अल-मुद्दस्सिर · 47/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
حَتَّىٰ أَتَانَا الْيَقِينُ ۝٤٧
Hattaaa ataanal yaqeen
📖 हिंदी अर्थ
यहाँ तक कि हमें मौत आ गयी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • حَتَّى = यहाँ तक कि
  • أَتَانَا = हमारे पास आ गया
  • الْيَقِينُ = निश्चित चीज़, अर्थात मृत्यु (क्योंकि मृत्यु एक ऐसी सच्चाई है जिसमें किसी को कोई संदेह नहीं होता)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन अपराधियों के कथन का अंतिम भाग है जो जहन्नम (नरक) में डाले जा चुके हैं। जब उनसे पूछा जाएगा कि तुम्हें जहन्नम में किस चीज़ ने डाला, तो वे जवाब देंगे: "हम नमाज़ नहीं पढ़ते थे, हम ग़रीबों को खाना नहीं खिलाते थे, हम बातिल (झूठ) में लगे रहते थे, और हम क़ियामत (प्रलय) के दिन को झुठलाते थे।" फिर वे कहेंगे: "हम इन्हीं ग़लतियों और बुराइयों में डूबे रहे, यहाँ तक कि हमारे पास यक़ीन (मृत्यु) आ गई।"

अर्थात, हम अपनी इन बुरी आदतों और कुकर्मों पर इसी तरह चलते रहे, और हमने कभी तौबा (पश्चाताप) नहीं किया, न ही हमने अपने अंजाम के बारे में सोचा। यहाँ तक कि अचानक मौत आ गई और हमें इस हालत में पकड़ लिया। मौत के बाद हमें कोई मौका नहीं मिला कि हम अपने किए पर पछताएँ और सुधार करें। यही उनका सबसे बड़ा अफ़सोस और पछतावा है — कि मौत आने से पहले उन्होंने सच्चाई को नहीं पहचाना और न ही अल्लाह की इबादत की।

दावत (आमंत्रण) का पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है — कि मौत एक ऐसी सच्चाई है जिससे कोई बच नहीं सकता। इसे "यक़ीन" कहा गया है क्योंकि यह उतनी ही निश्चित है जितनी कोई और चीज़ नहीं। अगर हमें अपने जीवन से सच्चा प्यार है, तो हमें चाहिए कि मौत आने से पहले ही अपने अमल (कर्म) सुधार लें। नमाज़ पढ़ें, अल्लाह की इबादत करें, लोगों की मदद करें, और क़ियामत के दिन पर ईमान रखें। क्योंकि जब मौत आ जाएगी, तो दोबारा लौटने का कोई मौका नहीं मिलेगा। यही वह समय है जब हम अपने भविष्य को सुंदर बना सकते हैं — आज का हर अच्छा काम कल हमारे लिए रोशनी बनेगा, और आज की हर ग़लती कल हमारे लिए अंधेरा। अल्लाह हमें सच्ची समझ दे और हमें अच्छे अमल करने की तौफ़ीक़ (शक्ति) प्रदान करे। आमीन।



📜 आयत 45-49 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

45وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ الْخَائِضِينَ
और अहले बातिल के साथ हम भी बड़े काम में घुस पड़ते थे
46وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ الدِّينِ
और रोज़ जज़ा को झुठलाया करते थे (और यूँ ही रहे)
47حَتَّىٰ أَتَانَا الْيَقِينُ
यहाँ तक कि हमें मौत आ गयी
48فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَاعَةُ الشَّافِعِينَ
तो (उस वक्त) उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश कुछ काम न आएगी
49فَمَا لَهُمْ عَنِ التَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ
और उन्हें क्या हो गया है कि नसीहत से मुँह मोड़े हुए हैं
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47आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 47

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सूरा आयत 47/56 — सूरा अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुद्दस्सिर सुनें, सूरा अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, सूरा अल-मुद्दस्सिर mp3, सूरा अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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