यूनुस · 55/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
أَلَا إِنَّ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ أَلَا إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ۝٥٥
Alaaa inna lillaahi maa fis samaawaati wal ard; alaaa inna wa`dal laahi haqqunw wa laakinna aksarahum laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
आगाह रहो कि जो कुछ आसमानों में और ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है आग़ाह राहे कि ख़ुदा का वायदा यक़ीनी ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَلَا: सुनो! (ध्यान दो)
  • وَعْدَ اللَّهِ: अल्लाह का वादा
  • حَقٌّ: सत्य, अटल
  • لَا يَعْلَمُونَ: वे जानते नहीं

तफ़सीर (व्याख्या):

सुनो! निस्संदेह आकाशों और धरती में जो कुछ भी है, वह सब अल्लाह ही का है। उसकी मल्कियत (स्वामित्व) में किसी का कोई हिस्सा नहीं। वही इन सबका रचयिता, पालनहार और प्रबंधक है।

और सुनो! अल्लाह का वादा पूर्ण रूप से सत्य है। उसने जो वादा किया है—चाहे वह काफ़िरों के लिए दंड का हो या मोमिनों के लिए इनाम का—वह अवश्य पूरा होकर रहेगा। उसके वादे को कोई रोकने वाला नहीं, कोई टालने वाला नहीं। क़ियामत का दिन, हिसाब-किताब, जन्नत और जहन्नम—ये सब अटल सत्य हैं।

लेकिन इनमें से अधिकतर लोग इस सत्य को नहीं जानते। उनकी अज्ञानता के कारण वे इन बातों पर विश्वास नहीं करते, संदेह में पड़े रहते हैं और अपने कर्मों में लापरवाही बरतते हैं। यदि वे वास्तव में जान लेते कि अल्लाह का वादा सत्य है और उसका दंड अवश्य आने वाला है, तो वे अपने आचरण को सुधार लेते।

लाभ एवं शिक्षाएँ:

  1. अल्लाह की मल्कियत का अहसास: यह आयत हमें सिखाती है कि संपूर्ण ब्रह्मांड अल्लाह की मिल्कियत में है। जब हम यह जान लेते हैं कि हमारे पास जो कुछ भी है, वह अल्लाह का ही है, तो हमारे दिलों में उसकी नेमतों के प्रति कृतज्ञता पैदा होती है और हम उसकी राह में खर्च करने में संकोच नहीं करते।
  2. अल्लाह के वादे पर भरोसा: अल्लाह का हर वादा सत्य है। यह विश्वास मोमिन के दिल को मज़बूती देता है। मुसीबतों और परेशानियों में भी वह निराश नहीं होता, क्योंकि वह जानता है कि अल्लाह का वादा अवश्य पूरा होगा।
  3. अज्ञानता से बचने की प्रेरणा: अधिकतर लोग इसलिए गुमराह हैं क्योंकि वे सत्य को नहीं जानते। यह आयत हमें इल्म (ज्ञान) हासिल करने की तरफ प्रेरित करती है। ज्ञान ही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की सच्चाई से जोड़ता है और हमें अंधविश्वास और संदेह से बचाता है।
  4. आख़िरत की तैयारी: यह आयत हमें याद दिलाती है कि एक दिन हमें अपने कर्मों का हिसाब देना है। यह चेतावनी हमें गुनाहों से बचाती है और नेक कामों की तरफ ले जाती है। जो व्यक्ति इस सच्चाई को जान लेता है, वह दुनिया की फ़ानी चीज़ों के पीछे अपनी आख़िरत को बर्बाद नहीं करता।


📜 आयत 53-57 — सूरा यूनुस

53۞ وَيَسْتَنبِئُونَكَ أَحَقٌّ هُوَ ۖ قُلْ إِي وَرَبِّي إِنَّهُ لَحَقٌّ ۖ وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ
(ऐ रसूल) तुम से लोग पूछतें हैं कि क्या (जो कुछ तुम कहते हो) वह सब ठीक है तुम कह दो (हाँ) अपने परवरदिगार की कसम ठीक है और तुम (ख़ुदा को) हरा नहीं सकते
54وَلَوْ أَنَّ لِكُلِّ نَفْسٍ ظَلَمَتْ مَا فِي الْأَرْضِ لَافْتَدَتْ بِهِ ۗ وَأَسَرُّوا النَّدَامَةَ لَمَّا رَأَوُا الْعَذَابَ ۖ وَقُضِيَ بَيْنَهُم بِالْقِسْطِ ۚ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और (दुनिया में) जिस जिसने (हमारी नाफरमानी कर के) ज़ुल्म किया है (क़यामत के दिन) अगर तमाम ख़ज़ाने जो जमीन में हैं उसे मिल जाएँ तो अपने गुनाह के बदले ज़रुर फिदया दे निकले और जब वह लोग अज़ाब को देखेगें तो इज़हारे निदामत करेगें (शर्मिंदा होंगे) और उनमें बाहम इन्साफ़ के साथ हुक्म दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा (बराबर ज़ुल्म न किया जाएगा
55أَلَا إِنَّ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ أَلَا إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
आगाह रहो कि जो कुछ आसमानों में और ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है आग़ाह राहे कि ख़ुदा का वायदा यक़ीनी ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं
56هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
वही ज़िन्दा करता है और वही मारता है और तुम सब के सब उसी की तरफ लौटाए जाओगें
57يَا أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَاءَتْكُم مَّوْعِظَةٌ مِّن رَّبِّكُمْ وَشِفَاءٌ لِّمَا فِي الصُّدُورِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّلْمُؤْمِنِينَ
लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से नसीहत (किताबे ख़ुदा आ चुकी और जो (मरज़ शिर्क वगैरह) दिल में हैं उनकी दवा और ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत
यूनुसकुरान सूची
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55आयत

अनुवाद — यूनुस 55

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Friday, October 2, 2026

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