अल-मुद्दस्सिर · 48/56
अनुवाद उच्चारण — अल-मुद्दस्सिर
فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَاعَةُ الشَّافِعِينَ ۝٤٨
Famaa tanfa`uhum shafaa`atush shaafi`een
📖 हिंदी अर्थ
तो (उस वक्त) उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश कुछ काम न आएगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • شَفَاعَةُ — सिफ़ारिश, वसीला, मध्यस्थता
  • الشَّافِعِينَ — सिफ़ारिश करने वाले (फ़रिश्ते, नबी और नेक लोग)

तफ़सीर:

यह आयत उस भयानक दिन का चित्रण करती है जब गुनाहगारों के लिए हर रास्ता बंद हो जाएगा। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि क़यामत के दिन उन काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों को शफ़ाअत करने वालों की शफ़ाअत कोई लाभ नहीं पहुँचाएगी — चाहे वे फ़रिश्ते हों, नबी हों या नेक लोग। क्योंकि शफ़ाअत का अधिकार केवल उन्हीं को मिलता है जिनके लिए अल्लाह ने अनुमति दी हो, और शफ़ाअत का लाभ केवल उन्हीं को मिलता है जिनसे अल्लाह राज़ी हो। जिन लोगों ने दुनिया में अल्लाह के दीन को झुठलाया और उसके हुक्मों की परवाह नहीं की, उनके लिए उस दिन कोई सिफ़ारिशी काम नहीं आएगा।

यह आयत हमें एक अत्यंत महत्वपूर्ण सबक़ सिखाती है — कि अल्लाह के यहाँ किसी की सिफ़ारिश या वसीला तभी काम आएगा जब इंसान की अपनी ज़िंदगी अल्लाह की रज़ा के अनुसार हो। जो लोग दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी में जीते हैं और उसके दीन को अपनाने से इनकार करते हैं, उनके लिए क़यामत के दिन कोई पूछ-गवाह नहीं होगी। इसलिए हमें चाहिए कि आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें, उसकी इबादत करें और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से हों जिनके लिए शफ़ाअत का सम्मान नसीब होगा, न कि उन लोगों में से जिन्हें शफ़ाअत से महरूम कर दिया जाएगा। यह आयत हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक रहमत भी — चेतावनी इसलिए कि हम ग़ाफ़िल न हों, और रहमत इसलिए कि अभी भी हमारे पास वक़्त है कि हम अपने रब की ओर लौटें और उसकी रहमत के हक़दार बनें।



📜 आयत 46-50 — अल-मुद्दस्सिर

46وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ الدِّينِ
और रोज़ जज़ा को झुठलाया करते थे (और यूँ ही रहे)
47حَتَّىٰ أَتَانَا الْيَقِينُ
यहाँ तक कि हमें मौत आ गयी
48فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَاعَةُ الشَّافِعِينَ
तो (उस वक्त) उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश कुछ काम न आएगी
49فَمَا لَهُمْ عَنِ التَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ
और उन्हें क्या हो गया है कि नसीहत से मुँह मोड़े हुए हैं
50كَأَنَّهُمْ حُمُرٌ مُّسْتَنفِرَةٌ
गोया वह वहशी गधे हैं
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अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 48

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Tuesday, August 18, 2026

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