Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بَلِ: बल्कि, वास्तव में (यहाँ पूर्वोक्त को छोड़कर नई बात पर ज़ोर देने के लिए है)
- الَّذِينَ كَفَرُوا: जिन्होंने कुफ़्र किया, अर्थात जिन्होंने अल्लाह की नीमतों को ढाँका और उसके हुक्म को नकारा
- يُكَذِّبُونَ: झुठलाते हैं, अस्वीकार करते हैं
विस्तृत तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए और काफ़िरों की हालत बयान करते हुए फ़रमाते हैं कि इन काफ़िरों का हाल यह है कि ये सच्चाई को जानते हुए भी उसे झुठलाते हैं। इनके पास जब सच्चाई आती है, जब क़ुरआन पढ़ा जाता है, जब नबी ﷺ साफ़-साफ़ दलीलें पेश करते हैं, तो भी ये लोग अपनी हठधर्मी और अहंकार की वजह से उसे मानने से इनकार कर देते हैं।
यह कोई अज्ञानता की वजह से नहीं, बल्कि सरकशी और ज़िद की वजह से है। इनके दिलों में सच्चाई की गवाही मौजूद होती है, लेकिन ये उसे दबा देते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग जो कुछ अपने सीनों में छिपाते हैं — चाहे वह दुश्मनी हो, ईर्ष्या हो या हठ — अल्लाह उसे खूब जानता है। कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है।
इस आयत में एक बड़ी दिलचस्प बात यह है कि अल्लाह तआला ने काफ़िरों के इस झुठलाने को उनकी "आदत" और "स्वभाव" बताया है — यानी झुठलाना उनकी फ़ितरत बन चुका है। जब सच्चाई उनके सामने आती है, तो वे उसे झुठलाने में ही अपनी शान समझते हैं, जबकि असल शान तो सच्चाई को क़बूल करने में है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों! यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को क़बूल करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। जब दिल को यक़ीन हो जाए कि यही सच है, तो उसे मान लेना चाहिए। काफ़िरों का अंजाम यह है कि उनके लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार है, लेकिन जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, उनके लिए ऐसा अज्र है जो कभी ख़त्म नहीं होगा और जिसमें कोई कमी नहीं आएगी।
अल्लाह तआला हम सबको सच्चाई को क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे, और हमें उन लोगों में से बनाए जो ईमान लाते हैं, नेक अमल करते हैं और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनते हैं। आमीन।
📜 आयत 20-24 — सूरा अल-इनशिक़ाक
अनुवाद — अल-इनशिक़ाक 22
सूरा अल-इनशिक़ाक आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बल्कि काफ़िर लोग तो (और उसे) झुठलाते हैंसूरा आयत 22/25 — सूरा अल-इनशिक़ाक الإنشقاق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इनशिक़ाक सुनें, सूरा अल-इनशिक़ाक अनुवाद, सूरा अल-इनशिक़ाक mp3, सूरा अल-इनशिक़ाक pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-इनशिक़ाक
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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