अश-शम्स · 3/15
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शम्स
وَالنَّهَارِ إِذَا جَلَّاهَا ۝٣
Wannahaari izaa jallaa haa
📖 हिंदी अर्थ
और दिन की जब उसे चमका दे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • "जल्लाहा" (جلّاها): अर्थात उजागर कर दिया, प्रकट कर दिया। यहाँ "हा" (उसको) का सर्वनाम या तो धरती की ओर संकेत करता है या फिर अंधकार की ओर, क्योंकि दिन अपने प्रकाश से अंधकार को दूर करके धरती को उजागर कर देता है।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में दिन की क़सम खाई है कि जब वह (दिन) अपनी रोशनी से अंधकार को चीरकर धरती के हर कोने को उजाला देता है। यह वही दिन है जो रात के अंधेरे के बाद आता है, और जब वह आता है तो हर चीज़ साफ़ दिखाई देने लगती है — पहाड़, मैदान, दरिया, पेड़ — सब कुछ रौशन हो जाता है। यह क़सम उस महान शक्ति की याद दिलाती है जिसने दिन और रात को बदलने का नियम बनाया।

दिन का उजाला सिर्फ़ एक प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की रहमत और क़ुदरत की निशानी है। जिस तरह दिन अंधकार को दूर करके रास्ते रौशन करता है, उसी तरह क़ुरआन और ईमान भी इंसान के दिल के अंधेरे को दूर करके उसे सही रास्ता दिखाते हैं। यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी कायनात को इस खूबसूरती से बनाया और दिन-रात का सिलसिला जारी रखा, क्या वह हमारे छोटे-बड़े कामों से बेखबर हो सकता है?

इस क़सम का मक़सद इंसान को जगाना है — कि वह अपनी ज़िंदगी के अंधेरों को ईमान की रोशनी से रौशन करे। जिस तरह दिन आते ही अंधकार भाग जाता है, अगर इंसान का दिल ईमान से जगमगा उठे तो गुनाहों का अंधेरा भी दूर हो जाता है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की हर नेमत — चाहे वह दिन का उजाला हो या रात का सुकून — उसकी तरफ़ से है, और हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए।

याद रखिए, जिस अल्लाह ने दिन को रौशनी देकर धरती को जगमगा दिया, वही अल्लाह आपके दिल को भी हिदायत की रौशनी से मालामाल कर सकता है। बस ज़रूरत है उसकी तरफ़ रुजू करने की, और उसकी बताई हुई राह पर चलने की। यही वह राह है जो दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाती है।



📜 आयत 1-5 — सूरा अश-शम्स

1وَالشَّمْسِ وَضُحَاهَا
सूरज की क़सम और उसकी रौशनी की
2وَالْقَمَرِ إِذَا تَلَاهَا
और चाँद की जब उसके पीछे निकले
3وَالنَّهَارِ إِذَا جَلَّاهَا
और दिन की जब उसे चमका दे
4وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَاهَا
और रात की जब उसे ढाँक ले
5وَالسَّمَاءِ وَمَا بَنَاهَا
और आसमान की और जिसने उसे बनाया
अश-शम्सकुरान सूची
15आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अश-शम्स 3

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Sunday, October 11, 2026

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