अल-मुद्दस्सिर · 49/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
فَمَا لَهُمْ عَنِ التَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ ۝٤٩
Famaa lahum `anittazkirati mu`rideen
📖 हिंदी अर्थ
और उन्हें क्या हो गया है कि नसीहत से मुँह मोड़े हुए हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • التَّذْكِرَةِ: नसीहत और चेतावनी, यानी क़ुरआन करीम।
  • مُعْرِضِينَ: मुँह मोड़ने वाले, किनारा करने वाले।

तफ़सीर:

इन मुशरिकों को क्या हो गया है कि वे क़ुरआन की नसीहत और चेतावनी से मुँह मोड़ रहे हैं? यह कैसी अजीब बात है कि जब उनके पास सबसे बेहतरीन नसीहत आई है, जो उन्हें अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाने वाली है, तो वे उससे भाग रहे हैं।

यह उनकी हालत ऐसी है जैसे कोई जंगली गधा शेर के डर से इधर-उधर भागता है। वे सत्य को सुनने से कतराते हैं, क्योंकि सत्य उनकी मनमानियों और झूठे विश्वासों को तोड़ता है। वे जानते हैं कि यदि उन्होंने क़ुरआन को ध्यान से सुना, तो उनके दिल पिघल जाएँगे और उन्हें अपनी ग़लतियों का एहसास हो जाएगा, इसलिए वे दूर भागते हैं।

अल्लाह तआला यहाँ ताज्जुब के अंदाज़ में सवाल कर रहे हैं कि आख़िर उन्हें क्या हो गया है? क्या उनके पास कोई वजह है जो उन्हें नसीहत से दूर रखे? नहीं, कोई वजह नहीं। यह सिर्फ़ उनकी हठधर्मिता और अहंकार है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम क़ुरआन के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। क्या हम भी उन लोगों की तरह हैं जो क़ुरआन से मुँह मोड़ लेते हैं? या हम उन लोगों में से हैं जो क़ुरआन को खोलते हैं, पढ़ते हैं, समझते हैं और उस पर अमल करते हैं?

क़ुरआन वह किताब है जिसमें हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है। यह वह नसीहत है जो हमें जहन्नुम की आग से बचाकर जन्नत की राह दिखाती है। जो इसे अपनाएगा, वह कभी गुमराह नहीं होगा। अल्लाह हमें क़ुरआन से मुँह मोड़ने वालों में से न बनाए, बल्कि हमें उन लोगों में शामिल करे जो क़ुरआन को अपना साथी बनाते हैं, उस पर ग़ौर करते हैं और उसके अनुसार जीवन जीते हैं। आमीन।



📜 आयत 47-51 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

47حَتَّىٰ أَتَانَا الْيَقِينُ
यहाँ तक कि हमें मौत आ गयी
48فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَاعَةُ الشَّافِعِينَ
तो (उस वक्त) उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश कुछ काम न आएगी
49فَمَا لَهُمْ عَنِ التَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ
और उन्हें क्या हो गया है कि नसीहत से मुँह मोड़े हुए हैं
50كَأَنَّهُمْ حُمُرٌ مُّسْتَنفِرَةٌ
गोया वह वहशी गधे हैं
51فَرَّتْ مِن قَسْوَرَةٍ
कि येर से (दुम दबा कर) भागते हैं
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
49आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 49

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पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

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