज़) के समान हल्का और आसान होगा। यह अल्लाह की रहमत और कृपा है कि वह अपने नेक बंदों के लिए उस भयानक दिन को भी आसान बना देगा।
इस आयत में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि फ़रिश्ते लगातार अल्लाह के आदेशों को लेकर आते-जाते रहते हैं, और जिब्रील अमीन उनमें सबसे प्रमुख हैं। यह दिखाता है कि अल्लाह की कुदरत और उसका नियंत्रण हर समय सक्रिय है, और वह अपनी मख़लूक़ात से बेख़बर नहीं है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें उस महान दिन की याद दिलाती है जब हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना होगा। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम अपनी ज़िंदगी को ग़ाफ़िल होकर न बिताएं, बल्कि अल्लाह की इबादत और उसकी राह में भलाई के कामों में लगे रहें। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह के आदेशों का पालन करेंगे और उसकी रहमत के तलबगार रहेंगे, उनके लिए वह दिन आसान कर दिया जाएगा। अल्लाह की रहमत असीम है, और वह अपने बंदों पर मेहरबानी करने वाला है। हमें चाहिए कि हम अपने रब की तरफ़ रुजू करें, उसकी इबादत में अपना वक़्त गुज़ारें, और उस दिन की तैयारी करें जब कोई किसी के काम न आएगा, सिवाय उसके जो अल्लाह के सामने साफ़ दिल लेकर आएगा।
📜 आयत 2-6 — अल-मआरिज
अनुवाद — अल-मआरिज 4
सूरा अल-मआरिज आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिसकी तरफ फ़रिश्ते और रूहुल अमीन चढ़ते हैं (और ये)…सूरा आयत 4/44 — अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मआरिज सुनें, अल-मआरिज अनुवाद, अल-मआरिज mp3, अल-मआरिज pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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