अल-अनफाल · 18/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
ذَٰلِكُمْ وَأَنَّ اللَّهَ مُوهِنُ كَيْدِ الْكَافِرِينَ ۝١٨
Zaalikum wa annal laaha moohinu kaidil kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
ये तो ये ख़ुदा तो काफिरों की मक्कारी का कमज़ोर कर देने वाला है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُوهِنُ: कमज़ोर करने वाला, नष्ट करने वाला।
  • كَيْدِ: चाल, मक्कारी, साज़िश।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वही बात है जिसका उल्लेख पिछली आयतों में किया गया था—अर्थात बद्र के मैदान में अल्लाह ने मुशरिकीन (बहुदेववादियों) को मारा और तुम्हारे हाथों उन्हें पराजित किया, और जब वे भाग खड़े हुए तो तुमने उन्हें देखा। यह सब अल्लाह की ओर से था, और यह ईमानवालों के लिए एक अच्छी परीक्षा और स्पष्ट विजय थी। यह इसलिए हुआ ताकि तुम जान लो कि अल्लाह काफ़िरों की सारी चालों और साज़िशों को कमज़ोर कर देने वाला है। वह उनके मक्कारी के हर जाल को तोड़ देता है, चाहे वे कितनी भी ताकत और योजना क्यों न बनाएँ। अल्लाह उनके किसी भी कुटिल प्रयास को कामयाब नहीं होने देता, बल्कि उसे उल्टा कर देता है और उन्हें अपमानित करता है, जब तक कि वे सत्य के आगे झुक न जाएँ या नष्ट न हो जाएँ। यह अल्लाह का वादा है जो हर युग में सच्चा रहता है—काफ़िरों की साज़िशें हमेशा नाकाम होती हैं और ईमानवालों को अंततः विजय मिलती है।

फ़ायदे (लाभ और सबक):

  1. यह आयत मुसलमानों को यह विश्वास दिलाती है कि अल्लाह उनके दुश्मनों की हर चाल को नाकाम करने की ज़िम्मेदारी लेता है, बशर्ते वे सच्चे ईमान और अच्छे अमल पर क़ायम रहें।
  2. यह सिखाती है कि विजय केवल ताकत और हथियारों से नहीं, बल्कि अल्लाह की मदद से मिलती है—जो उस पर भरोसा करता है, उसे कभी निराश नहीं होना पड़ता।
  3. यह आयत मुसलमानों को धैर्य और सब्र की तालीम देती है, क्योंकि दुश्मन की साज़िशें भले ही कुछ समय के लिए सफल दिखें, लेकिन अल्लाह का फैसला हमेशा सच्चाई के पक्ष में होता है।
  4. यह हमें याद दिलाती है कि अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है जब वे उसकी राह में क़ुर्बानी देते हैं—जैसे बद्र के दिन सहाबा ने दी थी—और यह मदद उनके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतरी का ज़रिया बनती है।
  5. यह आयत इस्लाम की सच्चाई का सबूत है कि अल्लाह का दीन हमेशा बुलंद रहेगा, चाहे दुश्मन कितनी भी कोशिशें कर लें—यह बात हर मुसलमान के दिल में उम्मीद और हिम्मत पैदा करती है।


📜 आयत 16-20 — सूरा अल-अनफाल

16وَمَن يُوَلِّهِمْ يَوْمَئِذٍ دُبُرَهُ إِلَّا مُتَحَرِّفًا لِّقِتَالٍ أَوْ مُتَحَيِّزًا إِلَىٰ فِئَةٍ فَقَدْ بَاءَ بِغَضَبٍ مِّنَ اللَّهِ وَمَأْوَاهُ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
(याद रहे कि) उस शख़्स के सिवा जो लड़ाई वास्ते कतराए या किसी जमाअत के पास (जाकर) मौके पाए (और) जो शख़्स भी उस दिन उन कुफ्फ़ार की तरफ पीठ फेरेगा वह यक़ीनी (हिर फिर के) ख़ुदा के ग़जब में आ गया और उसका ठिकाना जहन्नुम ही हैं और वह क्या बुरा ठिकाना है
17فَلَمْ تَقْتُلُوهُمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ قَتَلَهُمْ ۚ وَمَا رَمَيْتَ إِذْ رَمَيْتَ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ رَمَىٰ ۚ وَلِيُبْلِيَ الْمُؤْمِنِينَ مِنْهُ بَلَاءً حَسَنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
और (मुसलमानों) उन कुफ्फ़ार को कुछ तुमने तो क़त्ल किया नही बल्कि उनको तो ख़ुदा ने क़त्ल किया और (ऐ रसूल) जब तुमने तीर मारा तो कुछ तुमने नही मारा बल्कि ख़ुदा ख़ुदा ने तीर मारा और ताकि अपनी तरफ से मोमिनीन पर खूब एहसान करे बेशक ख़ुदा (सबकी) सुनता और (सब कुछ) जानता है
18ذَٰلِكُمْ وَأَنَّ اللَّهَ مُوهِنُ كَيْدِ الْكَافِرِينَ
ये तो ये ख़ुदा तो काफिरों की मक्कारी का कमज़ोर कर देने वाला है
19إِن تَسْتَفْتِحُوا فَقَدْ جَاءَكُمُ الْفَتْحُ ۖ وَإِن تَنتَهُوا فَهُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۖ وَإِن تَعُودُوا نَعُدْ وَلَن تُغْنِيَ عَنكُمْ فِئَتُكُمْ شَيْئًا وَلَوْ كَثُرَتْ وَأَنَّ اللَّهَ مَعَ الْمُؤْمِنِينَ
(काफ़िर) अगर तुम ये चाहते हो (कि जो हक़ पर हो उसकी) फ़तेह हो (मुसलमानों की) फ़तेह भी तुम्हारे सामने आ मौजूद हुई अब क्या गुरूर बाक़ी है और अगर तुम (अब भी मुख़तलिफ़ इस्लाम) से बाज़ रहो तो तुम्हारे वास्ते बेहतर है और अगर कहीं तुम पलट पड़े तो (याद रहे) हम भी पलट पड़ेगें (और तुम्हें तबाह कर छोड़ देगें) और तुम्हारी जमाअत अगरचे बहुत ज्यादा भी हो हरगिज़ कुछ काम न आएगी और ख़ुदा तो यक़ीनी मामिनीन के साथ है
20يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَلَا تَوَلَّوْا عَنْهُ وَأَنتُمْ تَسْمَعُونَ
(ऐ ईमानदारों खुदा और उसके रसूल की इताअत करो और उससे मुँह न मोड़ो जब तुम समझ रहे हो
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 18

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Monday, September 28, 2026

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