अल-मुज्जम्मिल · 7/20
अनुवाद उच्चारण — अल-मुज्जम्मिल
إِنَّ لَكَ فِي النَّهَارِ سَبْحًا طَوِيلًا ۝٧
Inna laka fin nahaari sabhan taweelaa
📖 हिंदी अर्थ
दिन को तो तुम्हारे बहुत बड़े बड़े अशग़ाल हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَبْحًا (सब्हन): चलना-फिरना, आना-जाना, कामों में व्यस्त रहना, इधर-उधर घूमना।
  • طَوِيلًا (तवीलन): बहुत लंबा, विस्तृत।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाते हैं कि दिन के समय आपके लिए बहुत लंबा चलना-फिरना और कामों में व्यस्तता है। दिन में आपको दावत-ए-इस्लाम के काम, लोगों की ज़रूरतें पूरी करना, उनके मामलों को सुलझाना, और दूसरे कार्यों में समय बिताना पड़ता है। जिस तरह एक तैराक पानी में लगातार हाथ-पैर चलाता रहता है, उसी तरह दिन भर आप विभिन्न कार्यों में मशगूल रहते हैं।

इसलिए अल्लाह ने आपको रात के समय इबादत का हुक्म दिया, क्योंकि रात का समय दिन के कामों से फ़ारिग़ होकर अल्लाह से जुड़ने का सबसे अच्छा समय है। रात की तहज्जुद की नमाज़, क़ुरआन की तिलावत और अल्लाह के ज़िक्र के लिए यह सबसे मुनासिब वक़्त है। यह आयत हमें सिखाती है कि दिन भर की थकान और कामों के बावजूद, रात के कुछ पल अल्लाह के लिए निकालना चाहिए।

यह हिदायत सिर्फ़ नबी ﷺ के लिए नहीं, बल्कि हर मोमिन के लिए है। हमारे दिन भी कामों में गुज़रते हैं — रोज़ी की तलाश, परिवार की देखभाल, और दूसरी ज़िम्मेदारियाँ। लेकिन अल्लाह हमें याद दिलाता है कि रात का सन्नाटा, जब दुनिया सो जाती है, वह समय उसके साथ राबिता (संबंध) मज़बूत करने का है। जो व्यक्ति रात में उठकर अल्लाह से मुनाजात करता है, उसे दिन भर की मुश्किलों के लिए ताक़त और सुकून मिलता है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि दुनिया के कामों में इतना न खो जाएँ कि अल्लाह से हमारा रिश्ता कमज़ोर हो जाए। रात की इबादत हमारे दिल को साफ़ करती है, हमारे ईमान को ताज़ा करती है, और हमें दिन के कामों के लिए बेहतर तैयार करती है। अल्लाह ने रात को सुकून और इबादत के लिए बनाया है, और दिन को काम-काज के लिए। जो इन दोनों समयों का सही इस्तेमाल करता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — अल-मुज्जम्मिल

5إِنَّا سَنُلْقِي عَلَيْكَ قَوْلًا ثَقِيلًا
हम अनक़रीब तुम पर एक भारी हुक्म नाज़िल करेंगे इसमें शक़ नहीं कि रात को उठना
6إِنَّ نَاشِئَةَ اللَّيْلِ هِيَ أَشَدُّ وَطْئًا وَأَقْوَمُ قِيلًا
ख़ूब (नफ्स का) पामाल करना और बहुत ठिकाने से ज़िक्र का वक्त है
7إِنَّ لَكَ فِي النَّهَارِ سَبْحًا طَوِيلًا
दिन को तो तुम्हारे बहुत बड़े बड़े अशग़ाल हैं
8وَاذْكُرِ اسْمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّلْ إِلَيْهِ تَبْتِيلًا
तो तुम अपने परवरदिगार के नाम का ज़िक्र करो और सबसे टूट कर उसी के हो रहो
9رَّبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ فَاتَّخِذْهُ وَكِيلًا
(वही) मशरिक और मग़रिब का मालिक है उसके सिवा कोई माबूद नहीं तो तुम उसी को कारसाज़ बनाओ
अल-मुज्जम्मिलकुरान सूची
20आयत
मक्कीRevelation
7आयत

अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 7

सूरा अल-मुज्जम्मिल आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : दिन को तो तुम्हारे बहुत बड़े बड़े अशग़ाल हैं

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Tuesday, August 18, 2026

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