अल-अनफाल · 19/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
إِن تَسْتَفْتِحُوا فَقَدْ جَاءَكُمُ الْفَتْحُ ۖ وَإِن تَنتَهُوا فَهُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۖ وَإِن تَعُودُوا نَعُدْ وَلَن تُغْنِيَ عَنكُمْ فِئَتُكُمْ شَيْئًا وَلَوْ كَثُرَتْ وَأَنَّ اللَّهَ مَعَ الْمُؤْمِنِينَ ۝١٩
In tastaftihoo faqad jaaa`akumul fathu wa in tantahoo fahuwa khairul lakum wa in ta`oodoo na`ud wa lan tughniya `ankum fi`atukum shai`anw wa law kasurat wa annal laaha ma`al mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
(काफ़िर) अगर तुम ये चाहते हो (कि जो हक़ पर हो उसकी) फ़तेह हो (मुसलमानों की) फ़तेह भी तुम्हारे सामने आ मौजूद हुई अब क्या गुरूर बाक़ी है और अगर तुम (अब भी मुख़तलिफ़ इस्लाम) से बाज़ रहो तो तुम्हारे वास्ते बेहतर है और अगर कहीं तुम पलट पड़े तो (याद रहे) हम भी पलट पड़ेगें (और तुम्हें तबाह कर छोड़ देगें) और तुम्हारी जमाअत अगरचे बहुत ज्यादा भी हो हरगिज़ कुछ काम न आएगी और ख़ुदा तो यक़ीनी मामिनीन के साथ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَسْتَفْتِحُوا: नस्र (मदद) माँगना, फ़ैसला चाहना।
  • الْفَتْحُ: नस्र और विजय।
  • تَنْتَهُوا: बाज़ आ जाओ (कुफ़्र और जंग से)।
  • فِئَتُكُمْ: तुम्हारा गिरोह, तुम्हारी जमात।
  • أَغْنَتْ: किसी काम आना, बचाव करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ कुफ़्फ़ार! जब तुम मक्का से निकलते वक़्त काबा के पर्दे पकड़कर दुआ कर रहे थे कि "ऐ अल्लाह! इन दो गिरोहों में से जो सबसे ज़्यादा सच्चा, सबसे अच्छा और सबसे पसंदीदा हो उसे नस्र दे" — तो अल्लाह ने तुम्हारी ये दुआ क़ुबूल कर ली, और तुम्हारे इसी फ़ैसले के नतीजे में बद्र के मैदान में वो कुछ हुआ जो तुम्हारे लिए 'इबरत (नसीहत) बन गया। अल्लाह ने अपने नबी ﷺ और मोमिनीन को नस्र दी, और तुम्हें ज़िल्लत और रुसवाई का सामना करना पड़ा। ये तुम्हारे लिए अज़ाब और मुत्तक़ियों के लिए सबक़ बन गया।

अब अगर तुम इस जंग और कुफ़्र से बाज़ आ जाओ, और ईमान ले आओ, तो यही तुम्हारे लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतर है। अल्लाह तुम्हें मोहलत दे रहा है, और तौबा का दरवाज़ा खुला है। लेकिन अगर तुम दोबारा रसूलुल्लाह ﷺ और मोमिनीन से जंग करने लौटे, तो हम भी दोबारा तुम्हें वैसी ही शिकस्त देंगे जैसी बद्र में दी थी। याद रखो! तुम्हारी जमात, तुम्हारी तादाद, तुम्हारे हथियार — चाहे कितने ही ज़्यादा हों, वो तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकते। बद्र में तुम्हारी तादाद हज़ारों में थी, और मुसलमान सिर्फ़ 313 थे, फिर भी अल्लाह ने अपने नबी को नस्र दी। क्योंकि अल्लाह हमेशा मोमिनीन के साथ होता है — उनकी मदद करता है, उन्हें ताक़त देता है, और जिसके साथ अल्लाह हो, उसे कोई हरा नहीं सकता।

ये आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि ताक़त और तादाद पर भरोसा नहीं, बल्कि अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। जब अल्लाह किसी के साथ होता है, तो कम तादाद भी बड़ी से बड़ी फ़ौज को शिकस्त दे सकती है। और ये भी सबक़ है कि अल्लाह की नसीहत को क़बूल कर लेना चाहिए, क्योंकि हिदायत और ईमान ही असली कामयाबी है।



📜 आयत 17-21 — अल-अनफाल

17فَلَمْ تَقْتُلُوهُمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ قَتَلَهُمْ ۚ وَمَا رَمَيْتَ إِذْ رَمَيْتَ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ رَمَىٰ ۚ وَلِيُبْلِيَ الْمُؤْمِنِينَ مِنْهُ بَلَاءً حَسَنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
और (मुसलमानों) उन कुफ्फ़ार को कुछ तुमने तो क़त्ल किया नही बल्कि उनको तो ख़ुदा ने क़त्ल किया और (ऐ रसूल) जब तुमने तीर मारा तो कुछ तुमने नही मारा बल्कि ख़ुदा ख़ुदा ने तीर मारा और ताकि अपनी तरफ से मोमिनीन पर खूब एहसान करे बेशक ख़ुदा (सबकी) सुनता और (सब कुछ) जानता है
18ذَٰلِكُمْ وَأَنَّ اللَّهَ مُوهِنُ كَيْدِ الْكَافِرِينَ
ये तो ये ख़ुदा तो काफिरों की मक्कारी का कमज़ोर कर देने वाला है
19إِن تَسْتَفْتِحُوا فَقَدْ جَاءَكُمُ الْفَتْحُ ۖ وَإِن تَنتَهُوا فَهُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۖ وَإِن تَعُودُوا نَعُدْ وَلَن تُغْنِيَ عَنكُمْ فِئَتُكُمْ شَيْئًا وَلَوْ كَثُرَتْ وَأَنَّ اللَّهَ مَعَ الْمُؤْمِنِينَ
(काफ़िर) अगर तुम ये चाहते हो (कि जो हक़ पर हो उसकी) फ़तेह हो (मुसलमानों की) फ़तेह भी तुम्हारे सामने आ मौजूद हुई अब क्या गुरूर बाक़ी है और अगर तुम (अब भी मुख़तलिफ़ इस्लाम) से बाज़ रहो तो तुम्हारे वास्ते बेहतर है और अगर कहीं तुम पलट पड़े तो (याद रहे) हम भी पलट पड़ेगें (और तुम्हें तबाह कर छोड़ देगें) और तुम्हारी जमाअत अगरचे बहुत ज्यादा भी हो हरगिज़ कुछ काम न आएगी और ख़ुदा तो यक़ीनी मामिनीन के साथ है
20يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَلَا تَوَلَّوْا عَنْهُ وَأَنتُمْ تَسْمَعُونَ
(ऐ ईमानदारों खुदा और उसके रसूल की इताअत करो और उससे मुँह न मोड़ो जब तुम समझ रहे हो
21وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ قَالُوا سَمِعْنَا وَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ
और उन लोगों के ऐसे न हो जाओं जो (मुँह से तो) कहते थे कि हम सुन रहे हैं हालाकि वह सुनते (सुनाते ख़ाक) न थे
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
19आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 19

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Tuesday, August 18, 2026

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