अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قُرِئَ عَلَيْهِمُ الْقُرْآنُ: उनके सामने क़ुरआन की तिलावत की जाए।
- لَا يَسْجُدُونَ: वे सजदा नहीं करते, यानी अल्लाह के आगे झुकते नहीं, नमाज़ नहीं पढ़ते, और न ही क़ुरआन की आयतों को सुनकर अल्लाह की बड़ाई का एतराफ़ करते हैं।
तफ़सीर:
जब उन लोगों के सामने क़ुरआन पढ़ा जाता है, जो ईमान से महरूम हैं, तो वे अल्लाह के आगे सजदा नहीं करते, न उसकी आयतों को क़बूल करते हैं, और न ही उन पर अमल करते हैं। यह उनकी सख़्ती और हठधर्मिता की निशानी है कि उनके पास हक़ की वाज़ेह दलीलें आ चुकी हैं, फिर भी वे उसे मानने से इनकार करते हैं। अगर वे दिल से सच्चे होते, तो क़ुरआन की आयतें सुनते ही उनके दिल नरम हो जाते और वे अल्लाह के आगे सजदे में झुक जाते। लेकिन उनका अंदाज़ यह है कि वे सुनते हैं, फिर भी अकड़ते हैं और सजदे से इनकार करते हैं। यह उनके कुफ्र और हक़ से मुँह मोड़ने की सबसे बड़ी दलील है। अल्लाह उनके दिलों के हाल को खूब जानता है कि वे जानते हुए भी हक़ को नहीं मानते। उनके लिए दर्दनाक अज़ाब की ख़बर है। हालाँकि जो लोग ईमान लाए और अच्छे अमल किए, उनके लिए ऐसा अज्र है जो कभी ख़त्म नहीं होगा और न ही उसमें कोई कमी आएगी।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन सुनते ही हमारा दिल पिघल जाना चाहिए और हमें अपने रब के आगे सजदे में झुक जाना चाहिए। सजदा ईमान की निशानी है, अल्लाह से मुहब्बत का इज़हार है, और बंदे को उसके रब के सबसे क़रीब लाने वाला अमल है। जब क़ुरआन पढ़ा जाए, तो हमें सिर्फ़ सुनना ही नहीं, बल्कि उस पर अमल करना चाहिए और अल्लाह की बड़ाई के लिए सजदा करना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है, जहाँ का अज्र कभी ख़त्म नहीं होता। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो क़ुरआन सुनकर सजदा करते हैं और उस पर अमल करते हैं। आमीन।
📜 आयत 19-23 — अल-इनशिक़ाक
अनुवाद — अल-इनशिक़ाक 21
सूरा अल-इनशिक़ाक आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब उनके सामने क़ुरान पढ़ा जाता है तो (ख़ुदा…सूरा आयत 21/25 — अल-इनशिक़ाक الإنشقاق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इनशिक़ाक सुनें, अल-इनशिक़ाक अनुवाद, अल-इनशिक़ाक mp3, अल-इनशिक़ाक pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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