यूनुस · 97/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَلَوْ جَاءَتْهُمْ كُلُّ آيَةٍ حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ ۝٩٧
Wa law jaaa`at hum kullu Aayatin hattaa yarawul `azaabal aleem
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब देख (न) लेगें ईमान न लाएंगें अगरचे इनके सामने सारी (ख़ुदाई के) मौजिज़े आ मौजूद हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آيَةٍ: निशानी, चमत्कार, या कोई सबूत जो सत्य को सिद्ध करे।
  • الْعَذَابَ الْأَلِيمَ: दर्दनाक और पीड़ादायक यातना।

व्याख्या:

इस आयात में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए फ़रमाता है कि यदि इन काफ़िरों के पास हर तरह की निशानी और चमत्कार आ जाएँ — चाहे वे शरई मौजिज़े हों या कॉस्मिक (ब्रह्मांडीय) घटनाएँ — तो भी वे ईमान नहीं लाएँगे। उनका ईमान लाना तो उस वक़्त तक मुमकिन नहीं, जब तक कि वे अपनी आँखों से दर्दनाक अज़ाब को न देख लें। लेकिन जब वे अज़ाब को सामने देखेंगे, उस वक़्त वे ईमान लाएँगे, मगर वह ईमान उनके किसी काम नहीं आएगा, क्योंकि आज़माइश का दौर ख़त्म हो चुका होगा और अज़ाब आ चुका होगा। यह उनका ईमान सिर्फ़ मौत के वक़्त या अज़ाब के नुज़ूल के वक़्त का ईमान होगा, जो कि क़बूल नहीं होता। यही हालत फ़िरऔन की थी जब उसने ग़रक़ होते वक़्त ईमान लाया, लेकिन उसका ईमान रद्द कर दिया गया।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान लाने के लिए चमत्कारों का दिखना ज़रूरी नहीं है; अल्लाह की दी हुई अक़्ल और उसकी भेजी हुई किताबें और रसूल काफ़ी हैं। जो सच्चे दिल से सच्चाई तलाश करता है, अल्लाह उसे हिदायत देता है।
  2. अल्लाह की रहमत और मोहलत (ढील) का फ़ायदा उठाना चाहिए। जब तक वक़्त है, तौबा और ईमान क़बूल है; अज़ाब आने के बाद पछतावा बेकार है।
  3. यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और उसकी रहमत की तरफ़ जल्दी करने की तरग़ीब देती है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल को अल्लाह की इताअत में गुज़ारें और उसके दीन को अपनाएँ, ताकि उस दिन की शर्मिंदगी से बच सकें जब ईमान काम नहीं आएगा।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह का क़ानून (सुन्नतुल्लाह) यही है कि जब अज़ाब आ जाए, तो ईमान क़बूल नहीं होता। इसलिए हमें हमेशा ईमान पर साबित क़दम रहना चाहिए और मौत से पहले ही अल्लाह की तरफ़ रुजू कर लेना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 95-99 — यूनुस

95وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِ اللَّهِ فَتَكُونَ مِنَ الْخَاسِرِينَ
न उन लोगों से होना जिन्होंने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया (वरना) तुम भी घाटा उठाने वालों से हो जाओगे
96إِنَّ الَّذِينَ حَقَّتْ عَلَيْهِمْ كَلِمَتُ رَبِّكَ لَا يُؤْمِنُونَ
(ऐ रसूल) इसमें शक़ नहीं कि जिन लोगों के बारे में तुम्हारे परवरदिगार को बातें पूरी उतर चुकी हैं (कि ये मुस्तहके अज़ाब हैं)
97وَلَوْ جَاءَتْهُمْ كُلُّ آيَةٍ حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ
वह लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब देख (न) लेगें ईमान न लाएंगें अगरचे इनके सामने सारी (ख़ुदाई के) मौजिज़े आ मौजूद हो
98فَلَوْلَا كَانَتْ قَرْيَةٌ آمَنَتْ فَنَفَعَهَا إِيمَانُهَا إِلَّا قَوْمَ يُونُسَ لَمَّا آمَنُوا كَشَفْنَا عَنْهُمْ عَذَابَ الْخِزْيِ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَمَتَّعْنَاهُمْ إِلَىٰ حِينٍ
कोई बस्ती ऐसी क्यों न हुई कि ईमान क़ुबूल करती तो उसको उसका ईमान फायदे मन्द होता हाँ यूनूस की क़ौम जब (अज़ाब देख कर) ईमान लाई तो हमने दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी में उनसे रुसवाई का अज़ाब दफा कर दिया और हमने उन्हें एक ख़ास वक्त तक चैन करने दिया
99وَلَوْ شَاءَ رَبُّكَ لَآمَنَ مَن فِي الْأَرْضِ كُلُّهُمْ جَمِيعًا ۚ أَفَأَنتَ تُكْرِهُ النَّاسَ حَتَّىٰ يَكُونُوا مُؤْمِنِينَ
और (ऐ पैग़म्बर) अगर तेरा परवरदिगार चाहता तो जितने लोग रुए ज़मीन पर हैं सबके सब ईमान ले आते तो क्या तुम लोगों पर ज़बरदस्ती करना चाहते हो ताकि सबके सब ईमानदार हो जाएँ हालॉकि किसी शख़्स को ये एख्तेयार नहीं
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीRevelation
97आयत

अनुवाद — यूनुस 97

सूरा यूनुस आयत 97 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब देख (न) लेगें ईमान…

सूरा आयत 97/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 95–99. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए