अत-तौबा · 75/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
۞ وَمِنْهُم مَّنْ عَاهَدَ اللَّهَ لَئِنْ آتَانَا مِن فَضْلِهِ لَنَصَّدَّقَنَّ وَلَنَكُونَنَّ مِنَ الصَّالِحِينَ ۝٧٥
Wa minhum man `aaha dal laaha la`in aataanaa min fadlihee lanas saddaqanna wa lanakoonanna minassaaliheen
📖 हिंदी अर्थ
और इन (मुनाफेक़ीन) में से बाज़ ऐसे भी हैं जो ख़ुदा से क़ौल क़रार कर चुके थे कि अगर हमें अपने फज़ल (व करम) से (कुछ माल) देगा तो हम ज़रूर ख़ैरात किया करेगें और नेकोकार बन्दे हो जाऎंगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَاهَدَ اللهَ: अल्लाह से वादा-अहद किया।
  • آتَانَا مِن فَضْلِهِ: हमें अपने अनुग्रह (दौलत) से दिया।
  • لَنَصَّدَّقَنَّ: हम अवश्य दान देंगे।
  • لَنَكُونَنَّ مِنَ الصَّالِحِينَ: हम अवश्य नेक लोगों में से होंगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला मुनाफ़िक़ीन (कपटियों) के एक और किरदार से पर्दा उठाता है। उनमें से कुछ लोग अल्लाह से वादा करते थे कि अगर अल्लाह हमें अपने फज़ल (दौलत) से नवाज़ेगा, तो हम ज़रूर ख़ैरात करेंगे, ग़रीबों और मोहताजों की मदद करेंगे, और नेक लोगों की तरह अच्छे काम करेंगे। उन्होंने अपनी ज़ुबान से यह अहद किया, लेकिन जब अल्लाह ने उन्हें माल और दौलत दी, तो वे अपने वादे से मुकर गए। उन्होंने न तो दान दिया और न ही नेक बनने की कोशिश की। यह उनकी कपटता और बुज़ुर्गी की निशानी है कि वे अल्लाह से वादा करके भी उसे तोड़ देते हैं। यह आयत उनके इसी रवैये की निंदा करती है और बताती है कि उनका वादा सिर्फ़ ज़ुबानी था, दिल से नहीं।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह से किया गया वादा अहम है, और उसे पूरा करना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है। वादा तोड़ना मुनाफ़िक़ी की निशानी है।
  2. दौलत अल्लाह की तरफ़ से एक अमानत है, और उसका सही इस्तेमाल (दान, ज़कात, नेक काम) ही असली कामयाबी है।
  3. इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह से वादा करते वक़्त सच्चा हो, और जब अल्लाह उसे नवाज़े, तो अपने वादे पर क़ायम रहे, ताकि वह नेक लोगों में शामिल हो सके।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि माल की मोहब्बत इंसान को वादा तोड़ने पर मजबूर कर सकती है, इसलिए हमें दौलत को अल्लाह की राह में ख़र्च करने की आदत डालनी चाहिए, ताकि हमारा दिल साफ़ रहे और हम मुनाफ़िक़ी से बचे रहें।
🎧 सुनें

📜 आयत 73-77 — अत-तौबा

73يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ جَاهِدِ الْكُفَّارَ وَالْمُنَافِقِينَ وَاغْلُظْ عَلَيْهِمْ ۚ وَمَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
ऐ रसूल कुफ्फ़ार के साथ (तलवार से) और मुनाफिकों के साथ (ज़बान से) जिहाद करो और उन पर सख्ती करो और उनका ठिकाना तो जहन्नुम ही है और वह (क्या) बुरी जगह है
74يَحْلِفُونَ بِاللَّهِ مَا قَالُوا وَلَقَدْ قَالُوا كَلِمَةَ الْكُفْرِ وَكَفَرُوا بَعْدَ إِسْلَامِهِمْ وَهَمُّوا بِمَا لَمْ يَنَالُوا ۚ وَمَا نَقَمُوا إِلَّا أَنْ أَغْنَاهُمُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ مِن فَضْلِهِ ۚ فَإِن يَتُوبُوا يَكُ خَيْرًا لَّهُمْ ۖ وَإِن يَتَوَلَّوْا يُعَذِّبْهُمُ اللَّهُ عَذَابًا أَلِيمًا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۚ وَمَا لَهُمْ فِي الْأَرْضِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
ये मुनाफेक़ीन ख़ुदा की क़समें खाते है कि (कोई बुरी बात) नहीं कही हालॉकि उन लोगों ने कुफ़्र का कलमा ज़रूर कहा और अपने इस्लाम के बाद काफिर हो गए और जिस बात पर क़ाबू न पा सके उसे ठान बैठे और उन लोगें ने (मुसलमानों से) सिर्फ इस वजह से अदावत की कि अपने फज़ल व करम से ख़ुदा और उसके रसूल ने दौलत मन्द बना दिया है तो उनके लिए उसमें ख़ैर है कि ये लोग अब भी तौबा कर लें और अगर ये न मानेगें तो ख़ुदा उन पर दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब नाज़िल फरमाएगा और तमाम दुनिया में उन का न कोई हामी होगा और न मददगार
75۞ وَمِنْهُم مَّنْ عَاهَدَ اللَّهَ لَئِنْ آتَانَا مِن فَضْلِهِ لَنَصَّدَّقَنَّ وَلَنَكُونَنَّ مِنَ الصَّالِحِينَ
और इन (मुनाफेक़ीन) में से बाज़ ऐसे भी हैं जो ख़ुदा से क़ौल क़रार कर चुके थे कि अगर हमें अपने फज़ल (व करम) से (कुछ माल) देगा तो हम ज़रूर ख़ैरात किया करेगें और नेकोकार बन्दे हो जाऎंगे
76فَلَمَّا آتَاهُم مِّن فَضْلِهِ بَخِلُوا بِهِ وَتَوَلَّوا وَّهُم مُّعْرِضُونَ
तो जब ख़ुदा ने अपने फज़ल (व करम) से उन्हें अता फरमाया-तो लगे उसमें बुख्ल करने और कतराकर मुंह फेरने
77فَأَعْقَبَهُمْ نِفَاقًا فِي قُلُوبِهِمْ إِلَىٰ يَوْمِ يَلْقَوْنَهُ بِمَا أَخْلَفُوا اللَّهَ مَا وَعَدُوهُ وَبِمَا كَانُوا يَكْذِبُونَ
फिर उनसे उनके ख़ामयाजे (बदले) में अपनी मुलाक़ात के दिन (क़यामत) तक उनके दिल में (गोया खुद) निफाक डाल दिया इस वजह से उन लोगों ने जो ख़ुदा से वायदा किया था उसके ख़िलाफ किया और इस वजह से कि झूठ बोला करते थे
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अनुवाद — अत-तौबा 75

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Tuesday, August 18, 2026

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