अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- آيَةٍ: निशानी, चमत्कार, या कोई सबूत जो सत्य को सिद्ध करे।
- الْعَذَابَ الْأَلِيمَ: दर्दनाक और पीड़ादायक यातना।
व्याख्या:
इस आयात में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए फ़रमाता है कि यदि इन काफ़िरों के पास हर तरह की निशानी और चमत्कार आ जाएँ — चाहे वे शरई मौजिज़े हों या कॉस्मिक (ब्रह्मांडीय) घटनाएँ — तो भी वे ईमान नहीं लाएँगे। उनका ईमान लाना तो उस वक़्त तक मुमकिन नहीं, जब तक कि वे अपनी आँखों से दर्दनाक अज़ाब को न देख लें। लेकिन जब वे अज़ाब को सामने देखेंगे, उस वक़्त वे ईमान लाएँगे, मगर वह ईमान उनके किसी काम नहीं आएगा, क्योंकि आज़माइश का दौर ख़त्म हो चुका होगा और अज़ाब आ चुका होगा। यह उनका ईमान सिर्फ़ मौत के वक़्त या अज़ाब के नुज़ूल के वक़्त का ईमान होगा, जो कि क़बूल नहीं होता। यही हालत फ़िरऔन की थी जब उसने ग़रक़ होते वक़्त ईमान लाया, लेकिन उसका ईमान रद्द कर दिया गया।
फ़ायदे:
- यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान लाने के लिए चमत्कारों का दिखना ज़रूरी नहीं है; अल्लाह की दी हुई अक़्ल और उसकी भेजी हुई किताबें और रसूल काफ़ी हैं। जो सच्चे दिल से सच्चाई तलाश करता है, अल्लाह उसे हिदायत देता है।
- अल्लाह की रहमत और मोहलत (ढील) का फ़ायदा उठाना चाहिए। जब तक वक़्त है, तौबा और ईमान क़बूल है; अज़ाब आने के बाद पछतावा बेकार है।
- यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और उसकी रहमत की तरफ़ जल्दी करने की तरग़ीब देती है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल को अल्लाह की इताअत में गुज़ारें और उसके दीन को अपनाएँ, ताकि उस दिन की शर्मिंदगी से बच सकें जब ईमान काम नहीं आएगा।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह का क़ानून (सुन्नतुल्लाह) यही है कि जब अज़ाब आ जाए, तो ईमान क़बूल नहीं होता। इसलिए हमें हमेशा ईमान पर साबित क़दम रहना चाहिए और मौत से पहले ही अल्लाह की तरफ़ रुजू कर लेना चाहिए।
📜 आयत 95-99 — यूनुस
अनुवाद — यूनुस 97
सूरा यूनुस आयत 97 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब देख (न) लेगें ईमान…सूरा आयत 97/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 95–99. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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