अल-अनफाल · 8/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
لِيُحِقَّ الْحَقَّ وَيُبْطِلَ الْبَاطِلَ وَلَوْ كَرِهَ الْمُجْرِمُونَ ۝٨
Liyuhiqqal haqqa wa tubtilal baatila wa law karihal mujrimoon
📖 हिंदी अर्थ
ताकि हक़ को (हक़) साबित कर दे और बातिल का मटियामेट कर दे अगर चे गुनाहगार (कुफ्फार उससे) नाखुश ही क्यों न हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِيُحِقَّ الْحَقَّ: सत्य (इस्लाम) को स्थापित और प्रकट करने के लिए।
  • وَيُبْطِلَ الْبَاطِلَ: असत्य (शिर्क और कुफ्र) को मिटाने और नष्ट करने के लिए।
  • وَلَوْ كَرِهَ الْمُجْرِمُونَ: चाहे अपराधी (मुशरिकीन) इसे कितना ही नापसंद करें।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने बद्र के युद्ध में मुसलमानों को विजय प्रदान की और यह सब कुछ एक महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए था। वह उद्देश्य यह था कि अल्लाह सत्य (इस्लाम) को स्थापित करे और उसे शक्ति और प्रभुत्व प्रदान करे, ताकि उसकी सच्चाई स्पष्ट हो जाए और लोगों के सामने उसके सच्चे होने के प्रमाण प्रकट हो जाएँ। साथ ही, वह असत्य (शिर्क और कुफ्र) को जड़ से मिटा दे और उसकी बुनियादों को कमज़ोर कर दे, ताकि उसका झूठा होना साबित हो जाए। यह सब कुछ उस समय हुआ जब अपराधी (मुशरिकीन) इसे अत्यंत नापसंद कर रहे थे और वे चाहते थे कि सत्य दबा रहे और असत्य सिर उठाए। लेकिन अल्लाह की इच्छा सर्वोपरि है, और उसने अपने वचन को सच कर दिखाया, चाहे मुजरिमों को यह कितना ही बुरा क्यों न लगे। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है कि वह सत्य को ऊपर उठाता है और असत्य को नीचे गिराता है, भले ही लोग इसे पसंद करें या नापसंद।

फ़ायदे:

  1. यह आयत मुसलमानों को यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह हमेशा सत्य का साथ देता है और असत्य को मिटाने वाला है, चाहे हालात कैसे भी हों। इससे मोमिन के दिल में अल्लाह पर भरोसा और साहस पैदा होता है।
  2. यह सिखाती है कि किसी काम की कामयाबी का पैमाना लोगों की पसंद-नापसंद नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसकी मर्ज़ी है। इसलिए हमें हक़ (सत्य) पर डटे रहना चाहिए, भले ही दुनिया उसके खिलाफ हो।
  3. आयत में इस बात की खुशखबरी है कि इस्लाम का दीन हमेशा बुलंद रहेगा और कुफ्र व शिर्क का अंधेरा मिटता रहेगा, जो मुसलमानों के लिए एक बड़ी उम्मीद और हौसले की वजह है।
  4. यह भी सबक देती है कि अल्लाह की मदद उन्हीं को मिलती है जो हक़ पर क़ायम रहते हैं और बातिल से दूर रहते हैं, इसलिए हमें अपने जीवन में सच्चाई और नेकी को अपनाना चाहिए।


📜 आयत 6-10 — सूरा अल-अनफाल

6يُجَادِلُونَكَ فِي الْحَقِّ بَعْدَمَا تَبَيَّنَ كَأَنَّمَا يُسَاقُونَ إِلَى الْمَوْتِ وَهُمْ يَنظُرُونَ
कि वह लोग हक़ के ज़ाहिर होने के बाद भी तुमसे (ख्वाह माख्वाह) सच्ची बात में झगड़तें थें और इस तरह (करने लगे) गोया (ज़बरदस्ती) मौत के मुँह में ढकेले जा रहे हैं
7وَإِذْ يَعِدُكُمُ اللَّهُ إِحْدَى الطَّائِفَتَيْنِ أَنَّهَا لَكُمْ وَتَوَدُّونَ أَنَّ غَيْرَ ذَاتِ الشَّوْكَةِ تَكُونُ لَكُمْ وَيُرِيدُ اللَّهُ أَن يُحِقَّ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِهِ وَيَقْطَعَ دَابِرَ الْكَافِرِينَ
और उसे (अपनी ऑंखों से) देख रहे हैं और (ये वक्त था) जब ख़ुदा तुमसे वायदा कर रहा था कि (कुफ्फार मक्का) दो जमाअतों में से एक तुम्हारे लिए ज़रूरी हैं और तुम ये चाहते थे कि कमज़ोर जमाअत तुम्हारे हाथ लगे (ताकि बग़ैर लड़े भिड़े माले ग़नीमत हाथ आ जाए) और ख़ुदा ये चाहता था कि अपनी बातों से हक़ को साबित (क़दम) करें और काफिरों की जड़ काट डाले
8لِيُحِقَّ الْحَقَّ وَيُبْطِلَ الْبَاطِلَ وَلَوْ كَرِهَ الْمُجْرِمُونَ
ताकि हक़ को (हक़) साबित कर दे और बातिल का मटियामेट कर दे अगर चे गुनाहगार (कुफ्फार उससे) नाखुश ही क्यों न हो
9إِذْ تَسْتَغِيثُونَ رَبَّكُمْ فَاسْتَجَابَ لَكُمْ أَنِّي مُمِدُّكُم بِأَلْفٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُرْدِفِينَ
(ये वह वक्त था) जब तुम अपने परवदिगार से फरियाद कर रहे थे उसने तुम्हारी सुन ली और जवाब दे दिया कि मैं तुम्हारी लगातार हज़ार फ़रिश्तों से मदद करूँगा
10وَمَا جَعَلَهُ اللَّهُ إِلَّا بُشْرَىٰ وَلِتَطْمَئِنَّ بِهِ قُلُوبُكُمْ ۚ وَمَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِندِ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और (ये इमदाद ग़ैबी) ख़ुदा ने सिर्फ तुम्हारी ख़ातिर (खुशी) के लिए की थी और तुम्हारे दिल मुतमइन हो जाएं और (याद रखो) मदद ख़ुदा के सिवा और कहीं से (कभी) नहीं होती बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 8

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Tuesday, September 29, 2026

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