यूनुस · 56/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ ۝٥٦
Huwa yuhyee wa yumeetu wailaihi turja`oon
📖 हिंदी अर्थ
वही ज़िन्दा करता है और वही मारता है और तुम सब के सब उसी की तरफ लौटाए जाओगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُحْيِي: जीवन प्रदान करता है, जीवित करता है।
  • يُمِيتُ: मृत्यु देता है, मारता है।
  • تُرْجَعُونَ: तुम लौटाए जाओगे, वापस ले जाए जाओगे।

व्याख्या:

यह आयत अल्लाह तआला की सर्वोच्च शक्ति और उसके एकमात्र अधिकार को स्पष्ट करती है। वही अकेला है जो जीवन देता है और वही मृत्यु देता है। जिस प्रकार उसके लिए किसी को जीवित करना या मारना कोई कठिन कार्य नहीं है, उसी प्रकार मृत लोगों को दोबारा उठाना भी उसके लिए बिल्कुल आसान है। यहाँ इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि मृत्यु के बाद पुनरुत्थान (हश्र) अल्लाह की कुदरत से ही होगा, और यह कोई असंभव बात नहीं है।

फिर अल्लाह तआला कहता है कि तुम सबको उसी की ओर लौटकर जाना है। यानी मरने के बाद तुम्हारा अंतिम पड़ाव अल्लाह ही है, और उसी दिन वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा। यह लौटना केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मिक और न्यायिक रूप से होगा, जहाँ हर व्यक्ति को उसके अच्छे या बुरे कर्मों का हिसाब दिया जाएगा। यह आयत मक्का के काफिरों को संबोधित कर रही है जो पुनरुत्थान को असंभव मानते थे, और उन्हें बता रही है कि जिसने पहली बार पैदा किया, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह सक्षम है।

शिक्षाएँ और लाभ:

  • यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन और मृत्यु पूरी तरह अल्लाह के हाथ में हैं। कोई और किसी को जीवन नहीं दे सकता और न ही मौत ला सकता है। इसलिए हमें केवल अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसी से डरना चाहिए।
  • मृत्यु के बाद पुनरुत्थान का विश्वास हमें जवाबदेही का एहसास कराता है। जब हमें यकीन होगा कि हमें अल्लाह के सामने हाज़िर होना है, तो हम अपने कर्मों को सुधारने की कोशिश करेंगे और गुनाहों से बचेंगे।
  • यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया का जीवन अस्थायी है, और असली जीवन आख़िरत का है। इसलिए हमें दुनिया की चीज़ों में इतना नहीं उलझना चाहिए कि आख़िरत को भूल जाएँ।
  • अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करने से हमारा ईमान मज़बूत होता है। जो हर पल जीवन और मौत पर काबू रखता है, वही हमारी हर ज़रूरत को पूरा कर सकता है और हमारी हर मुश्किल को हल कर सकता है।


📜 आयत 54-58 — सूरा यूनुस

54وَلَوْ أَنَّ لِكُلِّ نَفْسٍ ظَلَمَتْ مَا فِي الْأَرْضِ لَافْتَدَتْ بِهِ ۗ وَأَسَرُّوا النَّدَامَةَ لَمَّا رَأَوُا الْعَذَابَ ۖ وَقُضِيَ بَيْنَهُم بِالْقِسْطِ ۚ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और (दुनिया में) जिस जिसने (हमारी नाफरमानी कर के) ज़ुल्म किया है (क़यामत के दिन) अगर तमाम ख़ज़ाने जो जमीन में हैं उसे मिल जाएँ तो अपने गुनाह के बदले ज़रुर फिदया दे निकले और जब वह लोग अज़ाब को देखेगें तो इज़हारे निदामत करेगें (शर्मिंदा होंगे) और उनमें बाहम इन्साफ़ के साथ हुक्म दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा (बराबर ज़ुल्म न किया जाएगा
55أَلَا إِنَّ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ أَلَا إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
आगाह रहो कि जो कुछ आसमानों में और ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है आग़ाह राहे कि ख़ुदा का वायदा यक़ीनी ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं
56هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
वही ज़िन्दा करता है और वही मारता है और तुम सब के सब उसी की तरफ लौटाए जाओगें
57يَا أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَاءَتْكُم مَّوْعِظَةٌ مِّن رَّبِّكُمْ وَشِفَاءٌ لِّمَا فِي الصُّدُورِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّلْمُؤْمِنِينَ
लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से नसीहत (किताबे ख़ुदा आ चुकी और जो (मरज़ शिर्क वगैरह) दिल में हैं उनकी दवा और ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत
58قُلْ بِفَضْلِ اللَّهِ وَبِرَحْمَتِهِ فَبِذَٰلِكَ فَلْيَفْرَحُوا هُوَ خَيْرٌ مِّمَّا يَجْمَعُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (ये क़ुरान) ख़ुदा के फज़ल व करम और उसकी रहमत से तुमको मिला है (ही) तो उन लोगों को इस पर खुश होना चाहिए
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीअवतरण स्थान
56आयत

अनुवाद — यूनुस 56

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सूरा आयत 56/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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