हूद · 68/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۗ أَلَا إِنَّ ثَمُودَ كَفَرُوا رَبَّهُمْ ۗ أَلَا بُعْدًا لِّثَمُودَ ۝٦٨
Ka al lam yaghnaw feehaaa; alaaa inna Samooda kafaroo Rabbahum; alaa bu`dal li Samood
📖 हिंदी अर्थ
और ऐसे मर मिटे कि गोया उनमें कभी बसे ही न थे तो देखो क़ौमे समूद ने अपने परवरदिगार की नाफरमानी की और (सज़ा दी गई) सुन रखो कि क़ौमे समूद (उसकी बारगाह से) धुत्कारी हुईहै

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَغْنَوْا: रहना, बसना, निवास करना।
  • ثَمُودَ: समूद क़ौम, जो पैग़म्बर सालिह (अलैहिस्सलाम) की उम्मत थी।
  • كَفَرُوا: इनकार किया, अविश्वास किया।
  • بُعْدًا: दूरी, रहमत से दूर होना, विनाश।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत समूद क़ौम के विनाश के बाद का दृश्य प्रस्तुत करती है। जब उन पर अल्लाह का अज़ाब आया और वे अपने घरों में तबाह होकर गिर पड़े, तो ऐसा लगा जैसे वे कभी वहाँ बसे ही नहीं थे। उनकी शक्ति, उनकी इमारतें, उनकी तरक्की — सब कुछ मिट गया। वे इतनी जल्दी मिट गए कि गुज़रे हुए वक़्त की कोई निशानी भी बाक़ी न रही।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "सुन लो! समूद ने अपने रब का इनकार किया।" यानी उन्होंने अल्लाह की वह नेमतें देखीं जो उन्हें दी गई थीं — चट्टानों को काटकर बनाए गए घर, बाग़ात, चश्मे — लेकिन फिर भी उन्होंने शुक्र नहीं किया और अपने रब की आयतों को झुठलाया। उन्होंने सालिह (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और उस ऊँटनी को मार डाला जो अल्लाह की निशानी थी।

आख़िर में फ़रमाया: "सुन लो! समूद पर दूरी और विनाश है!" यानी अल्लाह की रहमत से वे दूर हो गए, उनके लिए हर भलाई का दरवाज़ा बंद हो गया। यह उनके लिए शर्मिंदगी और ज़िल्लत की घोषणा है — वे जिस चीज़ पर इतराते थे, उसी में वे तबाह हो गए।

फ़ायदे (सबक):

  1. दुनिया की तरक्की और ताक़त किसी को अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकती। समूद की चट्टानों को काटकर बनाई गई इमारतें आज भी मौजूद हैं, लेकिन उनके बनाने वाले मिट गए।
  2. अल्लाह की नेमतों का सही इस्तेमाल शुक्र है, और शुक्र का तरीक़ा यह है कि उसकी इबादत की जाए और उसके रसूलों की पैरवी की जाए। नेमतों के बावजूद नाफ़रमानी अज़ाब का सबब बनती है।
  3. अल्लाह की रहमत से दूर होना सबसे बड़ी सज़ा है। मुसलमान को चाहिए कि वह हमेशा अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखे और उससे दूर होने वाले कामों से बचे।
  4. यह आयत बताती है कि अल्लाह की सज़ा जब आती है, तो इतनी तेज़ और पूरी होती है कि इंसान की सारी तदबीरें और ताकत बेकार हो जाती है। इसलिए इंसान को अल्लाह के सामने इतराना नहीं चाहिए, बल्कि उसकी नाफ़रमानी से डरना चाहिए।
  5. इस क़िस्से में उन लोगों के लिए इबरत है जो अपनी ताक़त और दौलत पर भरोसा करके हक़ से मुँह मोड़ते हैं — उनका अंजाम भी समूद जैसा ही हो सकता है।


📜 आयत 66-70 — सूरा हूद

66فَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا صَالِحًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَمِنْ خِزْيِ يَوْمِئِذٍ ۗ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْقَوِيُّ الْعَزِيزُ
यही ख़ुदा का वायदा है जो कभी झूठा नहीं होता फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने सालेह और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दी और उस दिन की रुसवाई से बचा लिया इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार ज़बरदस्त ग़ालिब है
67وَأَخَذَ الَّذِينَ ظَلَمُوا الصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دِيَارِهِمْ جَاثِمِينَ
और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक सख्त चिघाड़ ने ले डाला तो वह लोग अपने अपने घरों में औंधें पड़े रह गये
68كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۗ أَلَا إِنَّ ثَمُودَ كَفَرُوا رَبَّهُمْ ۗ أَلَا بُعْدًا لِّثَمُودَ
और ऐसे मर मिटे कि गोया उनमें कभी बसे ही न थे तो देखो क़ौमे समूद ने अपने परवरदिगार की नाफरमानी की और (सज़ा दी गई) सुन रखो कि क़ौमे समूद (उसकी बारगाह से) धुत्कारी हुईहै
69وَلَقَدْ جَاءَتْ رُسُلُنَا إِبْرَاهِيمَ بِالْبُشْرَىٰ قَالُوا سَلَامًا ۖ قَالَ سَلَامٌ ۖ فَمَا لَبِثَ أَن جَاءَ بِعِجْلٍ حَنِيذٍ
और हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) इबराहीम के पास खुशख़बरी लेकर आए और उन्होंने (इबराहीम को) सलाम किया (इबराहीम ने) सलाम का जवाब दिया फिर इबराहीम एक बछड़े का भुना हुआ (गोश्त) ले आए
70فَلَمَّا رَأَىٰ أَيْدِيَهُمْ لَا تَصِلُ إِلَيْهِ نَكِرَهُمْ وَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۚ قَالُوا لَا تَخَفْ إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمِ لُوطٍ
(और साथ खाने बैठें) फिर जब देखा कि उनके हाथ उसकी तरफ नहीं बढ़ते तो उनकी तरफ से बदगुमान हुए और जी ही जी में डर गए (उसको वह फरिश्ते समझे) और कहने लगे आप डरे नहीं हम तो क़ौम लूत की तरफ (उनकी सज़ा के लिए) भेजे गए हैं
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
68आयत

अनुवाद — हूद 68

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Friday, October 2, 2026

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