अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- نُطْعِمُ الْمِسْكِينَ – मिस्कीन (ग़रीब) को खाना खिलाना, उसकी मदद करना।
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों की ज़ुबानी है जो जहन्नम में डाले जा चुके हैं। जब वे पूछे जाते हैं कि आख़िर किस चीज़ ने तुम्हें जहन्नम में डाला, तो वे अपने उन कर्मों का इज़हार करते हैं जो उन्हें इस अंजाम तक ले गए। उनमें से एक बड़ा क़ुसूर (कमी) यह था कि वे अल्लाह की दी हुई नेमतों में से ग़रीबों और मिस्कीनों का हक़ अदा नहीं करते थे। वे न तो खुद मिस्कीन को खाना खिलाते थे और न ही दूसरों को इस पर उभारते थे।
यह आयत हमें सिखाती है कि इबादत सिर्फ़ नमाज़ और रोज़े तक महदूद नहीं है, बल्कि अल्लाह की मख़लूक़ (सृष्टि) के साथ हुस्ने-सुलूक (अच्छा व्यवहार) और ग़रीबों की मदद करना भी ईमान का हिस्सा है। जिस समाज में ग़रीबों का ख़याल नहीं रखा जाता, वह समाज अल्लाह की रहमत से महरूम हो जाता है।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने आस-पास के ज़रूरतमंदों पर ध्यान देना चाहिए। एक मुसलमान वही है जो दूसरों की भूख का एहसास करे और अपनी नेमतों में से उनका हिस्सा निकाले। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "वह मुसलमान कामिल नहीं जो पेट भरकर सोए और उसका पड़ोसी भूखा हो।"
अल्लाह हमें तौफ़ीक़ दे कि हम अपने माल में ग़रीबों और मिस्कीनों का हक़ अदा करें, और उस दिन की शर्मिंदगी से बचें जब ये सवालात किए जाएंगे। आमीन।
📜 आयत 42-46 — अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 44
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और न मोहताजों को खाना खिलाते थेसूरा आयत 44/56 — अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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