अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَلِيمٍ: दर्दनाक, बहुत ही पीड़ादायक (जो सख्त दर्द दे)।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को जो सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात बताई, वह यही थी कि वे अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत न करें। यही उनका मूल संदेश था, और यही सभी पैग़म्बरों का संदेश रहा है। उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: मैं तुम्हें यह आदेश देता हूँ कि तुम अपनी इबादत, अपनी प्रार्थना, अपनी आशाएँ और अपना सब कुछ सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह के लिए समर्पित कर दो। उसके सिवा किसी भी माबूद (पूज्य) को न मानो, चाहे वह बुत हों, मूर्तियाँ हों या कोई और चीज़।
इसके बाद उन्होंने उन्हें डराया और कहा: मुझे तुम्हारे लिए एक ऐसे दिन के अज़ाब का डर है जो बहुत ही दर्दनाक होगा। वह दिन क़यामत का दिन है, जिसे "अलीम" (दर्दनाक) इसलिए कहा गया क्योंकि उस दिन का अज़ाब बेहद सख्त और तकलीफ़देह होगा। यदि तुमने अल्लाह की इबादत नहीं की और उसके साथ किसी और को शरीक किया, तो उस दिन तुम्हें ऐसी सज़ा मिलेगी जिसकी कोई मिसाल नहीं। यह एक स्पष्ट चेतावनी थी कि अल्लाह की तौहीद (एकता) ही नजात (मुक्ति) का रास्ता है, और शिर्क (बहुदेववाद) ही हलाकत (विनाश) का कारण है।
फ़ायदे (सीख):
- तौहीद ही सबसे बड़ी सच्चाई है: इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम की सबसे बुनियादी शिक्षा अल्लाह की एकता है। इंसान की कामयाबी और नजात इसी में है कि वह अल्लाह को अकेला माने और उसी की इबादत करे।
- अज़ाब से डरना ईमान की निशानी है: पैग़म्बरों का तरीक़ा यह था कि वे लोगों को अल्लाह की रहमत की ख़ुशख़बरी भी देते थे और उसके अज़ाब से डराते भी थे। यह डर इंसान को गुनाहों से बचाता है और उसे सीधे रास्ते पर चलने की ताक़त देता है।
- दुनिया की ज़िंदगी आख़िरत की तैयारी है: यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया का जीवन आख़िरी नहीं है। एक दिन ज़रूर आएगा जब हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना होगा। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा (प्रसन्नता) के लिए समर्पित करना चाहिए।
- अच्छे इंसान की पहचान: जो इंसान दूसरों को अल्लाह की तरफ़ बुलाता है और उन्हें अज़ाब से डराता है, वही सच्चा मित्र और हितैषी है। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के लिए जो प्यार और चिंता दिखाई, वह हमारे लिए एक आदर्श है कि हम भी दूसरों की भलाई के लिए उन्हें सच्चाई की तरफ़ बुलाएँ।
📜 आयत 24-28 — हूद
अनुवाद — हूद 26
सूरा हूद आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और) ये (समझता हूँ) कि तुम ख़ुदा के सिवा किसी…सूरा आयत 26/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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