Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَكَذَّبَ: झुठलाया, असत्य कहा, इनकार किया।
- وَعَصَىٰ: और अवज्ञा की, आज्ञा का उल्लंघन किया।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें फ़िरऔन (फ़िरौन) के उस घमंड और सरकशी के उस दृश्य से रूबरू कराती है, जब अल्लाह तआला ने अपने नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) को बड़ी निशानियाँ — लाठी का साँप बन जाना और हाथ का चमकना — देकर फ़िरऔन के पास भेजा। ये निशानियाँ साफ़ और स्पष्ट थीं, जो किसी भी समझदार इंसान के लिए यह साबित करने के लिए काफ़ी थीं कि मूसा (अलैहिस्सलाम) सच्चे नबी हैं और उनका पैग़ाम अल्लाह की तरफ़ से है।
लेकिन फ़िरऔन ने उन निशानियों को देखकर भी उन्हें झुठलाया और उन्हें जादू करार दिया। उसने अपनी आँखों से सच्चाई देखी, फिर भी उसे मानने से इनकार कर दिया। यह उसकी हठधर्मिता और अहंकार की पराकाष्ठा थी। उसने न केवल मूसा (अलैहिस्सलाम) की दावत को झुठलाया, बल्कि अपने रब की आज्ञा का भी उल्लंघन किया। उसने अल्लाह की स्पष्ट निशानी देखने के बाद भी उसकी अवज्ञा की और अपनी सरकशी पर अड़ा रहा।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को देखने के बाद भी उसे न मानना, और हठधर्मी पर अड़े रहना, इंसान को किस कदर गुमराही में डाल सकता है। फ़िरऔन के पास सबूत थे, दलीलें थीं, निशानियाँ थीं, लेकिन उसके दिल पर अहंकार और दुनिया की मोहब्बत ने ऐसा ज़ंग लगा दिया था कि वह सच्चाई को देखकर भी उसे क़बूल नहीं कर सका।
इससे हमें सबक़ लेना चाहिए कि जब हमारे पास सच्चाई आए, तो हमें उसे खुले दिल से क़बूल करना चाहिए। हमें अपने अहंकार, अपनी ज़िद और अपनी दुनियावी ख्वाहिशों को सच्चाई के आगे झुका देना चाहिए। अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल और समझ दी है, और हमारे पास क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी है — यह सबसे बड़ी निशानी है। जो इसे मान लेता है, वह कामयाब हो जाता है; और जो इसे ठुकरा देता है, वह फ़िरऔन की राह पर चलता है, जिसका अंजाम हमेशा बर्बादी है।
अल्लाह तआला हमें सच्चाई को क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे और हमें फ़िरऔन जैसी ज़िद और सरकशी से बचाए। आमीन।
📜 आयत 19-23 — सूरा अन-नाज़ियात
अनुवाद — अन-नाज़ियात 21
सूरा अन-नाज़ियात आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उसने झुठला दिया और न मानासूरा आयत 21/46 — सूरा अन-नाज़ियात النازعات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नाज़ियात सुनें, सूरा अन-नाज़ियात अनुवाद, सूरा अन-नाज़ियात mp3, सूरा अन-नाज़ियात pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अन-नाज़ियात
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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