अद-दुहा · 5/11
अनुवाद उच्चारण — सूरा अद-दुहा
وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰ ۝٥
Wa la sawfa y`uteeka rabbuka fatarda
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُعْطِيكَ (यु'तीका): तुम्हें देगा, अता करेगा।
  • فَتَرْضَى (फ़तरदा): फिर तुम राज़ी (संतुष्ट) हो जाओगे।

व्याख्या:

ऐ नबी! तुम्हारा रब तुम्हें इतना कुछ देगा कि तुम पूरी तरह संतुष्ट और राज़ी हो जाओगे। यह वादा आख़िरत के उस महान प्रतिफल की ओर इशारा करता है जो अल्लाह ने अपने प्यारे नबी ﷺ के लिए तैयार किया है। यह अता सिर्फ़ आप ﷺ के लिए ही नहीं, बल्कि आपकी उम्मत के लिए भी है — आपको इतना प्रतिफल और सम्मान दिया जाएगा कि आप राज़ी हो जाएँगे, और आपकी उम्मत को भी इतनी रहमत और बख़्शिश मिलेगी कि आप खुश हो जाएँगे। इसमें शफ़ाअत (सिफ़ारिश) का वह महान अधिकार भी शामिल है जो अल्लाह आपको प्रदान करेगा, और आप अपनी उम्मत के लिए सिफ़ारिश करेंगे और आप राज़ी हो जाएँगे।

यह आयत उन सभी मुसीबतों और कठिनाइयों का जवाब है जो नबी ﷺ ने मक्का के दौर में झेली थीं। जब मुशरिकों ने आपको सताया, आपका मज़ाक उड़ाया और कहा कि आपका रब आपको भूल गया है, तो अल्लाह ने यह आश्वासन दिया कि आख़िरत का इनाम दुनिया से कहीं बेहतर है, और आपको वह सब कुछ मिलेगा जो आपके दिल को खुशी और संतुष्टि देगा।

दावती पहलू:

यह आयत हर मुसलमान के लिए एक बेहद खुशखबरी और उम्मीद का पैग़ाम है। जब हम देखते हैं कि अल्लाह ने अपने नबी ﷺ से ऐसा वादा किया है, तो हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी निराश नहीं करता। चाहे दुनिया में कितनी भी मुश्किलें हों, चाहे हम पर कितना भी ज़ुल्म हो, अल्लाह की रहमत और इनाम का ख़ज़ाना कभी खत्म नहीं होता। यह आयत हमें सिखाती है कि सब्र और भरोसे के साथ अल्लाह से जुड़े रहें, क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है — वह अपने बंदों को उनकी नेकियों का पूरा-पूरा बदला देगा, और उन्हें ऐसी नेमतें देगा जिनका कोई अंदाज़ा नहीं। यही वह चीज़ है जो हमारे दिलों को सुकून देती है और हमें अच्छे कामों पर मज़बूती से क़ायम रखती है।



📜 आयत 3-7 — सूरा अद-दुहा

3مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ
कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ
4وَلَلْآخِرَةُ خَيْرٌ لَّكَ مِنَ الْأُولَىٰ
और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है
5وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰ
और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ
6أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًا فَآوَىٰ
क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)
7وَوَجَدَكَ ضَالًّا فَهَدَىٰ
और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया
अद-दुहाकुरान सूची
11आयत
मक्कीअवतरण स्थान
5आयत

अनुवाद — अद-दुहा 5

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Wednesday, September 30, 2026

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