अश-शम्स · 12/15
अनुवाद उच्चारण — अश-शम्स
إِذِ انبَعَثَ أَشْقَاهَا ۝١٢
Izim ba`asa ashqaahaa
📖 हिंदी अर्थ
जब उनमें का एक बड़ा बदबख्त उठ खड़ा हुआ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • انبَعَثَ: उठ खड़ा हुआ, तेज़ी से आगे बढ़ा, दौड़ पड़ा।
  • أَشْقَاهَا: उनमें से सबसे अधिक दुर्भाग्यशाली, सबसे बड़ा बदकार और नीच व्यक्ति।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत समूद क़ौम के उस ऐतिहासिक और भयानक दृश्य को बयान करती है जब उन्होंने अल्लाह के नबी सालिह (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और अपनी सारी हदें पार कर दीं। अल्लाह तआला ने उन्हें एक करिश्माई ऊँटनी भेजी थी जो उनके नबी की सच्चाई की निशानी थी। लेकिन उस क़ौम में से एक सबसे बदकिस्मत, सबसे शरीर और सबसे ज़्यादा सरकश इंसान उठ खड़ा हुआ और उसने उस ऊँटनी को मार डालने का बीड़ा उठा लिया। वह अकेला नहीं था, बल्कि उसकी हिमाकत ने पूरी क़ौम को अपने साथ ले लिया, क्योंकि उन्होंने उसका साथ दिया और उसके इस कुकर्म को मंज़ूरी दे दी।

यह वही लम्हा था जब अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा बंद हुआ और उनकी सज़ा का फ़ैसला हो गया। नबी सालिह (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें खूब समझाया कि अल्लाह की इस निशानी को हाथ मत लगाना, उसे पानी पीने से मत रोकना, लेकिन उन्होंने सुनी-अनसुनी कर दी और उस ऊँटनी को मार डाला। नतीजा यह हुआ कि अल्लाह का अज़ाब उन पर इस तरह टूट पड़ा कि कोई बच न सका।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि बुराई की जड़ सिर्फ एक शख्स भी हो सकता है, लेकिन जब पूरी क़ौम उसका साथ देती है या उसे रोकती नहीं, तो वह उस बुराई में शरीक हो जाती है। अल्लाह की निशानियों और उसके दीन के मामले में लापरवाही कभी भी बेअंजाम नहीं रहती। यह आयत हमें आगाह करती है कि हम अपने समाज में बुराई को देखकर चुप न रहें, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। साथ ही यह भी याद दिलाती है कि अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसके हुक्मों का एहतिराम करते हैं और अपने नबियों की पैरवी करते हैं। आज भी जो लोग कुरआन और सुन्नत की तालीमात पर अमल करते हैं, वही सच्ची कामयाबी और अल्लाह की मुहब्बत के हक़दार हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 10-14 — अश-शम्स

10وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّاهَا
और जिसने उसे (गुनाह करके) दबा दिया वह नामुराद रहा
11كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَاهَا
क़ौम मसूद ने अपनी सरकशी से (सालेह पैग़म्बर को) झुठलाया,
12إِذِ انبَعَثَ أَشْقَاهَا
जब उनमें का एक बड़ा बदबख्त उठ खड़ा हुआ
13فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ نَاقَةَ اللَّهِ وَسُقْيَاهَا
तो ख़ुदा के रसूल (सालेह) ने उनसे कहा कि ख़ुदा की ऊँटनी और उसके पानी पीने से तअर्रुज़ न करना
14فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُم بِذَنبِهِمْ فَسَوَّاهَا
मगर उन लोगों पैग़म्बर को झुठलाया और उसकी कूँचे काट डाली तो ख़ुदा ने उनके गुनाहों सबब से उन पर अज़ाब नाज़िल किया फिर (हलाक करके) बराबर कर दिया
अश-शम्सकुरान सूची
15आयत
मक्कीRevelation
12आयत

अनुवाद — अश-शम्स 12

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Tuesday, August 18, 2026

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