अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- "जल्लाहा" (جلّاها): अर्थात उजागर कर दिया, प्रकट कर दिया। यहाँ "हा" (उसको) का सर्वनाम या तो धरती की ओर संकेत करता है या फिर अंधकार की ओर, क्योंकि दिन अपने प्रकाश से अंधकार को दूर करके धरती को उजागर कर देता है।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में दिन की क़सम खाई है कि जब वह (दिन) अपनी रोशनी से अंधकार को चीरकर धरती के हर कोने को उजाला देता है। यह वही दिन है जो रात के अंधेरे के बाद आता है, और जब वह आता है तो हर चीज़ साफ़ दिखाई देने लगती है — पहाड़, मैदान, दरिया, पेड़ — सब कुछ रौशन हो जाता है। यह क़सम उस महान शक्ति की याद दिलाती है जिसने दिन और रात को बदलने का नियम बनाया।
दिन का उजाला सिर्फ़ एक प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की रहमत और क़ुदरत की निशानी है। जिस तरह दिन अंधकार को दूर करके रास्ते रौशन करता है, उसी तरह क़ुरआन और ईमान भी इंसान के दिल के अंधेरे को दूर करके उसे सही रास्ता दिखाते हैं। यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी कायनात को इस खूबसूरती से बनाया और दिन-रात का सिलसिला जारी रखा, क्या वह हमारे छोटे-बड़े कामों से बेखबर हो सकता है?
इस क़सम का मक़सद इंसान को जगाना है — कि वह अपनी ज़िंदगी के अंधेरों को ईमान की रोशनी से रौशन करे। जिस तरह दिन आते ही अंधकार भाग जाता है, अगर इंसान का दिल ईमान से जगमगा उठे तो गुनाहों का अंधेरा भी दूर हो जाता है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की हर नेमत — चाहे वह दिन का उजाला हो या रात का सुकून — उसकी तरफ़ से है, और हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए।
याद रखिए, जिस अल्लाह ने दिन को रौशनी देकर धरती को जगमगा दिया, वही अल्लाह आपके दिल को भी हिदायत की रौशनी से मालामाल कर सकता है। बस ज़रूरत है उसकी तरफ़ रुजू करने की, और उसकी बताई हुई राह पर चलने की। यही वह राह है जो दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाती है।
📜 आयत 1-5 — अश-शम्स
अनुवाद — अश-शम्स 3
सूरा अश-शम्स आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और दिन की जब उसे चमका देसूरा आयत 3/15 — अश-शम्स الشمس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शम्स सुनें, अश-शम्स अनुवाद, अश-शम्स mp3, अश-शम्स pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








