यूनुस · 52/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
ثُمَّ قِيلَ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذُوقُوا عَذَابَ الْخُلْدِ هَلْ تُجْزَوْنَ إِلَّا بِمَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ ۝٥٢
Summa qeela lillazeena zalamoo zooqoo `azaabal khuld hal tujzawna illaa bimaa kuntum taksiboon
📖 हिंदी अर्थ
फिर (क़यामत के दिन) ज़ालिम लोगों से कहा जाएगा कि (अब हमेशा के अज़ाब के मजे चखो (दुनिया में) जैसी तुम्हारी करतूतें तुम्हें (आख़िरत में) वैसा ही बदला दिया जाएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظَلَمُوا: अत्याचार किया, अपने ऊपर ज़ुल्म किया (अर्थात कुफ्र और शिर्क किया)।
  • عَذَابَ الْخُلْدِ: हमेशा रहने वाला अज़ाब, वह यातना जो कभी ख़त्म न हो।
  • تُجْزَوْنَ: तुम्हें बदला दिया जाता है, तुम्हें प्रतिफल दिया जाता है।
  • تَكْسِبُونَ: तुम कमाते थे, तुम अपने कर्मों से अर्जित करते थे।

तफ़्सीर (व्याख्या):

जब ये ज़ालिम लोग, जिन्होंने अपने ऊपर कुफ्र और शिर्क करके ज़ुल्म किया था, जहन्नम में डाल दिए जाएँगे और वे उस अज़ाब से निकलने की इच्छा करेंगे, तो उस समय उन्हें फटकारते हुए कहा जाएगा: "अब उस हमेशा रहने वाले अज़ाब का मज़ा चखो, जो कभी ख़त्म नहीं होगा। क्या तुम्हें यह बदला उसके अलावा किसी और चीज़ का दिया जा रहा है, जो तुम अपने हाथों से दुनिया में कमाते थे?" यानी तुम्हारे कुफ्र, शिर्क और गुनाहों का यही नतीजा है। यह अज़ाब तुम्हारे अपने कर्मों का फल है, न कि अल्लाह की तरफ से कोई ज़ुल्म। जिस तरह तुमने दुनिया में सिर्फ गुनाह और नाफरमानी कमाई, उसी का बदला तुम्हें आज मिल रहा है। यह बात उनके लिए सबसे बड़ी नदामत और पछतावे का कारण होगी, क्योंकि वे जान लेंगे कि उनकी बर्बादी का कारण उनके अपने ही हाथ थे।

फ़ायदे (सीख):

  1. कर्मों का फल अवश्य मिलेगा: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह तआला किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। इंसान जो कुछ भी दुनिया में कमाता है—चाहे नेकी हो या गुनाह—उसका पूरा बदला उसे आखिरत में मिलेगा। यह अल्लाह की पूर्ण न्यायपूर्ण व्यवस्था है।
  2. आखिरत की याद दिलाती है: यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया का जीवन अस्थायी है। असली और हमेशा रहने वाला जीवन आखिरत का है। इसलिए हमें अपने हर काम में यह सोचना चाहिए कि उसका नतीजा क्या होगा।
  3. तौबा की तरफ रहनुमाई: जब हम जानते हैं कि गुनाह का अंजाम यह भयानक अज़ाब है, तो हमें चाहिए कि हम दुनिया में रहते हुए अल्लाह की तरफ लौटें, तौबा करें और अपने कर्मों को सुधारें। अल्लाह तआला तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है और उनके गुनाह माफ कर देता है।
  4. अल्लाह की रहमत की कद्र: जब हम इस अज़ाब का जिक्र सुनते हैं, तो हमें अल्लाह की रहमत और माफी की नेमत की अहमियत समझ आती है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के रसूल (ﷺ) की बताई हुई राह पर चलें, ताकि हम इस अज़ाब से बच सकें और जन्नत की हमेशा वाली नेमतों के हकदार बनें।


📜 आयत 50-54 — सूरा यूनुस

50قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُهُ بَيَاتًا أَوْ نَهَارًا مَّاذَا يَسْتَعْجِلُ مِنْهُ الْمُجْرِمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो कि अगर उसका अज़ाब तुम पर रात को या दिन को आ जाए तो (तुम क्या करोगे) फिर गुनाहगार लोग आख़िर काहे की जल्दी मचा रहे हैं
51أَثُمَّ إِذَا مَا وَقَعَ آمَنتُم بِهِ ۚ آلْآنَ وَقَدْ كُنتُم بِهِ تَسْتَعْجِلُونَ
फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर ईमान लाओगे (आहा) क्या अब (ईमान लाए) हालॉकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे
52ثُمَّ قِيلَ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذُوقُوا عَذَابَ الْخُلْدِ هَلْ تُجْزَوْنَ إِلَّا بِمَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ
फिर (क़यामत के दिन) ज़ालिम लोगों से कहा जाएगा कि (अब हमेशा के अज़ाब के मजे चखो (दुनिया में) जैसी तुम्हारी करतूतें तुम्हें (आख़िरत में) वैसा ही बदला दिया जाएगा
53۞ وَيَسْتَنبِئُونَكَ أَحَقٌّ هُوَ ۖ قُلْ إِي وَرَبِّي إِنَّهُ لَحَقٌّ ۖ وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ
(ऐ रसूल) तुम से लोग पूछतें हैं कि क्या (जो कुछ तुम कहते हो) वह सब ठीक है तुम कह दो (हाँ) अपने परवरदिगार की कसम ठीक है और तुम (ख़ुदा को) हरा नहीं सकते
54وَلَوْ أَنَّ لِكُلِّ نَفْسٍ ظَلَمَتْ مَا فِي الْأَرْضِ لَافْتَدَتْ بِهِ ۗ وَأَسَرُّوا النَّدَامَةَ لَمَّا رَأَوُا الْعَذَابَ ۖ وَقُضِيَ بَيْنَهُم بِالْقِسْطِ ۚ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और (दुनिया में) जिस जिसने (हमारी नाफरमानी कर के) ज़ुल्म किया है (क़यामत के दिन) अगर तमाम ख़ज़ाने जो जमीन में हैं उसे मिल जाएँ तो अपने गुनाह के बदले ज़रुर फिदया दे निकले और जब वह लोग अज़ाब को देखेगें तो इज़हारे निदामत करेगें (शर्मिंदा होंगे) और उनमें बाहम इन्साफ़ के साथ हुक्म दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा (बराबर ज़ुल्म न किया जाएगा
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीअवतरण स्थान
52आयत

अनुवाद — यूनुस 52

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Thursday, October 1, 2026

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