अल-मुतफ्फिफीन · 36/36
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुतफ्फिफीन
هَلْ ثُوِّبَ الْكُفَّارُ مَا كَانُوا يَفْعَلُونَ ۝٣٦
Hal suwwibal kuffaaru maa kaanoo yaf`aloon
📖 हिंदी अर्थ
कि अब तो काफ़िरों को उनके किए का पूरा पूरा बदला मिल गया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثُوِّبَ (सवाब दिया गया): अर्थात बदला दिया गया, प्रतिफल दिया गया।
  • الْكُفَّارُ (काफिर): जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल को नकारा और सत्य को झुठलाया।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान दृश्य की ओर संकेत करती है जो क़ियामत के दिन घटित होगा, जब ईमानवाले मोमिनीन अपने शानदार तख्तों (सोफों) पर बैठे होंगे और अल्लाह तआला की ओर देख रहे होंगे — यह उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और सबसे उत्तम इनाम होगा। इसी के साथ वे काफिरों की ओर देखेंगे और उनके उस बुरे हाल पर ग़ौर करेंगे जो उन्हें मिला होगा।

तो क्या काफिरों को उनके उन कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिल गया जो वे दुनिया में किया करते थे? उन्होंने ईमानवालों का मज़ाक उड़ाया, उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की, और सत्य का इनकार किया — तो क्या उन्हें इसका पूरा बदला नहीं मिला? हाँ, बिल्कुल मिला! उन्हें जहन्नुम की जलती हुई आग और रुसवाई भरा अज़ाब दिया गया, जो उनके कुकर्मों का सटीक और न्यायपूर्ण प्रतिफल था।

यह आयत हमें यह सिखाती है कि अल्लाह तआला की न्याय व्यवस्था अत्यंत परिपूर्ण है। कोई भी अच्छा या बुरा कर्म बेकार नहीं जाता। जिसने भी दुनिया में अल्लाह के बंदों को सताया, उनका मज़ाक उड़ाया, या सत्य का विरोध किया — उसे उसका पूरा बदला मिलकर रहेगा। और जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, उनके लिए ऐसा इनाम है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती — सबसे बड़ा इनाम तो अल्लाह तआला का दीदार (दर्शन) होगा, जो जन्नत की सबसे उत्तम नेमत है।

इस आयत में मोमिनीन के लिए खुशखबरी है कि उनका अंजाम सबसे अच्छा होगा, और काफिरों के लिए चेतावनी है कि उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाह तआला किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर किसी को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देता है। यह हमारे लिए सबक है कि हम अपने जीवन में सत्य और नेकी का रास्ता अपनाएँ, क्योंकि आख़िरकार हमें अपने कर्मों का फल अवश्य मिलेगा।



📜 आयत 34-36 — सूरा अल-मुतफ्फिफीन

34فَالْيَوْمَ الَّذِينَ آمَنُوا مِنَ الْكُفَّارِ يَضْحَكُونَ
तो आज (क़यामत में) ईमानदार लोग काफ़िरों से हँसी करेंगे
35عَلَى الْأَرَائِكِ يَنظُرُونَ
(और) तख्तों पर बैठे नज़ारे करेंगे
36هَلْ ثُوِّبَ الْكُفَّارُ مَا كَانُوا يَفْعَلُونَ
कि अब तो काफ़िरों को उनके किए का पूरा पूरा बदला मिल गया
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अनुवाद — अल-मुतफ्फिफीन 36

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Monday, September 28, 2026

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